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बड़े दलों के लिए चुनौती बन सकते हैं निर्दलीय प्रत्याशी
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Wed, 03 Dec 2014 02:10 AM IST
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विधानसभा चुनाव में भले ही बड़े सियासी दलों की तूती बोलती हो लेकिन कठुआ जिले की सियासत पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी गाहे बगाहे खासा दम दिखाया है।
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पिछले विधानसभा चुनाव में जहां कठुआ सीट निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में रही तो हीरानगर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी ने सर्वाधिक वोट हासिल करने वाले प्रत्याशियों में दूसरा स्थान हासिल किया।
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इस लिहाज से निर्दलीय प्रत्याशियों की दावेदारी बड़े सियासी दलों के लिए चुनौती से कम नहीं आंकी जा सकती है। इस दफा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर सबसे ज्यादा चर्चा बनी विधायक मास्टर लाल चंद ने बटोरी है।
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बीते चुनाव में भाजपा के टिकट से चुनाव लड़कर विधायक बने मास्टर लाल चंद ने पार्टी से बगावत कर चुनावी मैदान में ताल ठोक दी। इसका सीधा असर भाजपा के वोट बैंक पर पड़ सकता है।
इसी तरह से हीरानगर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक प्रेम लाल आज नामांकन पत्र दाखिल करने जा रहे हैं। वर्ष 2002 में भाजपा की टिकट से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे प्रेमलाल को 2008 के चुनाव में पार्टी टिकट नहीं मिला।
लिहाजा वह निर्दलीय ही मैदान में उतर गए। पूर्व विधायक प्रेमलाल निर्दलीय होने के बावजूद 16 हजार से अधिक वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे। हालांकि वह भाजपा की जीत को रोक नहीं पाए।
इधर कठुआ जिला मुख्यालय की वीआईपी सीट पर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले पूर्व ब्यूरोक्रेट चरणजीत सिंह ने जीत दर्ज की। दीगर है कि निर्दलीय प्रत्याशी ने जहां सीट पर कब्जा किया था तो तीसरे स्थान पर रहने वाला प्रत्याशी भी निर्दलीय ही था जबकि इससे पूर्व वर्ष 2002 के चुनाव में भी कठुआ सीट को निर्दलीय प्रत्याशी ने ही कब्जाया था।
उधर बसोहली विधानसभा क्षेत्र में पिछला चुनाव त्रिकोणीय रहा था जिसमें भाजपा, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर रही।
इस दफा भी मुकाबला मुख्य तौर पर तीनों के बीच ही माना जा रहा है लेकिन ट्रांस्पोर्टर दर्शन सिंह और माड़ा पट्टी सरपंच राजिंदर सिंह की निर्दलीय उम्मीदवारी सियासी क्षत्रपों के समीकरण प्रभावित कर सकती है।