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कश्मीर हिंसा के शिकार लोगों के परिवार की सुध लेगी सरकार
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Thu, 21 Jul 2016 11:31 PM IST
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पीड़ित के परिवार वालों से मिलतीं महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने वीरवार को अनंतनाग और कुलगाम का दौरा कर कश्मीर हिंसा में मारे गए युवाओं के परिवार वालों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया।
उन्होंने कहा कि कुछ तत्व युवाओं के शवों पर राजनीति खेलने में रुचि रखते हैं, लेकिन मारे गए युवाओं के परिवार के सदस्यों को ही हमेशा के लिए इस दर्द के साथ जीना है। विडंबना है कि केवल इन युवाओं के माता-पिता तथा परिवार के निकट सदस्यों को ही इस मूर्खतापूर्ण हिंसा के लिए जीवनभर अपने प्रियजनों को खोने के मानसिक आघात के साथ जीना होगा।
आज कश्मीर में सैकड़ों ऐसे परिवार रह रहे हैं जिन्होंने हिंसा के एक या अन्य माध्यम से अपने प्रियजनों को खो दिया है और उन्हें भगवान की दया पर छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन परिवारों में से अधिकांश ऐसी दुखभरी परिस्थितियों में रह रहे हैं जहां उन्हें दिन-प्रतिदिन के जीवन के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि मारे गए युवाओं की अंत्येष्टि में हजारों लोग शामिल हो सकते हैं, लेकिन संकट की इस घड़ी में कितने लोग परिवार को मुश्किलों से निकालने में मदद करने के लिए परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि हिंसा के शिकार लोगों के परिजनों के लिए एक सुरक्षित तथा सम्मानजनक जीवनयापन सुनिश्चित करने के लिए तंत्र के बाहर काम करने की कोशिश की जाएगी, ताकि परिवार को सामान्य जीवन जीने के लिए इधर उधर की ठोकरें न खानी पड़े। उन्होंने कहा कि इस तरह के परिवारों के पास पहुंचना सरकार की जिम्मेदारी है।
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उन्होंने कहा कि कुछ तत्व युवाओं के शवों पर राजनीति खेलने में रुचि रखते हैं, लेकिन मारे गए युवाओं के परिवार के सदस्यों को ही हमेशा के लिए इस दर्द के साथ जीना है। विडंबना है कि केवल इन युवाओं के माता-पिता तथा परिवार के निकट सदस्यों को ही इस मूर्खतापूर्ण हिंसा के लिए जीवनभर अपने प्रियजनों को खोने के मानसिक आघात के साथ जीना होगा।
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आज कश्मीर में सैकड़ों ऐसे परिवार रह रहे हैं जिन्होंने हिंसा के एक या अन्य माध्यम से अपने प्रियजनों को खो दिया है और उन्हें भगवान की दया पर छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन परिवारों में से अधिकांश ऐसी दुखभरी परिस्थितियों में रह रहे हैं जहां उन्हें दिन-प्रतिदिन के जीवन के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि मारे गए युवाओं की अंत्येष्टि में हजारों लोग शामिल हो सकते हैं, लेकिन संकट की इस घड़ी में कितने लोग परिवार को मुश्किलों से निकालने में मदद करने के लिए परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि हिंसा के शिकार लोगों के परिजनों के लिए एक सुरक्षित तथा सम्मानजनक जीवनयापन सुनिश्चित करने के लिए तंत्र के बाहर काम करने की कोशिश की जाएगी, ताकि परिवार को सामान्य जीवन जीने के लिए इधर उधर की ठोकरें न खानी पड़े। उन्होंने कहा कि इस तरह के परिवारों के पास पहुंचना सरकार की जिम्मेदारी है।