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हीमोफीलिया बीमारी को खत्म करने के लिए सरकार बनाएगी नीति

Fri, 22 Apr 2016 06:41 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Fri, 22 Apr 2016 06:41 PM IST
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government make policy for eliminate of Haemophilia
हीमोफीलिया - फोटो : Demo Pic.
श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में जानलेवा बीमारी हीमोफीलिया पर को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को वर्ल्ड हीमोफीलिया वीक के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा इस जानलेवा बीमारी पर रोशनी डाली गए।
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ऐसी बीमारी जिसमें अंदरूनी और बाहरी चोट लगने से खून लगातार बहता रहता है जो रुकता नहीं। हीमोफीलिया के मरीज मेहराज अहमद पर्रे ने बताया कि यहां अस्पतालों में एक हीमोफीलिया मरीज के लिए जितना फैक्टर होना चाहिए उतना उपलब्ध नहीं हो पाता है।
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उन्होंने बताया कि अगर समय पर फैक्टर नहीं लिया गया और इसका इलाज भी इतना महंगा है कि आम आदमी नहीं झेल पाता। मेहराज के अनुसार सालाना 3600 यूनिट लगती हैं जो करीब 10 लाख रुपये की बैठती हैं। उन्होंने अस्पतालों में फैक्टर उपलब्ध करवाने की मांग की।
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राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बाली भगत ने कहा कि मुझे भी यहां आने से पहले इस बीमारी के बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन यहां आने पर मुझे इसके बारे में काफी कुछ पता चला। उन्होंने कहा कि यह एक जानलेवा खतरनाक बीमारी है जिसे जड़ से खत्म करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि इस बीमारी के इलाज में काफी पैसा खर्च होता है लेकिन फंड की भी कमी रहती है जिसके लिए एक योजना बनाई जाएगी।

1100 मरीज कश्मीर में 
कश्मीर में हीमोफीलिया के मरीजों की संख्या 1100 के करीब है। इनमें से सिर्फ 252 मरीज ही हीमोफीलिया सोसाइटी के तहत पंजीकृत हैं। सबसे कम मरीज की आयु 5 महीने की है। यह बीमारी कश्मीर में 10 हजार में से 1 को होती है। 

ड्रग सप्लाई के लिए नया तरीका सोचेंगे
जम्मू कश्मीर मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन लिमिटेड पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बाली भगत का कहना है कि इसका गठन सही ढंग से नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से इसमें कुछ कमियां हैं जिसे ठीक करने में कम से कम दो साल लगेंगे।


इस बीच अस्पतालों में ड्रग सप्लाई के लिए कोई और तरीका भी सोचा जाएगा ताकि जब तक यह कारपोरेशन पूरी तरह से कार्य करने लायक नहीं होती तो ड्रग सप्लाई प्रभावित न हो।
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