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पांच कक्षाएं, 70 बच्चे और कमरा मात्र एक

Wed, 26 Oct 2016 01:35 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/उध्ामपुर
ब्यूरो, अमर उजाला/उध्ामपुर Updated Wed, 26 Oct 2016 01:35 AM IST
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Five classes, 70 children and only one room
School

जिले के अपर स्याल क्षेत्र का एक प्राइमरी स्कूल तेरह साल से एक ही कच्चे कमरे में चल रहा है। स्कूल की सभी पांच कक्षाओं के 70 बच्चों को इसी कमरे में एक साथ पढ़ाया जाता है। स्कूल की यह व्यवस्था शिक्षा विभाग के तमाम दावों की पोल खोल रही है। विभाग के मुताबिक यह समस्या स्कूल की जमीन के विवादित होने के कारण है।

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जहां एक तरफ शिक्षा विभाग के आला अधिकारी हर सरकारी कार्यक्रम में शिक्षा के स्तर को उठाने का दावा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ अपर स्याल प्राइमरी स्कूल की दशा इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगाती है। विभाग लोगों से अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करने की अपील करता है।
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उनके द्वारा सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को उठाने के दावे किए जाते हैं। सैकड़ों की संख्या में नए स्कूल बनाने और अपग्रेड करने की दलीलें दी जाती हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर कई सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में ढांचागत सुविधाओं से लेकर शिक्षकों व स्टाफ की कमी के कारण कई सरकारी स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। हैरानी की बात यह है कि ऐसा सिर्फ दूरदराज के क्षेत्रों में नहीं है। शहर से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित अपर स्याल गांव का एक प्राइमरी स्कूल तेरह साल से मात्र एक कच्चे कमरे में चल रहा है। स्कूल की पांच कक्षाएं इसी एक मात्र कच्चे कमरे में चल रही हैं।

उसी कमरे में स्कूल का अन्य जरूरी सामान और स्कूल का रिकार्ड भी रखा गया है। एक गंदे नाले के किनारे बने इस स्कूल में पूरा दिन नाले की बदबू से बच्चों को परेशान होना पड़ता है। इसके कारण कई बार स्कूल के बच्चों की तबीयत भी खराब हो जाती है।


स्कूल में बच्चों के खेलने के लिए ग्राउंड भी नहीं है। इसलिए खाली समय में बच्चों को सड़क पर ही खेलना पड़ता है, ऐसे में बच्चों के सड़क हादसे का शिकार होने का खतरा बना रहता है। स्कूल के शिक्षकों को बच्चों को एक ही कमरे में पढ़ाने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। समय के साथ स्कूल में बच्चों की संख्या तो बढ़ी पर स्कूल की दशा नहीं।

स्कूल जिस जगह पर चल रहा है, वह जगह विवादित है। उस जगह पर स्कूल की इमारत बनाने में कानूनी दिक्कतें हैं। स्कूल को शिफ्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-बिशन सिंह, सीईओ, उधमपुर

 

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