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आजाद कैंप पर भारी पड़ा सोज खेमा

Wed, 16 Jan 2013 05:31 AM IST
Jammu
Jammu Updated Wed, 16 Jan 2013 05:31 AM IST
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जम्मू। नेकां-कांग्रेस की साझा सरकार में मिशन 2014 के मद्देनजर मंत्रिमंडल में बड़े पैमाने पर हुए फेरबदल में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज ने अपनी सियासी ताकत का एहसास करा दिया। समर्थक कांग्रेसी विधायकों को मंत्रिमंडल में स्थान दिलाने के साथ बेहतर विभाग हासिल करने के मामले में आजाद कैंप पर प्रो. सैफुद्दीन सोज खेमा भारी पड़ा। इसके अलावा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नेकां मंत्रियों की अदला बदली कर दिग्गज नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर साबित कर दिया कि वह सियासी तौर पर पार्टी में पापा डॉ. फारूक अब्दुल्ला के नियंत्रण से बाहर निकल चुके हैं। उमर की नजर अब 2014 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव पर हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी मोहन प्रकाश को साथ नई दिल्ली से मंगलवार को शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद को भी पहुंचना था, लेकिन आजाद के सुझाव नजरअंदाज होने से उन्होंने इस समारोह में दूरी बनाए रखने का फैसला किया। लिहाजा मोहन प्रकाश ने ही प्रो. सोज के साथ शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की। हालांकि आजाद अपने समर्थक डिप्टी सीएम तारा चंद को उनके मौजूदा पद पर काबिज रखने में कामयाब रहे, लेकिन अपने समर्थक राज्य मंत्रियों को अपग्रेड नहीं करवा सके।
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डुरू से कांग्रेस विधायक गुलाम अहमद मीर को सेक्स स्कैंडल से क्लीन चिट मिलने के बाद प्रो. सैफुद्दीन सोज उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाने में कामयाब रहे, लेकिन केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद अपने प्रबल समर्थक इंद्रबल से कांग्रेस विधायक जीएम सरुड़ी को एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा घोटाले में क्लीन चिट मिलने के बावजूद उनको मंत्री नहीं बनवा सके। हालांकि इसका फायदा दूसरी दफा डोडा से कांग्रेस की टिकट पर विधायक चुने गए अब्दुल माजिद वानी को मिला। प्रो. सोज और आजाद खेमे में बराबर पैठ रखने वाले वानी को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने के साथ ही सड़क एवं भवन निर्माण जैसा अहम महकमा मिला। इसके अलावा आजाद से जुड़े और प्रो. सोज खेमे में बराबर संपर्क कायम रखने वाले स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्रियों एजाज अहमद खान और शब्बीर खान को भी अहम राजस्व और हेल्थ विभाग मिले। इसके अलावा प्रो. सोज समर्थक कैबिनेट मंत्री शाम शर्मा और रमण भल्ला को भी मन माफिक विभाग हासिल हो गए है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी पार्टी के चार कैबिनेट और दो राज्य मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर साबित कर दिया कि वह अब पापा के सियासी नियंत्रण से बाहर निकल कर खुद फैसले लेने लगे हैं। हालांकि उमर ने अपने नजदीकी नासिर असलम वानी और जावेद अहमद डार को मंत्रिमंडल से बाहर पर पार्टी में बैलेंस कायम करने की कोशिश की है। अमरनाथ भूमि जनांदोलन के बाद पुराने जम्मू जिले में नेकां की लाज बचाने वाले सुरजीत सिंह सलाथिया के समर्थकों में उनको कैबिनेट से बाहर करने पर खासा रोष है। उमर ने देवेंद्र राणा को जम्मू और नासिर असलम वानी को कश्मीर संभाग की कमान सौंप कर साबित कर दिया कि वह अब पार्टी को अपने हिसाब से चलाएंगे। खासतौर पर उमर ने मंत्रिमंडल विस्तार में युवा ब्रिगेड को आगे बढ़ाने की कोशिश की है।
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