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पुत्र की प्राप्ति और लंबी आयु के लिए की पूजा
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कठुआ में बच्छ दुआ की पूजा करने के लिए नहर के किनारे उमड़ी महिलाएं, संवाद।
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। संतान प्राप्ति एवं संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाने वाला वत्स द्वादशी का पर्व जिले में पूर्ण आस्था से मनाया गया। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को होने वाले इस पर्व के चलते कठुआ शहर के साथ आसपास के इलाकों में रहने वाली महिलाओं ने जलस्रोतों के सामने पर्व की पारंपरिक पूजा की।
शुक्रवार को शहर के मध्य बहने वाली नहर और प्राचीन बावलियों पर व्रती महिलाओं ने पारंपरिक पूजा की, और सामूहिक रूप से एकत्र होकर व्रत की कथा सुनी। महिलाओं में पर्व को लेकर उत्साह का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ यह क्रम शाम चार बजे तक जारी रहा। भारी संख्या में महिलाएं बैंड-बाजे के साथ पूरे परिवार को लेकर नहर के किनारे पहुंची हुई थीं। जहां, पूजन के उपरांत उन्होंने बच्चों को प्रसाद व खिलौने देकर अपनी खुशी का इजहार किया।
पर्व के संबंध में नहर पर पूजा करने आई कौशल्या देवी ने बताया कि वत्स द्वादशी व्रत एवं पूजन पुत्रवती महिलाएं अपने बेटों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ करती हैं। वहीं, कुछ महिलाएं यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों का पर्व होता है। इस दिन बछड़े वाली गाय की पूजा कर कथा सुनी जाती है।
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इसी तरह से नगरी में महिलाओं ने वजूह नाले, लखनपुर में रावी दरिया के किनारे व आसपास के गावों में तालाबों पर जाकर पूजा की। वहीं, कुछ महिलाओं ने बेडियां पत्तन स्थित गौशाला में जाकर गाय और बछड़े का भी पूजन किया।
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शुक्रवार को शहर के मध्य बहने वाली नहर और प्राचीन बावलियों पर व्रती महिलाओं ने पारंपरिक पूजा की, और सामूहिक रूप से एकत्र होकर व्रत की कथा सुनी। महिलाओं में पर्व को लेकर उत्साह का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ यह क्रम शाम चार बजे तक जारी रहा। भारी संख्या में महिलाएं बैंड-बाजे के साथ पूरे परिवार को लेकर नहर के किनारे पहुंची हुई थीं। जहां, पूजन के उपरांत उन्होंने बच्चों को प्रसाद व खिलौने देकर अपनी खुशी का इजहार किया।
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पर्व के संबंध में नहर पर पूजा करने आई कौशल्या देवी ने बताया कि वत्स द्वादशी व्रत एवं पूजन पुत्रवती महिलाएं अपने बेटों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ करती हैं। वहीं, कुछ महिलाएं यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों का पर्व होता है। इस दिन बछड़े वाली गाय की पूजा कर कथा सुनी जाती है।
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इसी तरह से नगरी में महिलाओं ने वजूह नाले, लखनपुर में रावी दरिया के किनारे व आसपास के गावों में तालाबों पर जाकर पूजा की। वहीं, कुछ महिलाओं ने बेडियां पत्तन स्थित गौशाला में जाकर गाय और बछड़े का भी पूजन किया।

शहर में नह के किनारे बच्छ दुआ की पूजा करती महिलाएं, संवाद।- फोटो : KATHUA

नहर के किनारे बच्छ दुआ की पूजा करती महिलाएं, संवाद।- फोटो : KATHUA