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उज्ज परियोजना से बदलेगी दो जिलों की तकदीर
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कठुआ। बहुद्देश्यीय उज्ज परियोजना जहां जम्मू संभाग के दो जिलों के एक बड़े कृषि क्षेत्र की लाइफलाइन बनने जा रही है। इस परियोजना में पूर्व की खामियों को खत्म करने के लिए वैकल्पिक डीपीआर तैयार की जा रही है। इसका काम अंतिम चरण में चल रहा है। नई डीपीआर में बिलावर के पंजीतीर्थी सहित इस परियोजना के अधीन आने वाले क्षेत्रों से जुड़ी 21 योजनाओं को शामिल किया गया है।
पूर्व की परियोजना में डूब क्षेत्र के अधीन आने वाले बिजली, पानी, सिंचाई सहित पेयजल और वन संपत्ति के लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार हो रही हैं। जो अंतिम चरण में बताई जा रही हैं। इससे डूब क्षेत्र के अधीन आकर व्यर्थ जाने वाले ढांचे और इससे आसपास के लोगों को होने वाले नुकसान या इंतजार से भी बचाया जा सकेगा। सार्वजनिक महत्व की इस योजना में केंद्र की विशेष रूची के बाद परियोजना को लेकर शासन प्रशासन भी तेजी से काम में जुट गया है।
12 गांव डूब क्षेत्र में शामिल, किशनपुर डुंगाड़ा और बेरिल का मिट जाएगा नामोनिशान
उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना के जलाशय में 12 गांव डूब क्षेत्र में शामिल हैं। 34.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले परियोजना के डूब क्षेत्र से 8684 लोग प्रभावित होंगे। सूत्रों की मानें तो डूब क्षेत्र में आने वाले 12 गांव में से किशनपुर डुंगाडा और बेरिल दो ऐसे गांव हैं, जो पूरी तरह पानी में समा जाएंगे। अपर किशनपुर, दुरूंग, धरालता आदि 10 गांवों के भी कई इलाके डूब क्षेत्र में समाने का अनुमान है। परियोजना में डूब क्षेत्र प्रभावितों को किशनगंगा परियोजना की तर्ज पर मुआवजे का प्रावधान है। हालांकि जो इलाके डूबने वाले हैं, वहां के ग्रामीण असमंजस में हैं। न तो उन्हें कौन सा इलाका कितना डूबेगा, इसकी जानकारी दी गई है और न ही राजस्व विभाग ने अब तक कोई कवायद बढ़ाई है। उधर, मुआवजे को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। ग्रामीण चाहते हैं कि विस्थापन के बदले जहां उन्हें कॉलोनी में बसाया जाए और डूब क्षेत्र में जाने वाली भूमि का अच्छा दाम मिले।
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पूर्व की परियोजना में डूब क्षेत्र के अधीन आने वाले बिजली, पानी, सिंचाई सहित पेयजल और वन संपत्ति के लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार हो रही हैं। जो अंतिम चरण में बताई जा रही हैं। इससे डूब क्षेत्र के अधीन आकर व्यर्थ जाने वाले ढांचे और इससे आसपास के लोगों को होने वाले नुकसान या इंतजार से भी बचाया जा सकेगा। सार्वजनिक महत्व की इस योजना में केंद्र की विशेष रूची के बाद परियोजना को लेकर शासन प्रशासन भी तेजी से काम में जुट गया है।
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12 गांव डूब क्षेत्र में शामिल, किशनपुर डुंगाड़ा और बेरिल का मिट जाएगा नामोनिशान
उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना के जलाशय में 12 गांव डूब क्षेत्र में शामिल हैं। 34.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले परियोजना के डूब क्षेत्र से 8684 लोग प्रभावित होंगे। सूत्रों की मानें तो डूब क्षेत्र में आने वाले 12 गांव में से किशनपुर डुंगाडा और बेरिल दो ऐसे गांव हैं, जो पूरी तरह पानी में समा जाएंगे। अपर किशनपुर, दुरूंग, धरालता आदि 10 गांवों के भी कई इलाके डूब क्षेत्र में समाने का अनुमान है। परियोजना में डूब क्षेत्र प्रभावितों को किशनगंगा परियोजना की तर्ज पर मुआवजे का प्रावधान है। हालांकि जो इलाके डूबने वाले हैं, वहां के ग्रामीण असमंजस में हैं। न तो उन्हें कौन सा इलाका कितना डूबेगा, इसकी जानकारी दी गई है और न ही राजस्व विभाग ने अब तक कोई कवायद बढ़ाई है। उधर, मुआवजे को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। ग्रामीण चाहते हैं कि विस्थापन के बदले जहां उन्हें कॉलोनी में बसाया जाए और डूब क्षेत्र में जाने वाली भूमि का अच्छा दाम मिले।
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