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मछुआरों ने मांगी मछली पकड़ने की अनुमति
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अपनी समस्याओं की जानकारी देते मछुआरे, संवाद।
- फोटो : KATHUA
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बसोहली। एक तरफ सरकार रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बसोहली क्षेत्र में मछुआरों का रोजगार खत्म हो चुका है। यह सभी मछुआरे रंजीत सागर झील में मछली पकड़ने का काम करते हैं। 80 मछुआरों के साथ उनके परिवार के करीब छह सौ सदस्य जुड़े हैं, जिनका भरण पोषण इसी पर निर्भर है।
मौजूदा समय में मत्स्य विभाग ने रंजीत सागर झील में मछली पकड़ने पर रोक लगा दी है। क्योंकि, विभाग का टेंडर से संबंधित कोई कार्य अटका है। यह जानकारी बसोहली क्षेत्र में काम करने वाले मछुआरों ने एक पत्रकार वार्ता के जरिए दी।
मछुआरों में शामिल तारिक हुसैन, मंगलू राम, नेक मोहम्मद, मोहम्मद शफी, शौकत अली, किशोर सिंह, तालिब हुसैन, आदि ने बताया कि रंजीत सागर झील से पंजाब, हिमाचल, जम्मू कश्मीर, आदि का हिस्सा लगता है। पंजाब और हिमाचल के मछुआरे रंजीत सागर झील की अपनी-अपनी हदों में मछली पकड़ने का काम कर रहे हैं। लेकिन, जम्मू-कश्मीर के हिस्से में रोक लगा दी गई है। यहां मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिसकी वजह से करीब चार माह से मछुआरों का काम बंद पड़ा है। वह बेरोजगार हो गए हैं। पिछले साल 20 मार्च से कोरोना महामारी के चलते तीन महीने काम बंद रहा था। 1 जुलाई से 31 अगस्त तक ब्रीडिंग सीजन चल रहा था। वहीं, 11 जून से मछली पकड़ने पर विभाग ने प्रतिबंध लगा दिया।
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राकेश मेहरा ने कहा कि प्रशासन आत्मनिर्भर भारत की बात करता है। लेकिन, मछुआरों का रोजगार छीनकर कौन से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण किया जा रहा है? कोरोना काल में भी काम बंद रहा है। हर एक राज्य की सरकार ने मछुआरों को इस दौरान मदद दी है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के बसोहली में मत्स्य विभाग ने किसी किस्म की सहायता मछुआरों को नहीं दी।
उन्होंने कहा कि मत्स्य विभाग ने विभाग के अंतर्गत आने वाली किसी भी सरकारी स्कीम का लाभ, जाल व अन्य उपकरण भी मछुआरों को नहीं दिए हैं। मछुआरों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही मछुआरों को मछली पकड़ने की अनुमति नहीं दी गई, तो वे परिवार सहित सड़कों पर उतरकर विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करने को मजबूर हो जाएंगे। वहीं, एडीसी तिलक राज थापा से एक शिष्टमंडल ने भेंट कर मछुआरों को हो रही समस्याओं के बारे में अवगत कराया।
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मौजूदा समय में मत्स्य विभाग ने रंजीत सागर झील में मछली पकड़ने पर रोक लगा दी है। क्योंकि, विभाग का टेंडर से संबंधित कोई कार्य अटका है। यह जानकारी बसोहली क्षेत्र में काम करने वाले मछुआरों ने एक पत्रकार वार्ता के जरिए दी।
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मछुआरों में शामिल तारिक हुसैन, मंगलू राम, नेक मोहम्मद, मोहम्मद शफी, शौकत अली, किशोर सिंह, तालिब हुसैन, आदि ने बताया कि रंजीत सागर झील से पंजाब, हिमाचल, जम्मू कश्मीर, आदि का हिस्सा लगता है। पंजाब और हिमाचल के मछुआरे रंजीत सागर झील की अपनी-अपनी हदों में मछली पकड़ने का काम कर रहे हैं। लेकिन, जम्मू-कश्मीर के हिस्से में रोक लगा दी गई है। यहां मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिसकी वजह से करीब चार माह से मछुआरों का काम बंद पड़ा है। वह बेरोजगार हो गए हैं। पिछले साल 20 मार्च से कोरोना महामारी के चलते तीन महीने काम बंद रहा था। 1 जुलाई से 31 अगस्त तक ब्रीडिंग सीजन चल रहा था। वहीं, 11 जून से मछली पकड़ने पर विभाग ने प्रतिबंध लगा दिया।
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राकेश मेहरा ने कहा कि प्रशासन आत्मनिर्भर भारत की बात करता है। लेकिन, मछुआरों का रोजगार छीनकर कौन से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण किया जा रहा है? कोरोना काल में भी काम बंद रहा है। हर एक राज्य की सरकार ने मछुआरों को इस दौरान मदद दी है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के बसोहली में मत्स्य विभाग ने किसी किस्म की सहायता मछुआरों को नहीं दी।
उन्होंने कहा कि मत्स्य विभाग ने विभाग के अंतर्गत आने वाली किसी भी सरकारी स्कीम का लाभ, जाल व अन्य उपकरण भी मछुआरों को नहीं दिए हैं। मछुआरों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही मछुआरों को मछली पकड़ने की अनुमति नहीं दी गई, तो वे परिवार सहित सड़कों पर उतरकर विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करने को मजबूर हो जाएंगे। वहीं, एडीसी तिलक राज थापा से एक शिष्टमंडल ने भेंट कर मछुआरों को हो रही समस्याओं के बारे में अवगत कराया।