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कैबिनेट मीटिंग: डिविजनल कश्मीर पर गिरी कश्मीर हिंसा की गाज
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 29 Jul 2016 11:36 AM IST
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सीएम महबूबा मुफ्ती और डिप्टी सीएम निर्मल सिंह
- फोटो : Amar Ujala
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राज्य कैबिनेट की बैठक में कश्मीर के हालात पर चर्चा की गई। सबसे ज्यादा जोर घाटी में शांति बहाल करने तथा हालात को सामान्य करने पर रहा।
इस बीच, डिवकाम कश्मीर असगर समून पर कश्मीर हिंसा की गाज भी गिरी। उन्हें पद से हटाकर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बनाया गया है। पहाड़ी बोली लोगों को एसटी दर्जा दिए जाने को मंजूरी दी गई।
उपभोक्ता मामलों एवं जन वितरण विभाग (सीएपीडी) का नाम बदलकर फूड, सिविल सप्लाई और कंज्यूमर अफेयर्स विभाग कर दिया गया। पुलिस विभाग में तबादले प्रस्तावित थे, लेकिन, अब कानून व्यवस्था बनाए रखने की दृष्टि से 15 अगस्त के बाद किए जाएंगे।
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इस बीच, डिवकाम कश्मीर असगर समून पर कश्मीर हिंसा की गाज भी गिरी। उन्हें पद से हटाकर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बनाया गया है। पहाड़ी बोली लोगों को एसटी दर्जा दिए जाने को मंजूरी दी गई।
उपभोक्ता मामलों एवं जन वितरण विभाग (सीएपीडी) का नाम बदलकर फूड, सिविल सप्लाई और कंज्यूमर अफेयर्स विभाग कर दिया गया। पुलिस विभाग में तबादले प्रस्तावित थे, लेकिन, अब कानून व्यवस्था बनाए रखने की दृष्टि से 15 अगस्त के बाद किए जाएंगे।
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28 अफसरों के भी तबादले
पीड़ित के परिवार वालों से मिलतीं महबूबा मुफ्ती
- फोटो : File Photo
सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट ने 28 अफसरों के तबादले किए हैं। इनमें जम्मू नगर निगम की कमिश्नर मनदीप कौर के स्थान पर कठुआ के एडीसी मनमोहन सिंह को भेजा गया है। ट्रांसपोर्ट सचिव राज कुमार को पशुपालन विभाग का सचिव बनाया गया है।
तबादला सूची शुक्रवार को जारी हो सकती है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की अध्यक्षता में कैबिनेट ने अहम फैसला लेते हुए पहाड़ी बोली वाले लोगों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे को लेकर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद इसे केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय को भेजे जाने को मंजूरी प्रदान कर दी।
विशेषज्ञ समिति ने सांस्कृतिक विशिष्टिता और पहाड़ी बोली बोलने वाले लोगों की सामाजिक आर्थिक स्थिति के आधार पर एसटी के दर्जे की सिफारिश की है।
तबादला सूची शुक्रवार को जारी हो सकती है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की अध्यक्षता में कैबिनेट ने अहम फैसला लेते हुए पहाड़ी बोली वाले लोगों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे को लेकर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद इसे केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय को भेजे जाने को मंजूरी प्रदान कर दी।
विशेषज्ञ समिति ने सांस्कृतिक विशिष्टिता और पहाड़ी बोली बोलने वाले लोगों की सामाजिक आर्थिक स्थिति के आधार पर एसटी के दर्जे की सिफारिश की है।