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Kathua News: प्रभावितों ने किया प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन
Mon, 10 Jul 2023 01:38 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 10 Jul 2023 01:38 AM IST
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लोगों का आरोप- प्रशासन के बाढ़ प्रबंध बंद कमरों में होने वाली बैठकों तक सीमित
कठुआ।
जिले में पिछले 24 घंटों से जारी भारी बारिश ने प्रशासन के बाढ़ प्रबंधन को पूरी तरह तबाह कर दिया है। बाढ़ से प्रभावितों ने जगह-जगह प्रदर्शन कर रोष जताया। लोगों का आरोप था कि प्रशासन के बाढ़ प्रबंध बंद कमरों में होने वाली बैठकों तक ही सीमित होते हैं। जिसके कारण हर साल आने वाली बाढ़ की रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नही होती है और लोग प्रभावित होते हैं।
सहार खड्ड में आई बाढ से प्रभावित शेरपुर के लोगों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। गांव के वरिष्ठ नागरिक व किसान नेता मास्टर दया राम शर्मा ने कहा कि सहार खड़्ड में आई बाढ़ से गांव के 20 किसानों की 400 कनाल जमीन धान की फसल के साथ पूरी तरह से बह गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 से पूर्व सहार खड्ड में पहाड़ों से आने वाला पानी जंगलोट के पास दो हिस्सों में बंट जाता था। इससे बाढ़ की स्थिति में किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता था। लेकिन खड्ड के एक हिस्से पर बांध बनाकर पानी रोकने से अब सारा का सारा पानी उनके गांव शेरपुर के साथ बहने वाली खड्ड से ही आता है। इस कारण पिछले 10 साल में गांव के किसान सैकडों कनाल भूमि खो चुके हैं। मगर प्रशासन ने किसानों के इस होने वाले नुकसान को रोकने के लिए आज तक कोई प्रबंध नहीं किया है। वहीं, एक्सप्रेस वे निर्माण कंपनी द्वारा पानी के बहाव में बदलाव किए जाने के कारण आज तो एक साथ करीब 400 कनाल भूमि तबाह हो चुकी है। वहीं गांव के निचले इलाके में रहने वाले गुज्जर समुदाय के कुछ कुल्लों को भी नुकसान हुआ है।
शर्मा ने कहा कि सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के सपने दिखा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को मजदूर बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। उन्होंने गांव में इस नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार एक्सप्रेस वे निर्माण कंपनी से किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग की। प्रदर्शन में रमेश चंद्र, नागरमल, सोम राज, नरेंद्र शर्मा, शिव कुमार, पूर्ण चंद, अमित कुमार व पुरुषोत्तम लाल शामिल रहे।
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उधर, मग्गर खड्ड से सटे लोअर जगतपुर के पास कटाव को रोकने के लिए लगाए गए क्रेट के बहने से जमीन का कटाव शुरू हो गया है। नुकसान की आंशका से घबराए लोगों ने बाढ़ नियंत्रण विभाग और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। लोगों का कहना है अगर अभी कटाव को नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों में वहां आसपास मौजूद पचास घरों को चपेट में ले लेगा।
प्रदर्शनकारियों में शामिल मुश्ताक अली ने बताया कि खड्ड के साथ जमीन के इस टुकड़े पर रहने वाले ज्यादातर परिवार मजदूरी कर परिवार का गुजर-बसर चलाते हैं। अगर भूमि का कटाव और होता है तो तिनका-तिनका जोड़कर बनाई गई इन परिवारों की गृहस्थी खराब हो सकती है। वहीं, शब्बीर अहमद ने बताया कि गत वर्ष की बाढ़ से क्रेट थोड़ा सा क्षतिग्रस्त हुआ था। इसे तब मरम्मत नहीं किया गया। इसका नतीजा यह रहा कि अब क्रेट तो पूरी तरह से बह गया है। वहीं, साथ लगती जमीन का कटाव भी शुरू हो गया है। उन्होंने वहां रहने वाले परिवारों का हवाला देते हुए प्रशासन से उनकी सुरक्षा का प्रबंध करने की मांग की। प्रदर्शन में हिना वानी, तालिब हसैन, जैतून बेगम, सुनीता देवी, चिंटू कुमार, राजकुमार, विमला देवी, कुलसुमा बेगम, खालिदा बेगम आदि शामिल रहे।
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वहीं, खोख्याल गांव में लोगों ने प्रदर्शन कर प्रशासन पर बाढ़ की रोकथाम करने में निष्फल रहने का आरोप लगाया है। लोगों ने कहा कि प्रशासन उनके गांव में भरे पानी को निकालने के लिए जल्द कोई प्रबंध करे अन्यथा लोगों का काफी नुकसान हो सकता है।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे आम नेता एसके भंडारी ने कहा कि जगह-जगह होने वाले निर्माण को सुरक्षित रखने के लिए पानी के बहाव के परंपरागत रास्ते बंद कर दिए गए हैं। इसका कोई अलग से प्रबंध नहीं किया गया है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से प्रभावितोें के नुकसान का मुआवजा देते हुए पानी की निकासी का जल्द प्रबंध किए जाने की मांग की। प्रदर्शन में देव राज, मनोज कुमार, बोध राज, कमल कुमार, बिशनदास मेहरा, थुडू राम, शीला देवी, राम प्यारी आदि मौजूद रहे।
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कठुआ।
जिले में पिछले 24 घंटों से जारी भारी बारिश ने प्रशासन के बाढ़ प्रबंधन को पूरी तरह तबाह कर दिया है। बाढ़ से प्रभावितों ने जगह-जगह प्रदर्शन कर रोष जताया। लोगों का आरोप था कि प्रशासन के बाढ़ प्रबंध बंद कमरों में होने वाली बैठकों तक ही सीमित होते हैं। जिसके कारण हर साल आने वाली बाढ़ की रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नही होती है और लोग प्रभावित होते हैं।
सहार खड्ड में आई बाढ से प्रभावित शेरपुर के लोगों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। गांव के वरिष्ठ नागरिक व किसान नेता मास्टर दया राम शर्मा ने कहा कि सहार खड़्ड में आई बाढ़ से गांव के 20 किसानों की 400 कनाल जमीन धान की फसल के साथ पूरी तरह से बह गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 से पूर्व सहार खड्ड में पहाड़ों से आने वाला पानी जंगलोट के पास दो हिस्सों में बंट जाता था। इससे बाढ़ की स्थिति में किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता था। लेकिन खड्ड के एक हिस्से पर बांध बनाकर पानी रोकने से अब सारा का सारा पानी उनके गांव शेरपुर के साथ बहने वाली खड्ड से ही आता है। इस कारण पिछले 10 साल में गांव के किसान सैकडों कनाल भूमि खो चुके हैं। मगर प्रशासन ने किसानों के इस होने वाले नुकसान को रोकने के लिए आज तक कोई प्रबंध नहीं किया है। वहीं, एक्सप्रेस वे निर्माण कंपनी द्वारा पानी के बहाव में बदलाव किए जाने के कारण आज तो एक साथ करीब 400 कनाल भूमि तबाह हो चुकी है। वहीं गांव के निचले इलाके में रहने वाले गुज्जर समुदाय के कुछ कुल्लों को भी नुकसान हुआ है।
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शर्मा ने कहा कि सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के सपने दिखा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को मजदूर बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। उन्होंने गांव में इस नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार एक्सप्रेस वे निर्माण कंपनी से किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग की। प्रदर्शन में रमेश चंद्र, नागरमल, सोम राज, नरेंद्र शर्मा, शिव कुमार, पूर्ण चंद, अमित कुमार व पुरुषोत्तम लाल शामिल रहे।
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उधर, मग्गर खड्ड से सटे लोअर जगतपुर के पास कटाव को रोकने के लिए लगाए गए क्रेट के बहने से जमीन का कटाव शुरू हो गया है। नुकसान की आंशका से घबराए लोगों ने बाढ़ नियंत्रण विभाग और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। लोगों का कहना है अगर अभी कटाव को नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों में वहां आसपास मौजूद पचास घरों को चपेट में ले लेगा।
प्रदर्शनकारियों में शामिल मुश्ताक अली ने बताया कि खड्ड के साथ जमीन के इस टुकड़े पर रहने वाले ज्यादातर परिवार मजदूरी कर परिवार का गुजर-बसर चलाते हैं। अगर भूमि का कटाव और होता है तो तिनका-तिनका जोड़कर बनाई गई इन परिवारों की गृहस्थी खराब हो सकती है। वहीं, शब्बीर अहमद ने बताया कि गत वर्ष की बाढ़ से क्रेट थोड़ा सा क्षतिग्रस्त हुआ था। इसे तब मरम्मत नहीं किया गया। इसका नतीजा यह रहा कि अब क्रेट तो पूरी तरह से बह गया है। वहीं, साथ लगती जमीन का कटाव भी शुरू हो गया है। उन्होंने वहां रहने वाले परिवारों का हवाला देते हुए प्रशासन से उनकी सुरक्षा का प्रबंध करने की मांग की। प्रदर्शन में हिना वानी, तालिब हसैन, जैतून बेगम, सुनीता देवी, चिंटू कुमार, राजकुमार, विमला देवी, कुलसुमा बेगम, खालिदा बेगम आदि शामिल रहे।
वहीं, खोख्याल गांव में लोगों ने प्रदर्शन कर प्रशासन पर बाढ़ की रोकथाम करने में निष्फल रहने का आरोप लगाया है। लोगों ने कहा कि प्रशासन उनके गांव में भरे पानी को निकालने के लिए जल्द कोई प्रबंध करे अन्यथा लोगों का काफी नुकसान हो सकता है।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे आम नेता एसके भंडारी ने कहा कि जगह-जगह होने वाले निर्माण को सुरक्षित रखने के लिए पानी के बहाव के परंपरागत रास्ते बंद कर दिए गए हैं। इसका कोई अलग से प्रबंध नहीं किया गया है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से प्रभावितोें के नुकसान का मुआवजा देते हुए पानी की निकासी का जल्द प्रबंध किए जाने की मांग की। प्रदर्शन में देव राज, मनोज कुमार, बोध राज, कमल कुमार, बिशनदास मेहरा, थुडू राम, शीला देवी, राम प्यारी आदि मौजूद रहे।