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44वर्षों के बाद सनतान धर्म सभा ने भगवान के सोने चांदी आभूषणों,प्रसाद पात्रों की लगाई प्रदर्शनी
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पुंछ के गीता भवन में 44 वर्षो के बाद प्रदर्शित किए गए भगवान के सोने चादी के आभूषण एंव प्रसाद पात्र
- फोटो : POONCH
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पुंछ। नगर के सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक रूप में दर्ज हो गया। जब जिला सनातन धर्म सभा की तरफ से 44 वर्षों से स्टेट बैंक आफ इंडिया के स्ट्रांग रूम के लॉकर में बंद लक्ष्मी नारायण भगवान के सोने चांदी से आभूषण, प्रसाद बनाने के बर्तनों, मां दुर्गा के स्वर्ण जड़ित चित्रों सहित करोड़ों रुपये मूल्य की वस्तुओं की गीता भवन में रामनवमी पर प्रदर्शनी लगाई गई।
जिसे देखकर श्रद्धालु काफी प्रसन्न हो रहे थे। सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक कड़ी सुरक्षा में लगाई गई प्रदर्शनी को हजारों लोगों ने देखा। प्रदर्शनी के बारे में जिला सनातन धर्म सभा के प्रधान सतीश सासन ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह की महारानी और डॉक्टर कर्ण सिंह की माता इन वस्तुओं का प्रयोग श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर में पूजा अर्चना के लिए प्रयोग करती थीं। उन्होंने अपने स्वर्गवास के पूर्व डॉक्टर कर्ण सिंह से लक्ष्मी नारायण मंदिर की इस धरोहर को उनके स्वर्गवास के उपरांत सनातन धर्मसभा पुंछ को सौंपने के आदेश दिए थे। इसके बाद डॉक्टर कर्ण सिंह ने अपने ओएसडी के साथ पुंछ पहुंच कर तत्कालीन सनातन धर्मसभा के प्रधान प्रोफेसर मंगत शर्मा को सौंपा था, जिसके बाद एक समिति का गठन करते हुए डॉ. कर्ण सिंह को इन वस्तुओं का ट्रस्टी नियुक्त कर इन्हें जिला प्रशासन की देखरेख में बैंक में जमा किया गया था। उस समय इस बात का लिखित में निर्णय लिया गया था। वर्ष में सनातन धर्म के सबसे बड़े दो पर्वों जन्माष्टमी और रामनवमी पर भगवान की इस धरोहर को गीता भवन में भक्तों के समक्ष प्रदर्शनी लगाई जाएगी, परंतु उसके बाद किसी भी सनातन धर्म सभा ने इतना साहस नहीं दिखाया जो भगवान की इन वस्तुओं की प्रदर्शनी आयोजित कर सके। हमने दो वर्षों से कड़े प्रयास करते हुए जिला प्रशासन के सहयोग से आज 44 वर्षों बाद पहली यह प्रदर्शनी आयोजित की है, ताकि हमारे सनातनी समाज को भगवान की इन वस्तुओं के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो सकें।
इस आयोजन में सनातन धर्म सभा सदस्यों के साथ ही उपायुक्त इंद्रजीत, एसएसपी रोहित बसकोत्रा और एसएचओ एसडी सिंह और एसबीआई अधिकारियों का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। जिन्होंने छुट्टी के दिन बैंक खोल कर कड़ी सुरक्षा में भगवान के इस सामान को गीता भवन तक पहुंचाया और दिन भी कड़ी सुरक्षा में प्रदर्शित करने उपरांत दोबारा बैंक में जमा कराया है।
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जिसे देखकर श्रद्धालु काफी प्रसन्न हो रहे थे। सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक कड़ी सुरक्षा में लगाई गई प्रदर्शनी को हजारों लोगों ने देखा। प्रदर्शनी के बारे में जिला सनातन धर्म सभा के प्रधान सतीश सासन ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह की महारानी और डॉक्टर कर्ण सिंह की माता इन वस्तुओं का प्रयोग श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर में पूजा अर्चना के लिए प्रयोग करती थीं। उन्होंने अपने स्वर्गवास के पूर्व डॉक्टर कर्ण सिंह से लक्ष्मी नारायण मंदिर की इस धरोहर को उनके स्वर्गवास के उपरांत सनातन धर्मसभा पुंछ को सौंपने के आदेश दिए थे। इसके बाद डॉक्टर कर्ण सिंह ने अपने ओएसडी के साथ पुंछ पहुंच कर तत्कालीन सनातन धर्मसभा के प्रधान प्रोफेसर मंगत शर्मा को सौंपा था, जिसके बाद एक समिति का गठन करते हुए डॉ. कर्ण सिंह को इन वस्तुओं का ट्रस्टी नियुक्त कर इन्हें जिला प्रशासन की देखरेख में बैंक में जमा किया गया था। उस समय इस बात का लिखित में निर्णय लिया गया था। वर्ष में सनातन धर्म के सबसे बड़े दो पर्वों जन्माष्टमी और रामनवमी पर भगवान की इस धरोहर को गीता भवन में भक्तों के समक्ष प्रदर्शनी लगाई जाएगी, परंतु उसके बाद किसी भी सनातन धर्म सभा ने इतना साहस नहीं दिखाया जो भगवान की इन वस्तुओं की प्रदर्शनी आयोजित कर सके। हमने दो वर्षों से कड़े प्रयास करते हुए जिला प्रशासन के सहयोग से आज 44 वर्षों बाद पहली यह प्रदर्शनी आयोजित की है, ताकि हमारे सनातनी समाज को भगवान की इन वस्तुओं के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो सकें।
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इस आयोजन में सनातन धर्म सभा सदस्यों के साथ ही उपायुक्त इंद्रजीत, एसएसपी रोहित बसकोत्रा और एसएचओ एसडी सिंह और एसबीआई अधिकारियों का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। जिन्होंने छुट्टी के दिन बैंक खोल कर कड़ी सुरक्षा में भगवान के इस सामान को गीता भवन तक पहुंचाया और दिन भी कड़ी सुरक्षा में प्रदर्शित करने उपरांत दोबारा बैंक में जमा कराया है।
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