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Udhampur News: बीमा कंपनी को ही वहन करनी होगी 21 लाख रुपये मुआवजे की जिम्मेदारी

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उधमपुर। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) उधमपुर ने एक आदेश में स्पष्ट किया है कि वर्ष 2017 के सड़क हादसे के मामले में बीमा कंपनी वाहन मालिक से मुआवजे की राशि की वसूली नहीं कर सकती। अदालत ने माना कि दुर्घटना के समय ट्रक चालक के पास खतरनाक एवं ज्वलनशील पदार्थ ले जाने के लिए वैध लाइसेंस मौजूद था।
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मामला कांता देवी व अन्य बनाम बलवंत सिंह व अन्य से संबंधित है। याचिकाकर्ता कांता देवी के पति नेकराम की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। महिला ने एमएसीटी उधमपुर में मुआवजे का दावा दायर किया था। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार छह जुलाई 2017 को उधमपुर जिले के काकड़ई तहसील मजालता में सड़क दुर्घटना हुई थी। हादसे के समय नेकराम बाइक पर पीछे बैठे थे। मोटरसाइकिल विजय कुमार चला रहे थे। इसी दौरान ट्रक की टक्कर से नेकराम की मौत हो गई थी। याचिका पर सुनवाई के बाद एमएसीटी उधमपुर ने तीन नवंबर 2022 को उनके पक्ष में 21 लाख रुपये मुआवजा राशि ब्याज सहित देने का आदेश दिया था।
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सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दलील दी थी कि दुर्घटना के समय ट्रक में एलपीजी सिलेंडर लदे थे, लेकिन ट्रक चालक के पास खतरनाक सामान ले जाने का वैध लाइसेंस नहीं था। इसके बाद ट्रक मालिक एम/एस सुपर गैस एजेंसी ने अदालत में आवेदन देकर कहा कि चालक के पास भारी वाहन चलाने के साथ-साथ खतरनाक एवं ज्वलनशील सामान ले जाने की वैध अनुमति मौजूद थी, लेकिन यह दस्तावेज पहले रिकॉर्ड पर पेश नहीं हो पाया था।
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मामले की दोबारा सुनवाई के दौरान वाहन मालिक ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। इसके अलावा आरटीओ जम्मू कार्यालय के रिकॉर्ड कीपर राहुल शर्मा ने रिकॉर्ड पेश कर बताया कि चालक बलवंत सिंह के ड्राइविंग लाइसेंस पर खतरनाक एवं ज्वलनशील सामान ले जाने का एंडोर्समेंट दर्ज था। इसकी वैधता 30 जुलाई 2016 से 29 जुलाई 2017 तक थी, जो दुर्घटना की तारीख को प्रभावी थी।

अदालत ने गवाहों और रिकॉर्ड के आधार पर माना कि चालक के पास दुर्घटना के समय आवश्यक वैध लाइसेंस मौजूद था। चूंकि एलपीजी गैस खतरनाक श्रेणी का पदार्थ है और चालक के लाइसेंस में इसे ले जाने की अनुमति दर्ज थी, इसलिए बीमा पॉलिसी की किसी शर्त का उल्लंघन साबित नहीं हुआ।


एमएसीटी उधमपुर ने कहा कि वाहन मालिक ने अपने वाहन का बीमा कराया था और चालक के पास वैध लाइसेंस था। इसलिए मुआवजे की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की रहेगी। अदालत ने बीमा कंपनी को वाहन मालिक को क्षतिपूर्ति देने के लिए जिम्मेदार ठहराया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी द्वारा मृतक के परिवार को पहले ही 17.50 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अब बीमा कंपनी यह राशि वाहन मालिक से वापस वसूल नहीं कर सकेगी। अधिकरण ने मामले का निपटारा करते हुए आदेश की प्रति बीमा कंपनी के वकील को अनुपालन के लिए देने के निर्देश दिए ।
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