{"_id":"5686f993efd6fc3575abed49bcfedce7","slug":"did-not-inter-into-college-even-marite-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेरिट में आने के बाद भी कालेजों में प्रवेश नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेरिट में आने के बाद भी कालेजों में प्रवेश नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, उधमपुर
Updated Thu, 12 Mar 2015 02:01 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रियासत के छात्रों के लिए प्रधानमंत्री स्पेशल स्कालरशिप योजना के तहत राज्य के विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। मेरिट के बाद भी सेलेक्ट हुए छात्रों को कालेजों में प्रवेश नहीं दिया गया। उन्हें वापस घर लौटना पड़ा। छात्रों ने मुआवजा देने और दूसरे सेमेस्टर में दाखिला देने की मांग की।
विज्ञापन
इस योजना के तहत सेलेक्ट हुए छात्र सुनील कुमार, फैयाज, फैयाज अहमद, बलजीत सिंह आदि ने बताया कि आल इंडिया काउंसिल फार टेक्निकल एजूकेशन ने सितंबर 2014 में विज्ञापन दिया और कहा कि जम्मू-कश्मीर के छात्रों के लिए विशेष स्कालरशिप योजना शुरू की गई है।
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने आल इंडिया काउंसिल फार टेक्निकल एजूकेशन के तहत आने वाले सभी कालेजों में दो सीटें आरक्षित की हैं। इन छात्रों को श्रीनगर के एसपी कालेज में काउंसलिंग के लिए बुलाया गया। काउंसलिंग में मेरिट आने के बाद उन्हें पत्र दिया और संबंधित कालेज में सात दिन के अंदर रिपोर्ट करने के लिए कहा।
विज्ञापन
सुनील कुमार के अनुसार उन्हें श्री राम कालेज आफ कामर्स में भेजा गया। जब वह कालेज में पहुंचे तो उन्हें दाखिला नहीं दिया गया। कालेज प्रशासन ने कहा कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय के अंडर हैं।
छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय गए, लेकिन कोई भी अधिकारी उनसे नहीं मिला। इसके बाद केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। मंत्री ने भी मानव संसाधन मंत्रालय को पत्र लिखा। इस कार्रवाई को छह माह बीत गए हैं। उनका साल भी बर्बाद हो गया और दाखिला नहीं दिया।
दिल्ली विश्वविद्यालय में आरटीआई लगाई गई। आरटीआई में जवाब दिया गया कि वह तय समय में नहीं पहुंचे। इसलिए उन्हें दाखिला नहीं दिया। जबकि चुने गए छात्र सात दिन के भीतर ही कालेज में पहुंच गए थे। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 29 अगस्त 2014 के आदेश पास कर पहले ही रिपोर्ट करने की तारीख बढ़ा दी थी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि उन्हें सीधे दूसरे सेमेस्टर में दाखिला दिया जाए
ताकि उनका साल बर्बाद नहीं हो और मुआवजा दिया जाए। उनका आरोप है कि विशेष स्कालरशिप योजना के तहत छात्रों से खिलवाड़ किया गया और उन्हें ठगा गया है।