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सीता स्वयंवर का मंचन देख श्रद्धालु गदगद
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बसोहली। सननघाट में बैसाखी के बाद से रामलीला का मंचन शुरू है। यहां हर साल बैसाखी के बाद रामलीला का मंचन होता है। इस आयोजन ने अपने 40 वर्ष पूरे कर लिए हैं। मंगलवार को रामलीला के चौथे दिन सीता स्वयंवर का मंचन हुआ। मंचन के दौरान धनुष यज्ञ एवं राम विवाह, रावण-बाणासुर संवाद का दृश्य देख श्रद्धालु आनंदित हुए।
रामलीला के दौरान कथा को मंचन के माध्यम से दिखाया गया। जिसमें महाराजा जनक के पास भगवान शिव का दिव्य धनुष था, जो राजा जनक के महल में एक विशेष स्थान पर स्थापित था। जिसे कोई भी हिला तक नहीं सकता था। एक दिन जनक नंदिनी सीता ने धनुष को उठाकर दूसरे स्थान पर रख दिया। सीता के इस कार्य को देखकर महाराजा जनक को बहुत ही आश्चर्य हुआ और उन्होंने सोचा कि सीता में कोई शक्ति है। तब राजा जनक ने निश्चय किया कि सीता का विवाह ऐसे पराक्रमी से किया जाएगा जो भगवान शिव के धनुष को उठा सके। उन्होंने जनकपुरी में सीता स्वयंवर का आयोजन किया। स्वयंवर में अनेकों राजाओं ने आकर धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन हिला तक नहीं सके। रावण भी धनुष यज्ञ में शामिल हुए, लेकिन आकाश मार्ग से भविष्यवाणी होने के बाद वह लंका लौट गए। इधर, राजा जनक चिंतित हो उठे, तभी गुरु विश्वामित्र ने श्रीराम की ओर देखा और धनुष उठाने के लिए कहा। गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम ने धनुष को उठा लिया। इसके बाद सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाली। धनुष भंग होने की आवाज सुनकर परशुराम वहां पहुंचे तो श्रीराम ने उनका संशय दूर किया।
रात के समय बिजली कटौती बंद करने की मांग
सरपंच मदन लाल, नायब सरपंच पवन सिंह, पंच हंसराज, पवन कुमार, सुरेश कुमार, रामलीला क्लब के प्रधान प्रेम सिंह, उप प्रधान रमेश, सदस्य जसवीर सिंह, जैमल सिंह आदि ने बताया कि सननघाट में जारी रामलीला के दौरान घंटों बिजली की अघोषित कटौती होती है। जिससे रामलीला सही ढंग से नहीं हो पाती। दर्शकों को भी परेशानी होती है। लिहाजा बिजली कटौती के समय को बदला जाए। रामलीला समाप्त होने के बाद बिजली काटी जाए।
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रामलीला के दौरान कथा को मंचन के माध्यम से दिखाया गया। जिसमें महाराजा जनक के पास भगवान शिव का दिव्य धनुष था, जो राजा जनक के महल में एक विशेष स्थान पर स्थापित था। जिसे कोई भी हिला तक नहीं सकता था। एक दिन जनक नंदिनी सीता ने धनुष को उठाकर दूसरे स्थान पर रख दिया। सीता के इस कार्य को देखकर महाराजा जनक को बहुत ही आश्चर्य हुआ और उन्होंने सोचा कि सीता में कोई शक्ति है। तब राजा जनक ने निश्चय किया कि सीता का विवाह ऐसे पराक्रमी से किया जाएगा जो भगवान शिव के धनुष को उठा सके। उन्होंने जनकपुरी में सीता स्वयंवर का आयोजन किया। स्वयंवर में अनेकों राजाओं ने आकर धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन हिला तक नहीं सके। रावण भी धनुष यज्ञ में शामिल हुए, लेकिन आकाश मार्ग से भविष्यवाणी होने के बाद वह लंका लौट गए। इधर, राजा जनक चिंतित हो उठे, तभी गुरु विश्वामित्र ने श्रीराम की ओर देखा और धनुष उठाने के लिए कहा। गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम ने धनुष को उठा लिया। इसके बाद सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाली। धनुष भंग होने की आवाज सुनकर परशुराम वहां पहुंचे तो श्रीराम ने उनका संशय दूर किया।
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रात के समय बिजली कटौती बंद करने की मांग
सरपंच मदन लाल, नायब सरपंच पवन सिंह, पंच हंसराज, पवन कुमार, सुरेश कुमार, रामलीला क्लब के प्रधान प्रेम सिंह, उप प्रधान रमेश, सदस्य जसवीर सिंह, जैमल सिंह आदि ने बताया कि सननघाट में जारी रामलीला के दौरान घंटों बिजली की अघोषित कटौती होती है। जिससे रामलीला सही ढंग से नहीं हो पाती। दर्शकों को भी परेशानी होती है। लिहाजा बिजली कटौती के समय को बदला जाए। रामलीला समाप्त होने के बाद बिजली काटी जाए।
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