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काफी मिलनसार प्रवृत्ति के हैं टीएस ठाकुर
ब्यूरो/अमर उजाला, रामबन
Updated Sat, 07 Nov 2015 01:49 AM IST
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देश के 43वें मुख्य न्यायाधीश की कुर्सी संभालने जा रहे रामबन जिले के सुदूरवर्ती गांव बटरू के रहने वाले तीरथ सिंह ठाकुर काफी मिलनसार प्रवृत्ति के हैं। वह जमीन से जुड़े हैं। जब भी मौका मिलता है, वह गांव आते हैं।
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यहां आने पर वह सभी से मिलते-जुलते हैं। उनसे बातें कर किसी को नहीं लगता है कि वह इतने बड़े पद पर हैं। ये बातें टीएस ठाकुर के चचेरे भाई उमेश सिंह ठाकुर ने कहीं।
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उमेश ने कहा- ‘इस गांव तक टीवी चैनल या अखबार की उतनी पहुंच नहीं है। हां, रेडियो ग्रामीण सुनते हैं। जब से यह पता चला कि तीरथ मुख्य न्यायाधीश बन रहे हैं, तब से पूरे गांव में जश्न का माहौल है।
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खुशी का आलम यह है कि हर ग्रामीण को ऐसा महसूस हो रहा है जैसे अपने परिवार के किसी सदस्य को इतनी बड़ी कुर्सी मिली हो। अब तक बधाइयों का सिलसिला जारी है। वजह यही है कि वह मिलनसार हैं।’
दरअसल, मिलनसार प्रवृति टीएस ठाकुर को अपने पिता देवीदास ठाकुर से से विरासत में मिली। उनके स्वभाव की ही देन है कि देवीदास वकील से नेता बन गए। शेख अब्दुल्ला के कार्यकाल में वह उप मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।
बाद में केंद्रीय मंत्री भी बने। असम के राज्यपाल भी रह चुके थे। वकालत की प्रेरणा भी तीरथ सिंह को अपने पिता से मिली। बतौर वकील उन्होंने कैरियर की शुरुआत अपने पिता के चैंबर से 1972 में की थी।
पांचवीं तक गांव में की थी पढ़ाई
तीरथ सिंह के चचेरे भाई उमेश ने कहा कि पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई उन्होंने अपने पैतृक गांव बटरू के प्राइमरी स्कूल में की थी। उसके बाद यहां आगे की पढ़ाई का साधन नहीं होने के कारण वह जम्मू चले गए। गांव में सड़क की सुविधा भी नहीं थी। वह बचपन से ही प्रतिभावान थे। मेधावी छात्र रहे थे।
काफी पिछड़ा है ठाकुर का गांव
सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने जा रहे टीएस ठाकुर का पैतृक गांव काफी बदहाल है। गांव तक पक्की सड़क भी नहीं है। हालांकि 1978 में उनके पिता देवीदास ठाकुर ने मगरकोट से उखड़ाल तक पक्की सड़क बनवाई थी।
इसी सड़क किनारे उनका गांव बटरू पड़ता है। आज वह बदहाल है। पैदल चलने के लयक भी सड़क नहीं है। मीडिया की पहुंच से गांव कोसों दूर हैं। टीवी चैनल यहां के लिए बड़ी बात है। अखबार की पहुंच भी यहां मुश्किल है। इंटरनेट की बात ही दूर है।
खुशी से छलक पड़े आंसू
हमारे गांव का लाल सर्वोच्च न्यायालय में सबसे बड़ी कुर्सी पर पहुंच गया, यह पूरे गांव ही नहीं जिले और रियासत के लिए गौरव की बात है। ये बातें कहते-कहते बटरू निवासी अब्दुल रशीद की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। उन्होंने कहा कि अच्छे और मेहनती इनसान को बुलंदी जरूर मिलती है। उन्हें इस मुकाम के लिए बधाई।
ऐसे बुलंदी छूता गया कैरियर
4 जनवरी 1952 को इनका जन्म हुआ। वर्ष 1972 में पिता के चैंबर से ही वकालत शुरू की थी। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में फौजदारी, दीवानी, आईनी और सर्विस मामलात से जुड़े केसों को लड़ते रहे।
1990 में सीनियर वकील का दर्जा मिला। 16 फरवरी 1994 को उन्हें रियासती हाईकोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया। मार्च 1994 में उन्हें जज के रूप में कर्नाटक हाईकोर्ट भेज दिया गया।
सितंबर 1995 में उन्हें कर्नाटक में ही बतौर न्यायाधीश तैनात कर दिया गया। जुलाई 2004 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का जज बना दिया गया। 9 अप्रैल 2008 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का कारगुजार चीफ जस्टिस बनाया गया।
इसी साल उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया। 17 नवंबर 2009 को उन्हें पदोन्नत कर सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। अब 2 दिसंबर 2015 को बतौर चीफ जस्टिस जिम्मेदारी संभालेंगे।