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रजाई-कंबलों से और भड़की आग
ब्यूरो/अमर उजाला, नाश्ारी
Updated Sat, 02 Jan 2016 01:59 AM IST
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रामबन जिले के ढलवास में हुए हादसे के प्रत्यक्षदर्शी श्रमिक उत्तम सिंह निवासी चंद्रकोट के अनुसार रात के समय में वह भी बैरक में मौजूद था। आठ बजे वह ड्यूटी कर साइट से लौटा।
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मेस में खाना खाया और सो गया। कुछ श्रमिक पार्टी कर रहे थे। आठ बजे के बाद टनल में काम बंद हो गया। शुक्रवार को भी छुट्टी रखी हुई थी। बैरक में 250 के करीब श्रमिकों के ठहरने की व्यवस्था है।
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बैरक के जिस कोने में हादसा हुआ, वहां से उसका बैड काफी दूर था। अचानक चीखने-चिल्लाने की आवजे आने लगी।
शौकत के अनुसार आवाजें सुनकर वह भी बैरक से बाहर निकला। तीस-चालीस श्रमिक ही उस समय मौजूद थे।
आग की लपटें बढ़ने लगीं। हर श्रमिक को लोहे की अलमारी दी गई थी। ठंड के कारण रजाई और कंबल उनमें थे, जिससे आग और तेजी से भड़की। बिस्तर, बर्तन, कपड़े, जूते आदि जलकर राख हो गए।
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साथी को बचाने में दो की जान गई
उधमपुर। घटना के दौरान बेग कंस्ट्रक्शन कंपनी (बीसीसी) के निदेशक के ड्राइवर को बचाने वाले दो अन्य ड्राइवर मौत के मुंह में समा गए। निदेशक के ड्राइवर रईस के अनुसार रात के समय उसके दो अन्य साथी ड्राइवर अपनी जान बचाकर भाग रहे थे। वह सो रहा था।
अचानक दोनों ने मेरी रजाई उठाई और कहा कि भाग अपनी जान बचा। तब वह जान बचाकर भागा, लेकिन नींद से उठाने वाले दोनों साथी खुद बेहोश होकर गिर गए और आग की चपेट में आ गए। जिससे उनकी जान चली गई।
एक घंटे पहले दी थी शुभकामनाएं
घटना के एक घंटे पहले निदेशक धर्मपाल ने वीरवार रात को 11 बजकर 11 मिनट पर सभी श्रमिकों, स्टाफ, अधिकारियों को नए साल की शुभकामनाएं दी थी। एसएमएस के जरिए संदेश दिया। एक घंटे बाद ही उन्हें भीषण हादसे की जानकारी मिली। नए साल की खुशियां देखते ही देखते धुएं में उड़ गई। नए साल पर नई आशाएं भी इन दस लोगों के आश्रितों के लिए धरी की धरी रह गई।