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Udhampur News: पावन पिंडी का बढ़ता है आकार, नौ दिन तक कृपा बरसाती हैं मां काली
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उधमपुर। मंदिर में पिंडी के रूप में विराजमान काली माता।
- टी मोड़ स्थित प्राचीन काली माता मंदिर नवरात्र के लिए तैयार
- आज से उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
उधमपुर। शहर के साथ लगते टी- मोड़ स्थित प्राचीन काली माता मंदिर परिसर को नवरात्र के चलते रंग-बिरंगे फूलों और लाइटों से सजाया गया है। खासतौर पर मंदिर में बनाए गए द्वार की कई प्रकार के फूलों से सजावट की गई है।
गौरतलब है कि पहले नवरात्र से ही मां की पिंडी का आकार बढ़ना शुरू हो जाता है जो पूरे नौ तक बढ़ता ही रहता है। नवरात्र के संपन्न होते ही माता की पिंडी वापस अपने सामान्य स्वरूप में लौट आती है। इसके दर्शन के लिए जिले के अलावा बाहरी राज्यों से भी काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। नवरात्र में नौ दिन तक मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है। मंगलवार को मां का जागरण किया जाता है।
सौ साल पुराना है प्राचीन मां काली का मंदिर
नवरात्र के दौरान मंदिर में शहर व आसपास के क्षेत्रों के अलावा बाहरी राज्यों से भी काफी संख्या में श्रद्धालु मां की पिंडी के दर्शनों के लिए आते हैं। शहर से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राचीन काली माता मंदिर सौ साल पुराना है। स्वामी नित्यानंद महाराज को माता रानी ने पिंडी के रूप में दर्शन दिए थे। जिसके बाद उन्होंने मंदिर की स्थापना की।
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श्रद्धालु मंदिर में आकर मांगते हैं मनोकामना
इस संदर्भ में मंदिर के पुजारी काका ने बताया कि तीन साल पहले माता के मंदिर के पास स्थित पहाड़ी जो 500 फुट से भी अधिक ऊंची है वहां से एक छोटी बच्ची नीचे मंदिर परिसर में आकर गिरी। लेकिन मां की कृपा व शक्ति से बच्ची को कुछ नहीं हुआ। मंदिर में आए लोगों ने मां का यह चमत्कार देखा था। उन्होंने कहा कि मां अपने भक्तों को कई स्वरूप में दर्शन देती है। लोग यहां मनोकामना मांगते हैं।
पहले नवरात्र पर विशेष पूजा व हवन-यज्ञ आज
उन्होंने बताया कि पहले नवरात्र से ही मंदिर में विशेष पूजा अर्चना के साथ साथ हवन-यज्ञ व सत्संग का आयोजन किया जाएगा। वहीं एक अप्रैल मंगलवार को दिन में मां का जागरण होगा। व्रत रखने वाले लोगों के लिए नौ दिन तक मंदिर में फलों का इंतजाम किया गया है। सुबह और शाम को मां की विशेष आरती होगी।
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- आज से उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
उधमपुर। शहर के साथ लगते टी- मोड़ स्थित प्राचीन काली माता मंदिर परिसर को नवरात्र के चलते रंग-बिरंगे फूलों और लाइटों से सजाया गया है। खासतौर पर मंदिर में बनाए गए द्वार की कई प्रकार के फूलों से सजावट की गई है।
गौरतलब है कि पहले नवरात्र से ही मां की पिंडी का आकार बढ़ना शुरू हो जाता है जो पूरे नौ तक बढ़ता ही रहता है। नवरात्र के संपन्न होते ही माता की पिंडी वापस अपने सामान्य स्वरूप में लौट आती है। इसके दर्शन के लिए जिले के अलावा बाहरी राज्यों से भी काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। नवरात्र में नौ दिन तक मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है। मंगलवार को मां का जागरण किया जाता है।
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सौ साल पुराना है प्राचीन मां काली का मंदिर
नवरात्र के दौरान मंदिर में शहर व आसपास के क्षेत्रों के अलावा बाहरी राज्यों से भी काफी संख्या में श्रद्धालु मां की पिंडी के दर्शनों के लिए आते हैं। शहर से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राचीन काली माता मंदिर सौ साल पुराना है। स्वामी नित्यानंद महाराज को माता रानी ने पिंडी के रूप में दर्शन दिए थे। जिसके बाद उन्होंने मंदिर की स्थापना की।
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श्रद्धालु मंदिर में आकर मांगते हैं मनोकामना
इस संदर्भ में मंदिर के पुजारी काका ने बताया कि तीन साल पहले माता के मंदिर के पास स्थित पहाड़ी जो 500 फुट से भी अधिक ऊंची है वहां से एक छोटी बच्ची नीचे मंदिर परिसर में आकर गिरी। लेकिन मां की कृपा व शक्ति से बच्ची को कुछ नहीं हुआ। मंदिर में आए लोगों ने मां का यह चमत्कार देखा था। उन्होंने कहा कि मां अपने भक्तों को कई स्वरूप में दर्शन देती है। लोग यहां मनोकामना मांगते हैं।
पहले नवरात्र पर विशेष पूजा व हवन-यज्ञ आज
उन्होंने बताया कि पहले नवरात्र से ही मंदिर में विशेष पूजा अर्चना के साथ साथ हवन-यज्ञ व सत्संग का आयोजन किया जाएगा। वहीं एक अप्रैल मंगलवार को दिन में मां का जागरण होगा। व्रत रखने वाले लोगों के लिए नौ दिन तक मंदिर में फलों का इंतजाम किया गया है। सुबह और शाम को मां की विशेष आरती होगी।