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पितृपक्ष 2026: कितने प्रकार के होते हैं श्राद्ध कर्म? जानिए 12 प्रमुख प्रकार और उनका महत्व

Sat, 26 Sep 2026 11:09 AM IST
Shaily Prakash शैली प्रकाश
Updated Sat, 26 Sep 2026 11:09 AM IST
सार

पितृ पक्ष में पितरों की शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों में श्राद्ध के अलग-अलग प्रकार और उनके उद्देश्य बताए गए हैं। नित्य श्राद्ध से लेकर पार्वण, सपिण्डन और प्रेत श्राद्ध तक, हर विधि का अपना विशेष महत्व है। आइए यहां जानें श्राद्ध के 12 प्रमुख प्रकार।
 

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12 Major Types of Shraddha ke 12 prakar pitru paksha pret shradh mahatva
श्राद्ध कर्म के 12 प्रकार - फोटो : AI

शास्त्रों में पितृ कर्म को अत्यंत पवित्र माना गया है। विष्णु पुराण और गरुड़ पुराण के साथ-साथ भविष्य पुराण में महर्षि विश्वामित्र के हवाले से श्राद्ध के विभिन्न रूपों का वर्णन मिलता है। शास्त्रों के अनुसार पितरों के निमित्त दो प्रमुख यज्ञ किए जाते हैं—'पिंड पितृयज्ञ' और 'श्राद्ध'। वेदों में वर्णित पांच मुख्य महायज्ञों (ब्रह्म, देव, पितृ, वैश्वदेव और अतिथि यज्ञ) में से 'पितृयज्ञ' को ही पुराणों में विस्तृत रूप देकर श्राद्ध कर्म की संज्ञा दी गई है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। उत्तर व उत्तर-पूर्व भारत में श्राद्ध पक्ष का विशेष माहात्म्य है, जबकि तमिलनाडु में इसे 'आदि अमावसाई', केरल में 'करिकडा वावुबली' और महाराष्ट्र में 'पितृ पंधरवडा' कहा जाता है। चलिए जानते हैं श्राद्ध कर्म के 12 प्रकार।



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12 Major Types of Shraddha ke 12 prakar pitru paksha pret shradh mahatva
श्राद्ध के 12 प्रमुख प्रकार - फोटो : AI

श्राद्ध के 12 प्रमुख प्रकार
1. नित्य श्राद्ध: प्रतिदिन बिना किसी विशेष काम्य भावना के जल, तिल व अन्न से किया जाने वाला सामान्य श्राद्ध।
2. नैमित्तिक श्राद्ध: किसी एक विशिष्ट पितर की वार्षिक मृत्यु तिथि पर संपन्न किया जाने वाला श्राद्ध।
3. काम्य श्राद्ध: किसी विशेष मनोकामना या सिद्धि की प्राप्ति हेतु किया जाने वाला श्राद्ध।
4. नान्दी श्राद्ध: घर में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य या शुभ अवसर के समय किया जाने वाला श्राद्ध।
 

12 Major Types of Shraddha ke 12 prakar pitru paksha pret shradh mahatva
श्राद्ध के 12 प्रमुख प्रकार - फोटो : adobe stock

5. पार्वण श्राद्ध: पितृपक्ष की तिथियों, पर्वों या अमावस्या तिथि पर किया जाने वाला मुख्य श्राद्ध।
6. सपिण्डन श्राद्ध: व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात प्रेत-पिंड को पितृ-पिंड में सम्मिलित करने हेतु किया जाने वाला श्राद्ध (यह आत्मा का पितरों से मिलन कराता है)।
7. गोष्ठी श्राद्ध: परिवार, कुल या स्वजातीय समूह के लोगों द्वारा सामूहिक रूप से किया जाने वाला श्राद्ध।
8. शुद्धयर्थ श्राद्ध: आत्म-शुद्धि एवं पापों के क्षालन के उद्देश्य से किया जाने वाला श्राद्ध।

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श्राद्ध के 12 प्रमुख प्रकार - फोटो : adobe stock

9. कर्मांग श्राद्ध: जीवन के 16 संस्कारों (जैसे गर्भाधान, नामकरण, उपनयन आदि) के अवसर पर किया जाने वाला श्राद्ध।
10. दैविक श्राद्ध: देवताओं की कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से समर्पित श्राद्ध।
11. यात्रार्थ श्राद्ध: तीर्थ यात्रा पर जाने से पूर्व या तीर्थ स्थानों (जैसे गया, प्रयागराज) में जाकर किया जाने वाला श्राद्ध।
12. पुष्ट्यर्थ श्राद्ध (वृद्धि श्राद्ध): स्वयं व परिवार की आर्थिक उन्नति, सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति अथवा विवाह आदि वृद्धि कारक अवसरों हेतु किया जाने वाला श्राद्ध।
 

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प्रेत श्राद्ध क्या होता है? - फोटो : AI

प्रेत श्राद्ध क्या होता है?
किसी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसकी देह त्यागने से लेकर सपिंडीकरण (सपिण्डन श्राद्ध) होने तक की अवधि में जो श्राद्ध कर्म किए जाते हैं, उन्हें प्रेत श्राद्ध कहा जाता है। मृत्यु के तुरंत बाद जीवात्मा प्रेत योनि के सूक्ष्म प्रभाव में रहती है। उसे उस कष्टदायक स्थिति से मुक्त करने, मार्ग में संबल प्रदान करने और उसे पितृलोक में स्थान दिलाने के उद्देश्य से 10 गात्र श्राद्ध, एकादशाह (11वें दिन का श्राद्ध) और द्वादशाह (12वें दिन का श्राद्ध) जैसे प्रेत श्राद्ध संपन्न किए जाते हैं। इसके पूर्ण होने पर ही आत्मा प्रेत भाव से मुक्त होकर पितरों की श्रेणी में सम्मिलित होती है।

शैली प्रकाश

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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