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Udhampur News: नदी किनारे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट व घाटों का होगा सौंदर्यीकरण
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बाणगंगा में सीईओ श्राइन बोर्ड व अन्य अधिकारी जायजा लेते हुए
-बाणगंगा कायाकल्प को लेकर एसएमवीडीएसबी-यूईईडी ने की संयुक्त पहल
- बाणगंगा आरती और मल्टीमीडिया लेजर शो जैसी परियोजना बनाई जा रही
संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) और शहरी पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग (यूईईडी) ने बाणगंगा नदी के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए हैं। 92.10 करोड़ रुपये की इस परियोजना में नदी किनारे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण से लेकर घाटों के सौंदर्यीकरण तक की व्यापक योजना शामिल है।
एसएमवीडीएसबी के सीईओ अंशुल गर्ग के नेतृत्व में हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में स्थानीय निवासियों ने अपने सुझाव रखे। मुख्य चिंताओं में नदी किनारे बने टट्टू शेड्स को हटाना और तटबंधों का हरियालीकरण शामिल था। परियोजना के तहत प्रदूषित जल को मोड़ने के लिए इंटरसेप्टर चैंबर युक्त जल निकासी प्रणाली बनाई जाएगी। साथ ही बाणगंगा आरती और लेजर शो जैसी नई पहल से तीर्थ यात्रियों के अनुभव को समृद्ध बनाने की योजना है।
इस पहल में प्राकृतिक वातावरण और दृश्य आकर्षण को बढ़ाने के लिए समन्वित विकास और समीपवर्ती तटबंधों के साथ-साथ स्नान घाटों की सफाई और जीर्णोद्धार शामिल है। चरणबद्ध तरीके से कचरे को हटाने के लिए मिशन-मोड प्रयास किए गए हैं और नाले के समग्र स्वास्थ्य के लिए प्रदूषित पानी को मोड़ने के लिए इंटरसेप्टर चैंबर के साथ एक जल निकासी प्रणाली का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और सौंदर्य अनुभव को समृद्ध करने के लिए बाणगंगा आरती और मल्टीमीडिया लेजर शो जैसी परियोजनाओं की अवधारणा बनाई जा रही है।
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- बाणगंगा आरती और मल्टीमीडिया लेजर शो जैसी परियोजना बनाई जा रही
संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) और शहरी पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग (यूईईडी) ने बाणगंगा नदी के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए हैं। 92.10 करोड़ रुपये की इस परियोजना में नदी किनारे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण से लेकर घाटों के सौंदर्यीकरण तक की व्यापक योजना शामिल है।
एसएमवीडीएसबी के सीईओ अंशुल गर्ग के नेतृत्व में हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में स्थानीय निवासियों ने अपने सुझाव रखे। मुख्य चिंताओं में नदी किनारे बने टट्टू शेड्स को हटाना और तटबंधों का हरियालीकरण शामिल था। परियोजना के तहत प्रदूषित जल को मोड़ने के लिए इंटरसेप्टर चैंबर युक्त जल निकासी प्रणाली बनाई जाएगी। साथ ही बाणगंगा आरती और लेजर शो जैसी नई पहल से तीर्थ यात्रियों के अनुभव को समृद्ध बनाने की योजना है।
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इस पहल में प्राकृतिक वातावरण और दृश्य आकर्षण को बढ़ाने के लिए समन्वित विकास और समीपवर्ती तटबंधों के साथ-साथ स्नान घाटों की सफाई और जीर्णोद्धार शामिल है। चरणबद्ध तरीके से कचरे को हटाने के लिए मिशन-मोड प्रयास किए गए हैं और नाले के समग्र स्वास्थ्य के लिए प्रदूषित पानी को मोड़ने के लिए इंटरसेप्टर चैंबर के साथ एक जल निकासी प्रणाली का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और सौंदर्य अनुभव को समृद्ध करने के लिए बाणगंगा आरती और मल्टीमीडिया लेजर शो जैसी परियोजनाओं की अवधारणा बनाई जा रही है।
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