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सुरक्षा भरोसा मिलने पर पेट्रोल-डीजल लेकर श्रीनगर गए 100 टैंकर
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 24 Aug 2016 07:59 PM IST
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टैकंर
- फोटो : Amar Ujala
डेढ़ माह से कश्मीर हिंसा का शिकार हो रहे टैंकर चालकों ने बुधवार को श्रीनगर के लिए तेल, डीजल और केरोसिन के टैंकर रवाना कर दिए। ऐसा डिवीजनल कमिश्नर डा. पवन कोतवाल से बनिहाल से सुरक्षा मुहैया करवाए जाने संबंधित लिखित में पत्र मिलने के बाद संभव हो सका है।
इसके साथ ही जम्मू के आयल डिपुओं से टैंकरों को तेल से भरकर रवाना कर किया गया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर स्थिति ठीक रहती है, सुरक्षा कर्मियों की ओर से टैंकरों को सुरक्षा के बीच सलामत श्रीनगर पहुंचाया और वापस छोड़ा जाता है तो वे टैंकरों की संख्या और बढ़ा भी सकते हैं। फिलहाल स्थिति पर नजर रखे हैं।
आल जेएंडके आयल टैंकर ड्राइवर एंड क्लीनर एसोसिएशन के प्रधान खैरुद्दीन और महासचिव सुरिंद्र सिंह के मुताबिक पिछले डेढ़ माह से टैंकरों का नुकसान झेल रहे हैं। कई चालकों के जख्मी होने का भी खामियाजा भुगता है, लेकिन जब प्रदर्शनकारियों ने टैंकर चालकों को निशाना बनाने की सभी हदें पार कर दीं तो उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
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नतीजतन एक दिन हड़ताल के बाद सरकार की नींद खुली और सुरक्षा की मांग पर सरकार ने 24 घंटे का समय मांगा। इसके बाद डिवकॉम ने टैंकरों के नुकसान और चालकों के जख्मी होने का मुआवजा देने का आश्वासन दिया और खासतौर पर सुरक्षा मुहैया करवाने की जिम्मेदारी उठाई।
इस बाबत एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने डिवकॉम से लिखित में मांगा था, जो कि उन्होंने बुधवार को दे दिया। इसके बाद एसोसिएशन ने 100 टैंकर श्रीनगर के लिए रवाना कर दिए।
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इसके साथ ही जम्मू के आयल डिपुओं से टैंकरों को तेल से भरकर रवाना कर किया गया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर स्थिति ठीक रहती है, सुरक्षा कर्मियों की ओर से टैंकरों को सुरक्षा के बीच सलामत श्रीनगर पहुंचाया और वापस छोड़ा जाता है तो वे टैंकरों की संख्या और बढ़ा भी सकते हैं। फिलहाल स्थिति पर नजर रखे हैं।
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आल जेएंडके आयल टैंकर ड्राइवर एंड क्लीनर एसोसिएशन के प्रधान खैरुद्दीन और महासचिव सुरिंद्र सिंह के मुताबिक पिछले डेढ़ माह से टैंकरों का नुकसान झेल रहे हैं। कई चालकों के जख्मी होने का भी खामियाजा भुगता है, लेकिन जब प्रदर्शनकारियों ने टैंकर चालकों को निशाना बनाने की सभी हदें पार कर दीं तो उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
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नतीजतन एक दिन हड़ताल के बाद सरकार की नींद खुली और सुरक्षा की मांग पर सरकार ने 24 घंटे का समय मांगा। इसके बाद डिवकॉम ने टैंकरों के नुकसान और चालकों के जख्मी होने का मुआवजा देने का आश्वासन दिया और खासतौर पर सुरक्षा मुहैया करवाने की जिम्मेदारी उठाई।
इस बाबत एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने डिवकॉम से लिखित में मांगा था, जो कि उन्होंने बुधवार को दे दिया। इसके बाद एसोसिएशन ने 100 टैंकर श्रीनगर के लिए रवाना कर दिए।