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उम्रकैद की सजा तीन साल में बदली
Jammu
Updated Sun, 06 Oct 2013 05:39 AM IST
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जम्मू। हाईकोर्ट के न्यायाधीश हसनैन मसूदी और बंसी लाल भट ने आतंकी समर्थक मोहम्मद रफीक की याचिका पर गौर करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बदलने का फैसला सुनाया। मोहम्मद रफीक को निचली अदालत ने उम्रकैद और 25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी। खंडपीठ ने सजा को बदलते हुए उसे तीन साल कैद और दस हजार रुपये जुर्माना की सजा कर दी।
मामले के अनुसार सेना की 39 राष्ट्रीय राइफल के ग्रेनेडियर्ज की एफ कंपनी के कमांडर मेजर नरेंद्र सिंह ने 8 दिसंबर 2006 को सूत्रों से मिली सूचना के आधार पर मेंढर जगाल क्षेत्र में आतंकी तलाशी अभियान चलाया। इस अभियान में सीआरपीएफ और एसओजी मेंढर भी शामिल थे। तलाशी अभियान के दौरान पाया कि एक आतंकी कनेटी क्षेत्र में एक घर में छिपा है। मकान मालिक ने उस आतंकी की मदद की है और घर की अलमारी में उसे छिपाकर रखा है। सुरक्षा बल टीम घर के अंदर घुुसी। मकान मालिक मौजूद नहीं था और उसकी दो बेटियां घर में थीं। दोनों बेटियों में से एक बेटी किरण फिरदौज को उसकी मां अजमत बी से अलमारी की चाबी लेने के लिए भेजा। अजमत बी स्थानीय स्कूल में कर्मचारी है। काफी समय तक किरण नहीं लौटी। इसके बाद दूसरी बेटी अंजुम फिरदौज को भी चाबी लेने के लिए भेजा। वह भी वापस नहीं आई। मेजर बाद में खुद सलवाह में अजमत बी के दूसरे घर गया। उसने सुरक्षा बल की टीम से सहयोग करने और कनेटी के घर में तलाशी अभियान के दौरान मौजूद रहने का आग्रह किया। अजमत बी नहीं मानी। सेना ने क्षेत्र के सरपंच उमर दीन और मोहम्मद शरीफ को साथ लिया। जैसे ही बंद अलमारी को खोला गया। अंदर से आतंकी ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस फायरिंग में दो सेना के जवान विरेंद्र सिंह, जंग शेर अली और नागरिक मोहम्मद शरीफ घायल हो गए। आतंकी की पहचान लश्कर ए तोयबा के जिला कमांडर अबु सुहैल उर्फ एम 2 के तौर पर हुई। तलाशी के दौरान एक नोकिया मोबाइल फोन भी बरामद किया। खंडपीठ ने पूरे तथ्यों पर गौर करने के बाद पाया कि केस में कमियां हैं। हत्या के प्रयास का मामला भी दर्ज किया गया है। कुछ पहलुओं पर गौर करने के बाद सजा की अवधि तीन साल करने का फैसला सुनाया। जेएनएफ
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मामले के अनुसार सेना की 39 राष्ट्रीय राइफल के ग्रेनेडियर्ज की एफ कंपनी के कमांडर मेजर नरेंद्र सिंह ने 8 दिसंबर 2006 को सूत्रों से मिली सूचना के आधार पर मेंढर जगाल क्षेत्र में आतंकी तलाशी अभियान चलाया। इस अभियान में सीआरपीएफ और एसओजी मेंढर भी शामिल थे। तलाशी अभियान के दौरान पाया कि एक आतंकी कनेटी क्षेत्र में एक घर में छिपा है। मकान मालिक ने उस आतंकी की मदद की है और घर की अलमारी में उसे छिपाकर रखा है। सुरक्षा बल टीम घर के अंदर घुुसी। मकान मालिक मौजूद नहीं था और उसकी दो बेटियां घर में थीं। दोनों बेटियों में से एक बेटी किरण फिरदौज को उसकी मां अजमत बी से अलमारी की चाबी लेने के लिए भेजा। अजमत बी स्थानीय स्कूल में कर्मचारी है। काफी समय तक किरण नहीं लौटी। इसके बाद दूसरी बेटी अंजुम फिरदौज को भी चाबी लेने के लिए भेजा। वह भी वापस नहीं आई। मेजर बाद में खुद सलवाह में अजमत बी के दूसरे घर गया। उसने सुरक्षा बल की टीम से सहयोग करने और कनेटी के घर में तलाशी अभियान के दौरान मौजूद रहने का आग्रह किया। अजमत बी नहीं मानी। सेना ने क्षेत्र के सरपंच उमर दीन और मोहम्मद शरीफ को साथ लिया। जैसे ही बंद अलमारी को खोला गया। अंदर से आतंकी ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस फायरिंग में दो सेना के जवान विरेंद्र सिंह, जंग शेर अली और नागरिक मोहम्मद शरीफ घायल हो गए। आतंकी की पहचान लश्कर ए तोयबा के जिला कमांडर अबु सुहैल उर्फ एम 2 के तौर पर हुई। तलाशी के दौरान एक नोकिया मोबाइल फोन भी बरामद किया। खंडपीठ ने पूरे तथ्यों पर गौर करने के बाद पाया कि केस में कमियां हैं। हत्या के प्रयास का मामला भी दर्ज किया गया है। कुछ पहलुओं पर गौर करने के बाद सजा की अवधि तीन साल करने का फैसला सुनाया। जेएनएफ
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