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जम्मू-कश्मीर में हुई साल की सबसे बड़ी वारदात
भूपेंदर सिंह भाटिया/जम्मू
Updated Fri, 27 Sep 2013 12:01 AM IST
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लगभग डेढ़ दशक से आतंकवाद की मार झेलने वाले जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर फिदायीन हमलों ने दहलाकर रख दिया है। बृहस्पतिवार को सांबा और हीरा नगर पर हमला साल की सबसे बड़ी वारदात है।
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इसमें तीन सैन्य कर्मी और चार पुलिसकर्मियों शहीद हो गए। इससे पहले इसी साल 13 मार्च को श्रीनगर स्थित सीआरपीएफ कैंप पर फिदायीन हमला हुआ था, जिसमें पांच सीआरपीएफ कर्मी शहीद हो गए थे। उसके बाद लगातार आतंकी हमलों का सिलसिला तेज हो गया।
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भले वह प्रधानमंत्री के दौरे से पहले सेना के काफिले पर हमला हो या फिर श्रीनगर के अलग-अलग स्थानों पर।
हालांकि इन हमलों में आतंकियों का मुख्य निशाना सेना और सुरक्षा बल ही रहे लेकिन दहशत फैलाने के उद्देश्य से उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निवास, श्रीनगर विधानसभा, जम्मू रेलवे स्टेशन, रघुनाथ मंदिर जम्मू और कश्मीर घाटी में स्थित अन्य केंद्रीय कार्यालयों तक को नहीं बख्शा।
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पिछले एक दशक से ज्यादा समय में हुए फिदायीन हमलों में सबसे बड़ा हमला 14 मई 2002 को जम्मू के पास कालू चक इलाके में हुआ। सैन्य क्षेत्र में हुई फिदायीन हमले में 36 सैन्यकर्मियों, उनके परिवार व अन्य की मौत हो गई थी। इसमें 48 लोग जख्मी हुए थे।
हालांकि पिछले तीन सालों से फिदायीन हमलों में एकाएक ब्रेक लग गई थी। वर्ष 2013 से पहले अंतिम बार फिदायीन हमला छह जनवरी 2010 को श्रीनगर के लाल चौर पर हुआ था।
लश्कर आतंकियों ने सीआरपीएफ कैंप पर फिदायीन हमला कर एक नागरिक और एक पुलिसकर्मी की जान ले ली थी लेकिन सुरक्षा बलों ने दोनों आतंकियों को मार गिराया था। इस हमले में 12 लोग जख्मी हो गए थे। इस साल 13 मार्च को सीआरपीएफ कैंप पर फिदायीन हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को भी हिला कर रख दिया था।
जम्मू कश्मीर में हुए मुख्य फिदायीन हमले:
01 अक्तूबर 2001
श्रीनगर स्थित विधानसभा में फिदायीन हमला। इसमें चारों फिदायीन ढेर, 11 सुरक्षा जवान शहीद और 24 नागरिकों की मौत।
17 नवंबर 2001
डोडा के रामबन क्षेत्र में लश्कर के फिदायीन का हमला। दस जवान शहीद व चार नागरिकों की मौत।
14 मई 2002
कालू चक स्थित सैन्य क्षेत्र में फिदायीन हमले में तीन आतंकी ढेर। 36 सैन्यकर्मी और उनके परिवार वालों की मौत, 48 जख्मी।
24 नवंबर 2002
जम्मू के रघुनाथ मंदिर में फिदायीन हमला। तीन आतंकियों सहित 13 लोगों की मौत।
28 जून 2003
जम्मू के सुजआं इलाके में सेना की डोगरा रेजीमेंट पर फिदायीन हमला। 12 जवान शहीद, एक लेफ्टिनेंट सहित सात जख्मी। दोनों फिदायीन हमले में मारे गए।
22 जुलाई 2003
अखनूर के टांडा रोड स्थित आर्मी कैंप में फिदायीन हमला। एक ब्रिगेडियर सहित आठ जवानों की मौत। चार जनरल, एक ब्रिगेडयर और दो कर्नल सहित 12 जख्मी।
17 अक्टूबर 2003
मौलाना आजाद रोड स्थित तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निवास पर फिदायीन हमला। दोनों आतंकी मौके पर ही ढेर हुए। दो बीएसएफ जवान शहीद। तीन फोटो जर्नलिस्ट सहित दस जख्मी।
02 जनवरी 2004
जम्मू रेलवे स्टेशन पर फिदायीन हमला। चार जवान शहीद। नौ जवानों सहित 15 जख्मी हुए।
23 मई 2004
काजीगुंड के पास लोअर मुंडा क्षेत्र में आईईडी विस्फोट में 19 बीएसएफ जवान शहीद। छह महिलाओं और पांच बच्चों की भी मौत।
09 अक्तूबर 2004
सिंहपुरा इलाके में सेना की कान्वाई पर फिदायीन हमला। चार जवान शहीद। 35 जख्मी हुए। एक सिविल ड्राइवर भी मारा गया।
12 मई 2005
श्रीनगर में बीएसएफ की कान्वाई पर फिदायीन हमला। दो लोग मारे गए, जबकि 60 लोग घायल हुए। घायलों में 25 स्कूली बच्चे भी शामिल।
16 नवंबर 2005
श्रीनगर की रेजीडेंसी रोड स्थित जेएंडके बैंक हेड क्वार्टर के सामने कार बम हमले में चार नागरिक मारे गए, जबकि विधायक व पूर्व मंत्री उस्मान मजीद सहित 72 लोग जख्मी हो गए।
27 अगस्त 2008
जम्मू के बाहरी इलाके काना चक सेक्टर में तीन फिदायीन आतंकियों ने हमला किया। तीन सेना के जवान शहीद हुए। पांच नागरिकों की भी घटना में मौत।
06 जनवरी 2010
लश्कर आतंकियों ने लाल चौक पर सीआरपीएफ कैंप पर फिदायीन हमला किया। दोनों आतंकियों को मार गिराया। एक नागरिक और पुलिसकर्मी की मौत, 12 जख्मी।