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युवाओं को नशे के दुष्परिणाम के प्रति किया जागरूक
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कठुआ। युवाओं को नशे के दुष्परिणाम के प्रति जागरूक करने के लिए राजकीय डिग्री कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कॉलेज की एनएसएस इकाई द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. सुमनेश ने छात्रों से कहा कि पूरी दुनिया नशे की लत के खतरे का सामना कर रही है, जिसका व्यक्ति, परिवार और समाज के एक बड़े वर्ग पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है।
उन्होंने कहा कि देश में लाखों ड्रग उपयोगकर्ता हैं, जिनमें बड़ी संख्या में उपयोगकर्ता वयस्क आयु वर्ग में हैं। लिहाजा हमें नशा मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य जनता तक पहुंचना होगा। विभिन्न गतिविधियों जैसे जागरूकता सृजन कार्यक्रम, अस्पतालों और पुनर्वास केंद्रों में परामर्श और उपचार सुविधाओं आदि के माध्यम से मादक द्रव्यों के सेवन के बारे में जागरूकता फैलाना है। वहीं इस मौके पर एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी प्रो. मनमोहन सिंह ने स्वयंसेवकों को नशे के दुष्प्रभाव के बारे जागरूक करते हुए कहा कि सरकार ने युवाओं और अन्य लोगों को नशे से दूर करने और हमारे देश को नशा मुक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का कर्तव्य है कि वे खुद को नशे से दूर रखें और यही संदेश जन-जन तक पहुंचाएं। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुरेश शर्मा ने कहा कि नशामुक्त भारत अभियान के परिणाम बहुत उत्साहजनक रहे हैं और सरकार इस साल के अंत तक देश के 100 जिलों को परिभाषित मापदंडों के भीतर नशा मुक्त घोषित कर सकती है। एनएसएस स्वयंसेवक अभिषेक सिंह ने नशीले पदार्थों के खिलाफ प्रेरित करते हुए कहा कि किशोरों और युवा वयस्कों में नशीले पदार्थों के आदी होने की संभावना अधिक होती है, इसलिए यह युवाओं का कर्तव्य है कि वे इस तरह के खतरे का मुकाबला करने के लिए आगे आएं।
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उन्होंने कहा कि देश में लाखों ड्रग उपयोगकर्ता हैं, जिनमें बड़ी संख्या में उपयोगकर्ता वयस्क आयु वर्ग में हैं। लिहाजा हमें नशा मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य जनता तक पहुंचना होगा। विभिन्न गतिविधियों जैसे जागरूकता सृजन कार्यक्रम, अस्पतालों और पुनर्वास केंद्रों में परामर्श और उपचार सुविधाओं आदि के माध्यम से मादक द्रव्यों के सेवन के बारे में जागरूकता फैलाना है। वहीं इस मौके पर एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी प्रो. मनमोहन सिंह ने स्वयंसेवकों को नशे के दुष्प्रभाव के बारे जागरूक करते हुए कहा कि सरकार ने युवाओं और अन्य लोगों को नशे से दूर करने और हमारे देश को नशा मुक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का कर्तव्य है कि वे खुद को नशे से दूर रखें और यही संदेश जन-जन तक पहुंचाएं। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुरेश शर्मा ने कहा कि नशामुक्त भारत अभियान के परिणाम बहुत उत्साहजनक रहे हैं और सरकार इस साल के अंत तक देश के 100 जिलों को परिभाषित मापदंडों के भीतर नशा मुक्त घोषित कर सकती है। एनएसएस स्वयंसेवक अभिषेक सिंह ने नशीले पदार्थों के खिलाफ प्रेरित करते हुए कहा कि किशोरों और युवा वयस्कों में नशीले पदार्थों के आदी होने की संभावना अधिक होती है, इसलिए यह युवाओं का कर्तव्य है कि वे इस तरह के खतरे का मुकाबला करने के लिए आगे आएं।
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