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धमाके की आवाज सुन सिहर उठे भारत-पाक सीमा पर बसे गांव के लोग
ब्यूरो, अमर उजाला/अरनिया
Updated Wed, 12 Oct 2016 11:42 PM IST
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बम धमाका
- फोटो : Demo Pic.
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क्षेत्र की पीतल पोस्ट के पास घास की सफाई करते वक्त सुरक्षा बल के जवानों को मोर्टार का शेल मिला। 82 एमएम का यह शेल जमीन में धंसा था।
दोपहर बाद इसे निष्क्रिय कर दिया गया। बुधवार को सीमा की ओर से जोरदार धमाके की आवाज सुनकर सीमावर्ती गांव के लोगों के होश उड़ गए।
ग्रामीण एक-दूसरे से जानने की कोशिश करने लगे कि आखिर क्या हुआ हैं। फोन कर खबर लेने लगे कि कहीं पाकिस्तान ने गोलाबारी शुरू तो नहीं कर दी है। जब मामला समझ में आया तो ग्रामीणों की तसल्ली मिली।
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दोपहर बाद इसे निष्क्रिय कर दिया गया। बुधवार को सीमा की ओर से जोरदार धमाके की आवाज सुनकर सीमावर्ती गांव के लोगों के होश उड़ गए।
ग्रामीण एक-दूसरे से जानने की कोशिश करने लगे कि आखिर क्या हुआ हैं। फोन कर खबर लेने लगे कि कहीं पाकिस्तान ने गोलाबारी शुरू तो नहीं कर दी है। जब मामला समझ में आया तो ग्रामीणों की तसल्ली मिली।
मोर्टार के पाकिस्तान के होने की आशंका
Border Security
- फोटो : File Photo
जानकारी के अनुसार मोर्टार का यह शेल पाकिस्तान की ओर से कभी दागा गया होगा, लेकिन यह फटा नहीं और जमीन में धंस गया। बुधवार को जब सुरक्षा बल का एक जवान पोस्ट के पास उगी घास को साफ कर रहा था तो उसने इसे देखा।
इसे कब्जे में लेकर अधिकारियों को इसके बारे में खबर दी गई, जिसे बाद में निष्क्रिय कर दिया गया। हालांकि, सीमावर्ती ग्रामीणों को भयभीत होने से रोकने के लिए सुरक्षा बल के जवानों ने शेल को निष्क्रिय करने से पहले काकू दे कोठे, पिंडी चाढ़का, चंगिया आदि गांवों के लोगों को सूचित कर दिया था।
शेल के निष्क्रिय करने के दौरान इसके फटने की आवाज इतनी तेज थी कि इसे दूर तक सुना गया। अला गांव और अरनिया में भी यह आवाज सुनी गई। यहां के लोगों को शेल के निष्क्रिय करने के बारे में खबर नहीं थी, जिसके चलते उनमें दहशत फैल गई।
इसे कब्जे में लेकर अधिकारियों को इसके बारे में खबर दी गई, जिसे बाद में निष्क्रिय कर दिया गया। हालांकि, सीमावर्ती ग्रामीणों को भयभीत होने से रोकने के लिए सुरक्षा बल के जवानों ने शेल को निष्क्रिय करने से पहले काकू दे कोठे, पिंडी चाढ़का, चंगिया आदि गांवों के लोगों को सूचित कर दिया था।
शेल के निष्क्रिय करने के दौरान इसके फटने की आवाज इतनी तेज थी कि इसे दूर तक सुना गया। अला गांव और अरनिया में भी यह आवाज सुनी गई। यहां के लोगों को शेल के निष्क्रिय करने के बारे में खबर नहीं थी, जिसके चलते उनमें दहशत फैल गई।