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जोडेयां पर्वत पर गूंज रहे मैया की जय जयकार
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जोडेयां माता के दरबार में भजन गायक लेखराज की गीत प्रस्तुत करते हुए। संवाद
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। इस बार जहां जिला के मैदानी इलाके के मंदिरों में दर्शनों के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के आंकड़े कम रहे हैं, वहीं दूर दराज के इलाकों में भक्तों की भीड़ से ही आस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है। शनिवार से ही भक्तों की संख्या में इजाफा दर्ज किया जा रहा था लेकिन मंगलवार को आस्था ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए। अचानक श्रद्धालुओं के आंकड़े में भारी इजाफा दर्ज किया गया। जोडेयां माता मंदिर में मंगलवार को 35 हजार से ज्यादा भक्तों ने दर्शन किए। देर शाम तक भक्तों का दर्शनों के लिए पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
पिछले तीन दिन में जोडेयां माता मंदिर में लगभग 70 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। सरकार की ओर से इंतजामों के अभाव में जोडेयां माता वेल्फेयर कमेटी ने श्रद्धालुओं की सुविधा का बीड़ा उठाया है। मंदिर परिसर में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए दिन रात लंगर की व्यवस्था की गई है, जिसके लिए नवरात्र से पहले ही राशन और लकड़ी की व्यवस्था की गई थी। कमेटी के डेढ़ सौ कार्यकर्ता निस्वार्थ भावना से मां के भक्तों की सेवा में जुटे हुए हैं। वहीं मां शीतला वेल्फेयर ट्रस्ट जोडेयां माता बांजल कमेटी मंदिर की देखरेख का काम कर रही है। लुढ़कते पारे के बीच खुले में रात बिताना मुनासिब नही है। ऐसे में वेल्फेयर कमेटी के सदस्यों की दिक्कतें भी कम नहीं है। बावजूद मां जोडेयां के प्रति उनकी श्रद्धा दिन रात श्रद्धालुओं की सेवा में उन्हें लगाए हुए है। जोडेयां माता वेल्फेयर कमेटी के अधीश सौंधी ने बताया कि हर साल हर संभव इंतजामों का प्रयास किया जाता है लेकिन श्रद्धालुओं के संख्या में लगातार हो रहे इजाफे में अब इंतजाम कम पड़ रहे हैं। उधर, मंगलवार को सुबह से ही माता आशापूर्णी मंदिर कठुआ, नगरी बाला सुंदरी, किले माता मंदिर लखनपुर, दौला माता मंदिर और शक्ति माता मंदिर बनी में भक्तों की कतारें लगी रहीं।
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नवरात्र में दन्नी गांव से रोजाना पहली किरण के साथ मंदिर प्रांगण में पहुंचती हैं मां शीतला
सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार आज भी अपने गृह निवास दन्नी से मां शीतला का पुजारी रोजाना सूरज की पहली किरण तक मां को पालकी में डालकर मंदिर लाते हैं। साथ में पारंपरिक बांसुरी और ढोलकी की थाप पर भक्त भी मां की इस यात्रा में शामिल होते है। सूर्य अस्त होने के साथ ही माता की निशान यात्रा गृह स्थान दन्नी की ओर रवाना हो जाती है। मां की इस निशान यात्रा में उनके आभूषणों और मुकुट को गृह स्थान में लाया जाता है।
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नंगे पांव चले आते हैं भक्त
पर्वत चोटी पर बसी मां शीतला को निहारने और आशीर्वाद पाने के लिए भक्त नंगे पांव और लगभग चौदह किलोमीटर का पैदल सफर कर पहुंच रहे हैं। यात्रा मार्ग पर कोट, बांजल, देहरी गलां, भवन और एक और पड़ाव पर भी लंगर की व्यवस्था की गई है।
दुर्गम मार्ग पत्थरों की चढ़ाई और संकरे पहाड़ीनुमा इलाके से होकर गुजरता है लेकिन जैसे-जैसे भक्त जोडेयां पर्वत की चोटी की ओर बढ़ते हैं नजारा बदलता जाता है। यात्रा का पहला पढ़ाव बांजल पार करने के साथ ही देहरी गलां में धुंध से घिरे पहाड़ और बादल के बीच से गुजरने का अनुभव श्रद्धालुओं को अलौकिक अनुभव का एहसास करवाता है। यहां मौसम पल-पल रंग बदलता रहता है।
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ऋयूषर से बांधतें हैं मन्नतें
ऐसी मान्यता है कि मां शीतला के मंदिर के साथ में एक ऋयूषर का वृक्ष अवश्य ही होता है। जोडेयां पर्वत पर मंदिर जहां साल के चार महीने बर्फ से ढ़का रहता है, वहीं मंदिर के आसपास वनस्पति भी नही है। ऐसे में ऋयूषर का एक वृक्ष मां के भक्तों की आस्था केंद्र है। मंदिर में मां शीतला का आशीर्वाद लेने के बाद भक्त इसी वृक्ष के साथ मन्नतें बांधते हैं। उल्लेखनीय है कि मां शीतला का यह मंदिर सिर्फ हिंदू धर्म के लोगों के लिए ही नहीं मुस्लिम और सिक्ख समुदाय के लोगों की आस्था का भी केंद्र है।
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भवन पर गूंज रही मैया की जय जयकार
जिले के पहाड़ी इलाकों में बने मंदिर इन दिनों माता के भजनों से गूंज रहे हैं। ऐसे में स्थानीय पहाड़ी गायक लेखराज वर्मा के भजन जोड़ेयां सहित आसपास पर्वतों पर बने मंदिरों में खूब गूंज रहे हैं। पथिक के भवन की ओर बढ़ते कदम इन सुंदर भेंटों को सुनकर थकान नहीं महसूस करते। ऊंचा भवन, ऋयूशर का पेड़ और मां जोड़ेयां का गुणगान सुनकर यात्रा मार्ग पर श्रद्धालु खुद ब खुद मंदिर की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं। दिन भर मंदिर के समक्ष भक्तों को मां की शक्ति और स्थल से जुड़ी गाथाओं का गुणगान वर्मा ने अपनी मधुर आवाज में गीत सुनाकर कर रहे हैं। लेखराज वर्मा के गाने पर भक्त झूमने को मजबूर हो उठे। इस मौके पर लंगर कमेटी के सदस्यों का उत्साह भी भजनों के साथ बढ़ता रहा और माता के दरबार में लगे सेवकों ने भी भजनों पर ताल से ताल मिलाई। माता जोड़ेयां लंगर कमेटी द्वारा देर शाम नवरात्र के दौरान रामायण का भी पर्दे पर मंचन किया जाता है।
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चंडिका माता मंदिर में किया गया कंजक पूजन
शेर कोटा स्थित चंडिका माता मंदिर में उमंगलवार को भक्त दर्शनों के लिए पहुंचे। इस दौरान महिला भक्तों ने सत्संग कर महामाई का गुणगान भी किया। शेर कोटला के इस प्रसिद्ध मंदिर में पहुंचे पूर्व मंत्री राजीव जसरोटिया ने महामाई से समस्त भारतवासियों की खुशहाली की कामना की। उन्होंने मंदिर में शीष नवाने के उपरांत कंजक पूजन करते हुए भक्तों में प्रसाद भी वितरित किया।
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पिछले तीन दिन में जोडेयां माता मंदिर में लगभग 70 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। सरकार की ओर से इंतजामों के अभाव में जोडेयां माता वेल्फेयर कमेटी ने श्रद्धालुओं की सुविधा का बीड़ा उठाया है। मंदिर परिसर में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए दिन रात लंगर की व्यवस्था की गई है, जिसके लिए नवरात्र से पहले ही राशन और लकड़ी की व्यवस्था की गई थी। कमेटी के डेढ़ सौ कार्यकर्ता निस्वार्थ भावना से मां के भक्तों की सेवा में जुटे हुए हैं। वहीं मां शीतला वेल्फेयर ट्रस्ट जोडेयां माता बांजल कमेटी मंदिर की देखरेख का काम कर रही है। लुढ़कते पारे के बीच खुले में रात बिताना मुनासिब नही है। ऐसे में वेल्फेयर कमेटी के सदस्यों की दिक्कतें भी कम नहीं है। बावजूद मां जोडेयां के प्रति उनकी श्रद्धा दिन रात श्रद्धालुओं की सेवा में उन्हें लगाए हुए है। जोडेयां माता वेल्फेयर कमेटी के अधीश सौंधी ने बताया कि हर साल हर संभव इंतजामों का प्रयास किया जाता है लेकिन श्रद्धालुओं के संख्या में लगातार हो रहे इजाफे में अब इंतजाम कम पड़ रहे हैं। उधर, मंगलवार को सुबह से ही माता आशापूर्णी मंदिर कठुआ, नगरी बाला सुंदरी, किले माता मंदिर लखनपुर, दौला माता मंदिर और शक्ति माता मंदिर बनी में भक्तों की कतारें लगी रहीं।
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नवरात्र में दन्नी गांव से रोजाना पहली किरण के साथ मंदिर प्रांगण में पहुंचती हैं मां शीतला
सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार आज भी अपने गृह निवास दन्नी से मां शीतला का पुजारी रोजाना सूरज की पहली किरण तक मां को पालकी में डालकर मंदिर लाते हैं। साथ में पारंपरिक बांसुरी और ढोलकी की थाप पर भक्त भी मां की इस यात्रा में शामिल होते है। सूर्य अस्त होने के साथ ही माता की निशान यात्रा गृह स्थान दन्नी की ओर रवाना हो जाती है। मां की इस निशान यात्रा में उनके आभूषणों और मुकुट को गृह स्थान में लाया जाता है।
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नंगे पांव चले आते हैं भक्त
पर्वत चोटी पर बसी मां शीतला को निहारने और आशीर्वाद पाने के लिए भक्त नंगे पांव और लगभग चौदह किलोमीटर का पैदल सफर कर पहुंच रहे हैं। यात्रा मार्ग पर कोट, बांजल, देहरी गलां, भवन और एक और पड़ाव पर भी लंगर की व्यवस्था की गई है।
दुर्गम मार्ग पत्थरों की चढ़ाई और संकरे पहाड़ीनुमा इलाके से होकर गुजरता है लेकिन जैसे-जैसे भक्त जोडेयां पर्वत की चोटी की ओर बढ़ते हैं नजारा बदलता जाता है। यात्रा का पहला पढ़ाव बांजल पार करने के साथ ही देहरी गलां में धुंध से घिरे पहाड़ और बादल के बीच से गुजरने का अनुभव श्रद्धालुओं को अलौकिक अनुभव का एहसास करवाता है। यहां मौसम पल-पल रंग बदलता रहता है।
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ऋयूषर से बांधतें हैं मन्नतें
ऐसी मान्यता है कि मां शीतला के मंदिर के साथ में एक ऋयूषर का वृक्ष अवश्य ही होता है। जोडेयां पर्वत पर मंदिर जहां साल के चार महीने बर्फ से ढ़का रहता है, वहीं मंदिर के आसपास वनस्पति भी नही है। ऐसे में ऋयूषर का एक वृक्ष मां के भक्तों की आस्था केंद्र है। मंदिर में मां शीतला का आशीर्वाद लेने के बाद भक्त इसी वृक्ष के साथ मन्नतें बांधते हैं। उल्लेखनीय है कि मां शीतला का यह मंदिर सिर्फ हिंदू धर्म के लोगों के लिए ही नहीं मुस्लिम और सिक्ख समुदाय के लोगों की आस्था का भी केंद्र है।
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भवन पर गूंज रही मैया की जय जयकार
जिले के पहाड़ी इलाकों में बने मंदिर इन दिनों माता के भजनों से गूंज रहे हैं। ऐसे में स्थानीय पहाड़ी गायक लेखराज वर्मा के भजन जोड़ेयां सहित आसपास पर्वतों पर बने मंदिरों में खूब गूंज रहे हैं। पथिक के भवन की ओर बढ़ते कदम इन सुंदर भेंटों को सुनकर थकान नहीं महसूस करते। ऊंचा भवन, ऋयूशर का पेड़ और मां जोड़ेयां का गुणगान सुनकर यात्रा मार्ग पर श्रद्धालु खुद ब खुद मंदिर की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं। दिन भर मंदिर के समक्ष भक्तों को मां की शक्ति और स्थल से जुड़ी गाथाओं का गुणगान वर्मा ने अपनी मधुर आवाज में गीत सुनाकर कर रहे हैं। लेखराज वर्मा के गाने पर भक्त झूमने को मजबूर हो उठे। इस मौके पर लंगर कमेटी के सदस्यों का उत्साह भी भजनों के साथ बढ़ता रहा और माता के दरबार में लगे सेवकों ने भी भजनों पर ताल से ताल मिलाई। माता जोड़ेयां लंगर कमेटी द्वारा देर शाम नवरात्र के दौरान रामायण का भी पर्दे पर मंचन किया जाता है।
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चंडिका माता मंदिर में किया गया कंजक पूजन
शेर कोटा स्थित चंडिका माता मंदिर में उमंगलवार को भक्त दर्शनों के लिए पहुंचे। इस दौरान महिला भक्तों ने सत्संग कर महामाई का गुणगान भी किया। शेर कोटला के इस प्रसिद्ध मंदिर में पहुंचे पूर्व मंत्री राजीव जसरोटिया ने महामाई से समस्त भारतवासियों की खुशहाली की कामना की। उन्होंने मंदिर में शीष नवाने के उपरांत कंजक पूजन करते हुए भक्तों में प्रसाद भी वितरित किया।

बनी स्थित जोड़ेया माता के दरबार में पहुंचे पुजारी और भक्त सूर्य नमस्कार करते हुए। संवाद- फोटो : KATHUA