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बारिश के बाद भी महाराष्ट्र बेहाल क्यों?: 358 में से 265 तालुका सूखाग्रस्त घोषित, फसल बर्बादी से किसान परेशान
Sat, 26 Sep 2026 01:20 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Sat, 26 Sep 2026 01:20 PM IST
सार
महाराष्ट्र में कम बारिश के चलते 358 में से 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। राज्य के 74% इलाके में सूखे का असर है। बारिश में 18.8% कमी से खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं। किसानों ने मुआवजे की मांग की है, जबकि सरकार जल्द फसल नुकसान का सर्वे कराएगी।
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महाराष्ट्र के 265 तालुके सूखाग्रस्त
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को राज्य के 358 तालुकों में से 265 को सूखाग्रस्त घोषित किया। यह जानकारी एक सरकारी नोटिफिकेशन के अनुसार है। सरकारी आदेश के मुताबिक, इस फैसले के दायरे में राज्य का 74 प्रतिशत इलाका आता है।
यह फैसला क्यों लिया गया?
यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राज्य के कुछ सूखाग्रस्त इलाकों के हालिया दौरे के बाद लिया गया है। धाराशिव और बीड जैसे जिलोंं में जुलाई के बाद से बारिश नहीं हुई है, जिससे फसलें, मवेशी और किसानों व मजदूरों की रोजमर्रा की पानी की जरूरतें प्रभावित हुई हैं।
संभाजीनगर डिवीजन में कितनी बरिश दर्ज की गई?
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में 1 जून से 18 सितंबर के बीच 424.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 613.1 मिमी होनी चाहिए थी। यानी बारिश में 30.8 प्रतिशत की कमी रही। मराठवाड़ा के धाराशिव और पांच अन्य जिले छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन के अंतर्गत आते हैं।
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पुणे और नासिक डिवीजन में भी बारिश में लगभग 30 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि अमरावती और नागपुर डिवीजन में 27 प्रतिशत की कमी रही। कोंकण डिवीजन में बारिश में 6.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। कुल मिलाकर, अल नीनो की स्थिति के बीच राज्य में बारिश में 18.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। जून से 18 सितंबर के दौरान यहां 755.9 मिमी बारिश हुई, जबकि औसत बारिश 932.3 मिमी होती है। कम से कम छह जिलों में बारिश में 40-50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। जिनमें अमरावती, सोलापुर और लातूर शामिल हैं।
किसानों के फसल हो रहे बर्बाद
खरीफ सीजन के दौरान, राज्य के किसान सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग और उड़द जैसी फसलें उगाते हैं। कई जिलों के किसानों ने बारिश की कमी के कारण फसल बर्बाद होने की शिकायत की है। साथ ही कीटों व बीमारियों का प्रकोप भी काफ़ी बढ़ गया है।
16 सितंबर को कई जिलों के किसानों ने सूखा राहत उपायों और फसल के नुकसान के लिए मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। फडणवीस ने घोषणा की है कि फसल-नुकसान का सर्वे (पंचनामा) और जमीनी सत्यापन जल्द ही किया जाएगा।
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यह फैसला क्यों लिया गया?
यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राज्य के कुछ सूखाग्रस्त इलाकों के हालिया दौरे के बाद लिया गया है। धाराशिव और बीड जैसे जिलोंं में जुलाई के बाद से बारिश नहीं हुई है, जिससे फसलें, मवेशी और किसानों व मजदूरों की रोजमर्रा की पानी की जरूरतें प्रभावित हुई हैं।
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संभाजीनगर डिवीजन में कितनी बरिश दर्ज की गई?
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में 1 जून से 18 सितंबर के बीच 424.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 613.1 मिमी होनी चाहिए थी। यानी बारिश में 30.8 प्रतिशत की कमी रही। मराठवाड़ा के धाराशिव और पांच अन्य जिले छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन के अंतर्गत आते हैं।
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पुणे और नासिक डिवीजन में भी बारिश में लगभग 30 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि अमरावती और नागपुर डिवीजन में 27 प्रतिशत की कमी रही। कोंकण डिवीजन में बारिश में 6.3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। कुल मिलाकर, अल नीनो की स्थिति के बीच राज्य में बारिश में 18.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। जून से 18 सितंबर के दौरान यहां 755.9 मिमी बारिश हुई, जबकि औसत बारिश 932.3 मिमी होती है। कम से कम छह जिलों में बारिश में 40-50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। जिनमें अमरावती, सोलापुर और लातूर शामिल हैं।
किसानों के फसल हो रहे बर्बाद
खरीफ सीजन के दौरान, राज्य के किसान सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग और उड़द जैसी फसलें उगाते हैं। कई जिलों के किसानों ने बारिश की कमी के कारण फसल बर्बाद होने की शिकायत की है। साथ ही कीटों व बीमारियों का प्रकोप भी काफ़ी बढ़ गया है।
16 सितंबर को कई जिलों के किसानों ने सूखा राहत उपायों और फसल के नुकसान के लिए मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। फडणवीस ने घोषणा की है कि फसल-नुकसान का सर्वे (पंचनामा) और जमीनी सत्यापन जल्द ही किया जाएगा।