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हिंसा के चलते कश्मीर में रूका 330 मेगावाट का किशनगंगा पॉवर प्रोजेक्ट

Fri, 14 Oct 2016 04:17 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 14 Oct 2016 04:17 PM IST
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330 megawatt power project delaying due to violence in kashmir
किशनगंगा परियोजना - फोटो : Demo Pic.
घाटी में हिंसा ने किशनगंगा बिजली परियोजना निर्माण की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिए हैं। आलम यह है कि अगले महीने तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो गया है। नवंबर से मार्च महीने तक बर्फबारी से काम ठप पड़ जाता है, ऐसे में प्रोजेक्ट पर और एक साल की देरी का संकट बढ़ गया है।
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लगातार हो रही देरी से निर्माण के लागत मूल्य में बढ़ोतरी और समय पर बिजली उत्पादन शुरू  न होने से घाटे की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। निर्माण एजेंसी एनएचपीसी के सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट पहले से ही अत्यधिक विलंब झेल रहा है। पहले पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि उल्लंघन का दावा कर दो साल तक काम में बाधा डाली थी। 
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अंतरराष्ट्रीय अदालत ने फैसला भारत के हक में दिया। अब जब काम तेजी से पूरा होने की ओर पहुंच चुका था तो कश्मीर हिंसा ने प्रोजेक्ट का काम प्रभावित कर दिया है। गुरेज इलाके में तो निर्माण एजेंसी को स्थानीय लोगों का सहयोग मिला, लेकिन बांदीपोरा में पावर हाउस निर्माण में लगातार खलल पड़ता रहा। इसकी वजह से काम पर व्यापक असर पड़ा है।
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नवंबर 2016 में कमीशन करने का था लक्ष्य

330 megawatt power project delaying due to violence in kashmir
किशनगंगा परियोजना - फोटो : Demo Pic.

प्रोजेक्ट को नवंबर 2016 में कमीशन करने का लक्ष्य रखा गया था जो अब हासिल होना बेहद मुश्किल है। नाम न छापने की शर्त पर एनएचपीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कश्मीर जुलाई महीने से शुरू हुई कश्मीर हिंसा के दौरान बांदीपोरा में काम नहीं हो पाया है। इसकी वजह से प्रोजेक्ट का काम प्रभावित हुआ है। 

घाटी में लगातार हो रही हिंसा के कारण जहां एक ओर जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है वहीं व्यापार और विकास की कई परियोजनाओं को भी खासा नुकसान हो रहा है । बिजली निर्माण के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर को आत्मनिर्भर बना सकने वाले इस प्रोजेक्ट के पूरा हो जाने से घाटी समेत पूरे जम्मू-कश्मीर में बिजली की समस्या को बहुत हद तक दूर किया जा सकता था लेकिन हिंसा के चलते इस परियोजना के पूरा होने में हो रही देरी के कारण रियासत के लोगों को अभी इसके लिए और इंतजार करना पड़ सकता है । 

330 मेगावाट बिजली तैयार करने की योजना

330 megawatt power project delaying due to violence in kashmir
330 मेगावाट बिजली तैयार करने की योजना - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2007 में सरकार ने किशनगंगा नदी के पानी पर बांध बनाकर बिजली उत्पादन करने की योजना बनाई। 330 मेगावाट बिजली तैयार करने के लिए जब काम शुरू किया गया तो पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि का हवाला देकर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आरबिट्रेशन का दरवाजा खटखटाया।

वर्ष 2013 में फैसला भारत के हक में आया, जिसके बाद काम शुरू कर दिया गया। पाक की आपत्ति से दो साल काम नहीं हो पाया। नवंबर 2016 को प्रोजेक्ट चलाकर बिजली उत्पादन शुरू किया जाना था जो अब मुश्किल हो गया है।

गुरेज में किशनगंगा प्रोजेक्ट का पानी झेलम की सहायक नदी किशनगंगा से पावर हाउस तक पहुंचाने के लिए 24 किलोमीटर लंबी टनल तैयार की गई है, जबकि बिजली बनाने वाली प्रेशर शाफ्ट की गहराई एक किलोमीटर है।
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