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Udhampur News: कलयुग के शुरू में मां ने जन्म लेकर ध्यान लगाया था
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कटड़ा। धर्मनगरी से सात किलोमीटर पहले कटड़ा-जम्मू मार्ग पर देवा माई मंदिर स्थित है। देवा माई मंदिर वैष्णो देवी तीर्थ यात्रा पर जाने के दौरान पड़ने वाले पड़ावों में से एक है। वैष्णो देवी मंदिर देवा माई मंदिर से लगभग 19 किलोमीटर दूर है।
ऐसा माना जाता है कि देवी वैष्णो देवी ने कलयुग के शुरुआती चरणों के दौरान एक मानव के रूप में अपना जीवन पूरा करने के लिए इसी स्थान पर ध्यान लगाया था। जहां देवा माई मंदिर बनाया गया है। मंदिर से कई किंवदंतियां जुड़ी हुई हैं।
दोमेल-कटड़ा खंड को जोड़ने वाला एक मार्ग मंदिर तक जाता है। संपर्क मार्ग एक ऐसे स्थान पर समाप्त होता है, जहां से सीढ़ियां शुरू होकर देवा माई के मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर समाप्त होती हैं। हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जम्मू के पास नगरोटा में कोल कंडोली मंदिर श्री माता वैष्णो देवी जी तीर्थयात्रा का पहला पड़ाव है, देवा माई दूसरा, पहाड़ी रास्ते में चरण पादुका मंदिर तीसरा, अर्धकुंवारी चौथा, भवन पांचवां और भैरव घाटी में भैरव देव जी का मंदिर तीर्थयात्रा का अंतिम पड़ाव है।
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यहां के पुजारी ने बताया कि यह मंदिर पांच शताब्दी पुराना है। इसके एक तरफ 12 कमरों वाली सराय है। इसमें कम से कम 50 तीर्थयात्री ठहर सकते हैं। दूसरी तरफ एक बड़ा हॉल है जो सामुदायिक रसोईघर के उद्देश्य से कार्य करता है। (संवाद)
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ऐसा माना जाता है कि देवी वैष्णो देवी ने कलयुग के शुरुआती चरणों के दौरान एक मानव के रूप में अपना जीवन पूरा करने के लिए इसी स्थान पर ध्यान लगाया था। जहां देवा माई मंदिर बनाया गया है। मंदिर से कई किंवदंतियां जुड़ी हुई हैं।
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दोमेल-कटड़ा खंड को जोड़ने वाला एक मार्ग मंदिर तक जाता है। संपर्क मार्ग एक ऐसे स्थान पर समाप्त होता है, जहां से सीढ़ियां शुरू होकर देवा माई के मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर समाप्त होती हैं। हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जम्मू के पास नगरोटा में कोल कंडोली मंदिर श्री माता वैष्णो देवी जी तीर्थयात्रा का पहला पड़ाव है, देवा माई दूसरा, पहाड़ी रास्ते में चरण पादुका मंदिर तीसरा, अर्धकुंवारी चौथा, भवन पांचवां और भैरव घाटी में भैरव देव जी का मंदिर तीर्थयात्रा का अंतिम पड़ाव है।
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यहां के पुजारी ने बताया कि यह मंदिर पांच शताब्दी पुराना है। इसके एक तरफ 12 कमरों वाली सराय है। इसमें कम से कम 50 तीर्थयात्री ठहर सकते हैं। दूसरी तरफ एक बड़ा हॉल है जो सामुदायिक रसोईघर के उद्देश्य से कार्य करता है। (संवाद)