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महबूबा बोलीं, पता होता कि बुरहान है तो गोली नहीं मारती सेना

Fri, 29 Jul 2016 11:33 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Fri, 29 Jul 2016 11:33 AM IST
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Burhan Wani May Have Been Spared If He'd Been Identified: mehbooba
सीएम महबूबा मुफ्ती - फोटो : Amar Ujala
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि सुरक्षा बलों को मुठभेड़ स्थल पर बुरहान वानी की मौजूदगी की जानकारी नहीं थी। पुलिस तथा सेना ने बताया कि उन्हें तीन आतंकियों के मौजूद होने की सूचना थी, लेकिन घर के भीतर कौन हैं यह जानकारी नहीं थी। यदि बुरहान की मौजूदगी की जानकारी होती तो यह संभव था कि आज जैसे हालात उत्पन्न नहीं होते। 
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पीडीपी के स्थापना दिवस समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को स्थिति को संभालने के लिए आवश्यक इंतजाम करने को पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। जब संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरू को फांसी दी गई तो तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को फांसी की जानकारी थी। इस वजह से उमर सरकार ने फांसी से पहले पर्याप्त इंतजाम कर लिए थे।
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हम कुछ नहीं जानते थे और अचानक यह सब हो गया, लेकिन इस सबके बाद कर्फ्यू लगा दिया गया ताकि बच्चे सड़क पर न निकल पाएं। उन्होंने कहा कि रियासत में ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जिसमें बातचीत शुरू हो सके, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल जैसी शांति प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए।
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सुरक्षा बलों के कैंप में घुसने के ल‌िए युवाओं को उकसाया गया

Burhan Wani May Have Been Spared If He'd Been Identified: mehbooba
कश्मीर में ह‌िंसा - फोटो : File Photo
पेलेट गन के इस्तेमाल पर कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भीड़ नियंत्रण के उपायों के रूप में  पेलेट गन के इस्तेमाल पर गंभीरता से पुनर्विचार का आश्वासन दिया है। कुछ ऐसे तत्व हैं जो घाटी में जानबूझकर गड़बड़ी पैदा कर रहे हैं। हिंसा में लोगों की जान जाने का दुख है।

सुरक्षा बलों के कैंपों में घुसने के लिए युवाओं को उकसाया गया, जिसके चलते 12, 14, 16 साल के निर्दोष युवाओं की जान चली गई। इन युवाओं का इस्तेमाल करने वाले अब उनके परिवारों को देखने तक नहीं आते। कहा कि आज पार्टी का स्थापना दिवस है।

पार्टी की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि जम्मू-कश्मीर में सुलह प्रक्रिया की बहाली हो, पड़ोसी राष्ट्रों के साथ बेहतर संबंध हों, बातचीत व शांति बहाल हो, बार्डर पार लोगों का आवागमन हो, लोगों की परेशानियां दूर हों। लेकिन दुर्भाग्य से कुछ ऐसे तत्व हैं जो पर्यटन तथा विकास कार्यों के गति पकड़ते ही ऐसे कार्य करते हैं जिससे गड़बड़ी पैदा हों और हड़ताल की जाए।

उन्होंने कहा कि जनता यह समझ चुकी है कि हड़ताल से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता यह जान चुकी है कि पिछले 30 सालों में कई युवाओं की जानें गई हैं, हड़ताल और कर्फ्यू के साथ ही कई भवनों को आग लगा दी गई है, लेकिन कश्मीरी उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के कार्यकाल में मुजफ्फराबाद रोड के अलावा कुछ हासिल नहीं कर सके।

 

दुर्भाग्य से 2005 के बाद से शांति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने कहा कि आज भाजपा के साथ गठबंधन भी उसी शांति प्रक्रिया जैसा है जैसा रियासत के हालात सुधारने के लिए वाजपेयी तथा सईद के कार्यकाल में शुरू हुआ था। 

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