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Udhampur News: रामनगर में लाखों की लागत से बना यात्री शेड बदहाल
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रामनगर। कस्बे में आम लोगों और यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से नगर पालिका की तरफ से लाखों रुपये की लागत से बनाए गए यात्री शेड अब बदहाली का शिकार होते जा रहे हैं। इन शेडों के भीतर लगाई गई स्टील की कई कुर्सियां टूट चुकी हैं जबकि कई पूरी तरह गायब हो गई हैं। हालत यह है कि कई स्थानों पर कुर्सियों की जगह केवल लोहे के एंगल ही दिखाई दे रहे हैं। लंबे समय से यह स्थिति बनी होने के बावजूद नगर पालिका की ओर से मरम्मत या रखरखाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे स्थानीय लोगों और दुकानदारों में नाराजगी बढ़ रही है।
जानकारी के अनुसार नगर पालिका ने करीब डेढ़ वर्ष पहले कस्बे के बस अड्डा, गुप्ता चौक और मुख्य बाजार में तीन यात्री शेड बनाए थे। इन शेडों में लोगों के बैठने के लिए स्टील की मजबूत कुर्सियां लगाई गई थीं ताकि बाजार आने वाले लोग, बुजुर्ग महिलाएं और यात्री धूप व बारिश से बचते हुए आराम कर सकें। शुरुआत में इन शेडों का लोग भरपूर उपयोग करते थे लेकिन समय के साथ कुर्सियों के टूटने और गायब होने के कारण इनका उपयोग लगातार कम होता जा रहा है।
दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि तीनों यात्री शेडों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, टूटी हुई स्टील की कुर्सियों की मरम्मत कर नई कुर्सियां लगाई जाएं तथा गायब हुई कुर्सियों को भी दोबारा स्थापित किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो यात्रियों और आम लोगों के लिए बनाई गई यह सुविधा पूरी तरह बेकार साबित हो जाएगी।
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स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पिछले लगभग छह माह से कई कुर्सियां क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। कुछ स्थानों पर कुर्सियां पूरी तरह उखड़ चुकी हैं और केवल लोहे का ढांचा बचा है। इससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। उनका आरोप है कि नगर पालिका की ओर से कभी इन शेडों का निरीक्षण नहीं किया गया और न ही इनके रखरखाव की कोई व्यवस्था की गई। यदि समय रहते मरम्मत कराई जाती तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
दुकानदारों ने बताया कि यह मामला केवल टूटी कुर्सियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण और नियमित रखरखाव पर भी सवाल खड़े करता है। लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सुविधाएं यदि कुछ ही समय में बदहाल हो जाएं तो सरकारी धन के उपयोग की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका को समय-समय पर सार्वजनिक स्थलों का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त सुविधाओं की मरम्मत करवानी चाहिए। साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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जानकारी के अनुसार नगर पालिका ने करीब डेढ़ वर्ष पहले कस्बे के बस अड्डा, गुप्ता चौक और मुख्य बाजार में तीन यात्री शेड बनाए थे। इन शेडों में लोगों के बैठने के लिए स्टील की मजबूत कुर्सियां लगाई गई थीं ताकि बाजार आने वाले लोग, बुजुर्ग महिलाएं और यात्री धूप व बारिश से बचते हुए आराम कर सकें। शुरुआत में इन शेडों का लोग भरपूर उपयोग करते थे लेकिन समय के साथ कुर्सियों के टूटने और गायब होने के कारण इनका उपयोग लगातार कम होता जा रहा है।
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दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि तीनों यात्री शेडों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, टूटी हुई स्टील की कुर्सियों की मरम्मत कर नई कुर्सियां लगाई जाएं तथा गायब हुई कुर्सियों को भी दोबारा स्थापित किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो यात्रियों और आम लोगों के लिए बनाई गई यह सुविधा पूरी तरह बेकार साबित हो जाएगी।
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स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पिछले लगभग छह माह से कई कुर्सियां क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। कुछ स्थानों पर कुर्सियां पूरी तरह उखड़ चुकी हैं और केवल लोहे का ढांचा बचा है। इससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। उनका आरोप है कि नगर पालिका की ओर से कभी इन शेडों का निरीक्षण नहीं किया गया और न ही इनके रखरखाव की कोई व्यवस्था की गई। यदि समय रहते मरम्मत कराई जाती तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
दुकानदारों ने बताया कि यह मामला केवल टूटी कुर्सियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण और नियमित रखरखाव पर भी सवाल खड़े करता है। लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सुविधाएं यदि कुछ ही समय में बदहाल हो जाएं तो सरकारी धन के उपयोग की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका को समय-समय पर सार्वजनिक स्थलों का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त सुविधाओं की मरम्मत करवानी चाहिए। साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।