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मवेशियों के लिए ग्रामीण ले रहे जोखिम
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Fri, 10 Oct 2014 02:04 AM IST
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भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर गोलीबारी से बचने के लिए ग्रामीण तो सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिए गए हैं लेकिन ग्रामीणों को मवेशियों की चिंता खाए जा रही है।
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पशुधन के साथ खास लगाव होने की वजह से ग्रामीण टोलियों में बंटकर मवेशियों को जैसे तैसे चारा डालने और पानी पिलाने जा रहे हैं।
पाकिस्तानी रेंजरों के अक्सर निशाने पर रहने वाले बोबिया गांव की कुल आबादी 460 है लेकिन वर्तमान में गांव पूरी तरह से खाली हो चुका है।
घरों पर ताले जड़े हैं लेकिन मवेशियाें को गांव में ही बांध रखना मजबूरी है। ऐसे में मवेशियों को चारे और पानी की सुविधा देने के लिए ग्रामीण लगातार जोखिम उठा रहे हैं।
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बोबिया की तरह ही दर्जनों अन्य गांवों में ऐसे ही हालात हैं। गुज्जर चक के राधे श्याम बताते हैं कि मवेशियों को वह साथ लेकर नहीं जा सकते थे।
ग्रामीणों के लिए मजबूरी है कि मवेशियों को उनके शेड अथवा बाड़े में बांधे रखा जाए। लोगों को तो जैसे तैसे सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है लेकिन निरीह मवेशी चारा पानी के मोहताज हैं। उन्हें चारा और पानी देने के लिए गांव के युवाओं को क्रमवार ड्यूटी दी जा रही है।
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तनावपूर्ण हालात में गांव के भीतर जाने खतरे से खाली नहीं है लेकिन मवेशियों की खातिर रोजाना ऐसा करना पड़ रहा है। मेहराजपुर के रशपाल सिंह और धर्म सिंह के अनुसार ग्रामीणों के पास भले ही अपने लिए सुरक्षित स्थानों का विकल्प है लेकिन उनकी जान मवेशियों में ही अटकी हुई है।