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गुरुमुख होना अच्छी बात : सुनील शास्त्री
Sun, 04 Jan 2026 12:28 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 04 Jan 2026 12:28 AM IST
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देवल गांव के श्री राम मंदिर में जारी श्रीमद् भागवत कथा का पांचवां दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलावर। देवल गांव के श्री राम मंदिर में जारी श्रीमद् भागवत कथा पांचवें दिन में प्रवेश कर गई। कथावाचक सुनील शास्त्री ने पंडाल में प्रवचन सुनने पहुंची संगत को समझाया कि इस वर्तमान समय में गुरु बनने बनाने की एक होड़ सी लगी हुई है। गुरुमुख होना अच्छी बात है।
गीता के अनुसार हमें किसी आत्मज्ञानी महापुरुष से आत्मज्ञान के लिए उनका सत्संग करना चाहिए। श्रद्धा होने पर नाम दान लेना चाहिए और नाम दान के बाद सत्संग सेवा साधना आराधना आदि नियमों का पालन भी करना चाहिए। कर्म भी अच्छे हों तभी आध्यात्मिक उन्नति होती है। नाम दान लेने के बाद भी यदि कोई किसी का दिल दुखाता है कटु वचन बोलना है दूसरे को नीचा दिखाता है अपने को श्रेष्ठ समझता है, भेदभाव करता है परमात्मा से शिकायत करता है तो समझो नाम दान लेने के बाद भी उसमें नाम दान नहीं लिया।
कथावाचक ने संगत को समझाया कि सिर्फ नाम जपने से ही नहीं बल्कि अच्छे कर्म करने से ही भवसागर को पार किया जा सकता है। दूसरों के दोष निकालने से पहले अपने दिल को साफ करें जब नाम दान देते समय गुरुजी ने कमी नहीं निकली तो तू कौन होता है सबकी कमियां निकालने वाला। भगवान की कथा सुनाकर हमें सत्य उपदेश देकर अज्ञानता हटाकर हमें ईश्वर धर्म संस्कृति से जोड़े वह संत है। वही सच्चा ग्रंथ है जो प्रेम भाईचारे और सत्य का कल्याण की राह दिखाए। प्रेम में ही सब कुछ है। परमात्मा प्रेम स्वरूप है उसे प्रेम ही प्रिय है।
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बिलावर। देवल गांव के श्री राम मंदिर में जारी श्रीमद् भागवत कथा पांचवें दिन में प्रवेश कर गई। कथावाचक सुनील शास्त्री ने पंडाल में प्रवचन सुनने पहुंची संगत को समझाया कि इस वर्तमान समय में गुरु बनने बनाने की एक होड़ सी लगी हुई है। गुरुमुख होना अच्छी बात है।
गीता के अनुसार हमें किसी आत्मज्ञानी महापुरुष से आत्मज्ञान के लिए उनका सत्संग करना चाहिए। श्रद्धा होने पर नाम दान लेना चाहिए और नाम दान के बाद सत्संग सेवा साधना आराधना आदि नियमों का पालन भी करना चाहिए। कर्म भी अच्छे हों तभी आध्यात्मिक उन्नति होती है। नाम दान लेने के बाद भी यदि कोई किसी का दिल दुखाता है कटु वचन बोलना है दूसरे को नीचा दिखाता है अपने को श्रेष्ठ समझता है, भेदभाव करता है परमात्मा से शिकायत करता है तो समझो नाम दान लेने के बाद भी उसमें नाम दान नहीं लिया।
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कथावाचक ने संगत को समझाया कि सिर्फ नाम जपने से ही नहीं बल्कि अच्छे कर्म करने से ही भवसागर को पार किया जा सकता है। दूसरों के दोष निकालने से पहले अपने दिल को साफ करें जब नाम दान देते समय गुरुजी ने कमी नहीं निकली तो तू कौन होता है सबकी कमियां निकालने वाला। भगवान की कथा सुनाकर हमें सत्य उपदेश देकर अज्ञानता हटाकर हमें ईश्वर धर्म संस्कृति से जोड़े वह संत है। वही सच्चा ग्रंथ है जो प्रेम भाईचारे और सत्य का कल्याण की राह दिखाए। प्रेम में ही सब कुछ है। परमात्मा प्रेम स्वरूप है उसे प्रेम ही प्रिय है।
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