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अपने हक के लिए सड़क पर उतरी आशा वर्कर्स
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कठुआ में रैली निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करती आशा कार्यकर्ता, संवाद।
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन के बैनर तले मंगलवार को सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर रोष मार्च निकाला। उन्होंने जिला सचिवालय के सामने पहुंचकर जोरदार नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। साथ ही लंबित मांगों का एक ज्ञापन उपराज्यपाल के नाम उपायुक्त को सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहीं आशा वर्कर्स यूनियन की सचिव अनीता राजपूत ने कहा कि वर्ष 2006 से आशा कार्यकर्ता अपनी सेवाएं दे रही हैं। और, आज तक उन्हें मात्र दो हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है। जिससे इस महंगाई के दौर में परिवार चलाना असंभव है। उन्होंने उपराज्यपाल से मांग की है कि आशा कार्यकर्ताओं को कम से कम पांच सौ रुपये दिहाड़ी दी जाए। साथ ही कोरोना संबंधित सेवाओं के लिए तीन सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वेतन दिया जाए।
सचिव ने कहा कि इसी प्रकार जो आशा कार्यकर्ता 50 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रही हैं, उन्हें दस हजार रुपये मासिक पेंशन के तौर पर दिया जाए। और, जिन कार्यकर्ताओं की कोरोना काल में सेवाएं देने के दौरान मृत्यु हुई है, उन्हें 50 लाख का बीमा लाभ दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस वक्त उन्हें आशा कार्यकर्ता के तौर पर लगाया गया था, उस वक्त उन्हें मात्र मां और बच्चे की देखभाल संबंधित सेवाओं के लिए रखा गया था। लेकिन, अब कोरोना काल संबंधित सभी सेवाएं जैसे टीकाकरण केंद्र, जनगणना, केंद्र प्रायोजित योजनाएं को लोगों तक पहुंचाना, आदि कार्य आशा कार्यकर्ताओं से कराए जा रहे हैं।
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वहीं, ट्रेड यूनियन के राजकुमार ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि आशा कार्यकर्ता को श्रमिक कानून के अधीन लाया जाए। जिसमें वेतन के साथ-साथ अन्य सेवाओं का भी उन्हें लाभ दिया जाए। कोरोना काल में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी सेवाएं दी हैं। लेकिन, मात्र दो हजार रुपये मासिक वेतन पर गुजारा नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार से सभी आशा कार्यकर्ताओं को उनके काम के आधार पर वेतन दिए जाने की मांग की।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहीं आशा वर्कर्स यूनियन की सचिव अनीता राजपूत ने कहा कि वर्ष 2006 से आशा कार्यकर्ता अपनी सेवाएं दे रही हैं। और, आज तक उन्हें मात्र दो हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है। जिससे इस महंगाई के दौर में परिवार चलाना असंभव है। उन्होंने उपराज्यपाल से मांग की है कि आशा कार्यकर्ताओं को कम से कम पांच सौ रुपये दिहाड़ी दी जाए। साथ ही कोरोना संबंधित सेवाओं के लिए तीन सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वेतन दिया जाए।
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सचिव ने कहा कि इसी प्रकार जो आशा कार्यकर्ता 50 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रही हैं, उन्हें दस हजार रुपये मासिक पेंशन के तौर पर दिया जाए। और, जिन कार्यकर्ताओं की कोरोना काल में सेवाएं देने के दौरान मृत्यु हुई है, उन्हें 50 लाख का बीमा लाभ दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस वक्त उन्हें आशा कार्यकर्ता के तौर पर लगाया गया था, उस वक्त उन्हें मात्र मां और बच्चे की देखभाल संबंधित सेवाओं के लिए रखा गया था। लेकिन, अब कोरोना काल संबंधित सभी सेवाएं जैसे टीकाकरण केंद्र, जनगणना, केंद्र प्रायोजित योजनाएं को लोगों तक पहुंचाना, आदि कार्य आशा कार्यकर्ताओं से कराए जा रहे हैं।
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वहीं, ट्रेड यूनियन के राजकुमार ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि आशा कार्यकर्ता को श्रमिक कानून के अधीन लाया जाए। जिसमें वेतन के साथ-साथ अन्य सेवाओं का भी उन्हें लाभ दिया जाए। कोरोना काल में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी सेवाएं दी हैं। लेकिन, मात्र दो हजार रुपये मासिक वेतन पर गुजारा नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार से सभी आशा कार्यकर्ताओं को उनके काम के आधार पर वेतन दिए जाने की मांग की।