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मनुष्य के दुख का कारण भौतिकवादी सोच है: संत सुभाष शास्त्री
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बाबा बड़भाग सिंह देव स्थान पर आयोजित सत्संग के दौरान प्रवचन करते संत सुभाष शास्त्री, संवाद।
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। आज हर मानव दुखी ही दिखता है। इसका कारण हमारी भौतिकवादिता है। हमारी सोच है कि इस संसार की हर वस्तु और पदार्थों को प्राप्त कर लेने के बाद हम सुखी हो जाएंगे। परंतु ऐसा नहीं होता। क्योंकि, इस संसार में दिखने वाली हर चीज का अंत अवश्य होता है। और, जब प्राप्त चीजें हम से छूटेंगी तो वह हमारे दुख का कारण बन जाएंगी। ये बातें शहर के वार्ड 7 में स्थित बाबा बड़भाग सिंह देव स्थान पर आयोजित सत्संग के दौरान प्रवचन करते हुए संत सुभाष शास्त्री ने कहीं।
बाबा बड़भाग सिंह के जन्मोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में संत सुभाष शास्त्री के प्रस्तुत संगीतमय भजन और संकीर्तन ने वहां उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शास्त्री जी ने कहा कि प्रश्न यह उठता है कि अब अपने मन को इस भौतिकवाद से कैसे हटाएं? इसके लिए अपने मन को श्री प्रभु के चरणों में लगाना होगा। जब सांसारिक विषयों से विरक्त होकर ही परमात्मा में लीन होंगे, तभी उनकी प्राप्ति होती है। और, यही भक्ति आपके सभी दुखों को हर लेती है। इस प्रकार हमें मुक्ति के लिए उपनिषद पुराण का श्रवण कर महापुरुषों के उपदेश और सत्संग से अपने अंदर भक्ति का उदय करना होगा।
उन्होंने कहा कि हर समय निश्चिंत होकर भगवान का भजन करें। भगवान स्वयं प्रकट होकर सभी कष्टों को हर लेंगे। अंत में संत श्री ने साधकों को समझाया कि अपने दैनिक जीवन में हिंसा का मार्ग छोड़ सत्य, नम्रता, निस्वार्थ सेवा और पवित्र मार्ग पर ही चलना होगा। तब इस धरा के हर प्राणी में परमात्मा का रूप नजर आएगा। अपने जीवन में परमात्मा की उपेक्षा नहीं करनी है। लोगों का शोषण नहीं करना है। किसी को प्रताड़ित नहीं करना है। जब अपने भाव में हर प्राणी के लिए इस तरह का विचार रखेंगे, तो प्राणी मात्र से प्यार होगा और परमात्मा को प्रिय हो जाएंगे। सत्संग का समापन आरती के साथ हुआ। इसके बाद देवस्थान पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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बाबा बड़भाग सिंह के जन्मोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में संत सुभाष शास्त्री के प्रस्तुत संगीतमय भजन और संकीर्तन ने वहां उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शास्त्री जी ने कहा कि प्रश्न यह उठता है कि अब अपने मन को इस भौतिकवाद से कैसे हटाएं? इसके लिए अपने मन को श्री प्रभु के चरणों में लगाना होगा। जब सांसारिक विषयों से विरक्त होकर ही परमात्मा में लीन होंगे, तभी उनकी प्राप्ति होती है। और, यही भक्ति आपके सभी दुखों को हर लेती है। इस प्रकार हमें मुक्ति के लिए उपनिषद पुराण का श्रवण कर महापुरुषों के उपदेश और सत्संग से अपने अंदर भक्ति का उदय करना होगा।
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उन्होंने कहा कि हर समय निश्चिंत होकर भगवान का भजन करें। भगवान स्वयं प्रकट होकर सभी कष्टों को हर लेंगे। अंत में संत श्री ने साधकों को समझाया कि अपने दैनिक जीवन में हिंसा का मार्ग छोड़ सत्य, नम्रता, निस्वार्थ सेवा और पवित्र मार्ग पर ही चलना होगा। तब इस धरा के हर प्राणी में परमात्मा का रूप नजर आएगा। अपने जीवन में परमात्मा की उपेक्षा नहीं करनी है। लोगों का शोषण नहीं करना है। किसी को प्रताड़ित नहीं करना है। जब अपने भाव में हर प्राणी के लिए इस तरह का विचार रखेंगे, तो प्राणी मात्र से प्यार होगा और परमात्मा को प्रिय हो जाएंगे। सत्संग का समापन आरती के साथ हुआ। इसके बाद देवस्थान पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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