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Kathua News: 1.47 करोड़ खर्च किए, तीन साल से बंद ई-स्मार्ट लाइब्रेरी
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हीरानगर। सीमावर्ती क्षेत्र हीरानगर के बच्चों को आधुनिक सुविधाओं के साथ पढ़ाई करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से बनाई गई ई-स्मार्ट लाइब्रेरी पिछले तीन वर्षों से शुरू होने का इंतजार कर रही है। करीब 1.47 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई इस लाइब्रेरी के अब तक बच्चों के लिए उपयोग में नहीं आने से स्थानीय युवाओं में रोष है। युवाओं का कहना है कि जिस सुविधा का लाभ क्षेत्र के विद्यार्थियों को मिलना चाहिए था, वह आज भी बंद पड़ी है। इतना ही नहीं देखरेख और उपयोग के अभाव में इमारत की हालत भी खराब होने लगी है और उसे मरम्मत की जरूरत महसूस हो रही है।
इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को हीरानगर के युवाओं का एक प्रतिनिधिमंडल भवानी सिंह और अनिरुद्ध सरगोत्र की अध्यक्षता में सीडीपीओ हीरानगर प्रिया लक्ष्मी से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने लाइब्रेरी को जल्द शुरू करवाने की मांग उठाते हुए सवाल किया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह सुविधा अब तक विद्यार्थियों के काम क्यों नहीं आ सकी है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल युवा भवानी सिंह ने कहा कि ई-स्मार्ट लाइब्रेरी का निर्माण लगभग तीन वर्ष पहले 1.47 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। इसका उद्देश्य हीरानगर के बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाना था लेकिन लंबे समय से लाइब्रेरी पर ताला लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी में कंप्यूटर और डेस्क जैसी सुविधाएं पहुंच चुकी हैं, जबकि पुस्तकों की व्यवस्था अभी लंबित है। इसके बावजूद केंद्र शुरू नहीं होने से उपलब्ध संसाधन भी इस्तेमाल में नहीं आ पा रहे हैं।
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भवानी सिंह ने कहा कि युवाओं ने सीडीपीओ के समक्ष अपनी बात रखते हुए लाइब्रेरी को जल्द चालू करने की मांग की है। उनके अनुसार यह इमारत पहले लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन थी और लगभग डेढ़ वर्ष पहले इसे नगर समिति को हस्तांतरित किया गया था। इसके बाद भी लाइब्रेरी शुरू नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि हीरानगर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय की सुविधा बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बच्चों के लिए बनाई गई इमारत ही उनके काम नहीं आ रही, तो इस पर खर्च की गई राशि का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा। उन्होंने संबंधित विभागों और प्रशासन से मांग की कि इमारत की मरम्मत करवाकर लाइब्रेरी को बिना अनावश्यक देरी के शुरू किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।
ई-नीलामी की प्रक्रिया के बाद शुरू होगी लाइब्रेरी : सीडीपीओ
सीडीपीओ हीरानगर प्रिया लक्ष्मी ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं ने सरकारी स्मार्ट लाइब्रेरी को जल्द सक्रिय करने का मुद्दा उनके समक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि केंद्र को शुरू करवाने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। इसके संचालन के लिए ई-नीलामी की मंजूरी मिलने का इंतजार है। मंजूरी प्राप्त होने के बाद ई-नीलामी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और सफल बोलीदाता लाइब्रेरी का प्रबंधन संभालेगा।
सीडीपीओ ने कहा कि विभाग भी इस मामले को देख रहा है और प्रयास है कि लाइब्रेरी को जल्द से जल्द सक्रिय किया जाए। अब देखना होगा कि संबंधित प्रक्रिया कब पूरी होती है और हीरानगर के विद्यार्थियों को करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस सुविधा का लाभ कब मिल पाता है।
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इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को हीरानगर के युवाओं का एक प्रतिनिधिमंडल भवानी सिंह और अनिरुद्ध सरगोत्र की अध्यक्षता में सीडीपीओ हीरानगर प्रिया लक्ष्मी से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने लाइब्रेरी को जल्द शुरू करवाने की मांग उठाते हुए सवाल किया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह सुविधा अब तक विद्यार्थियों के काम क्यों नहीं आ सकी है।
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प्रतिनिधिमंडल में शामिल युवा भवानी सिंह ने कहा कि ई-स्मार्ट लाइब्रेरी का निर्माण लगभग तीन वर्ष पहले 1.47 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। इसका उद्देश्य हीरानगर के बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाना था लेकिन लंबे समय से लाइब्रेरी पर ताला लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी में कंप्यूटर और डेस्क जैसी सुविधाएं पहुंच चुकी हैं, जबकि पुस्तकों की व्यवस्था अभी लंबित है। इसके बावजूद केंद्र शुरू नहीं होने से उपलब्ध संसाधन भी इस्तेमाल में नहीं आ पा रहे हैं।
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भवानी सिंह ने कहा कि युवाओं ने सीडीपीओ के समक्ष अपनी बात रखते हुए लाइब्रेरी को जल्द चालू करने की मांग की है। उनके अनुसार यह इमारत पहले लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन थी और लगभग डेढ़ वर्ष पहले इसे नगर समिति को हस्तांतरित किया गया था। इसके बाद भी लाइब्रेरी शुरू नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि हीरानगर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय की सुविधा बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बच्चों के लिए बनाई गई इमारत ही उनके काम नहीं आ रही, तो इस पर खर्च की गई राशि का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा। उन्होंने संबंधित विभागों और प्रशासन से मांग की कि इमारत की मरम्मत करवाकर लाइब्रेरी को बिना अनावश्यक देरी के शुरू किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।
ई-नीलामी की प्रक्रिया के बाद शुरू होगी लाइब्रेरी : सीडीपीओ
सीडीपीओ हीरानगर प्रिया लक्ष्मी ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं ने सरकारी स्मार्ट लाइब्रेरी को जल्द सक्रिय करने का मुद्दा उनके समक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि केंद्र को शुरू करवाने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। इसके संचालन के लिए ई-नीलामी की मंजूरी मिलने का इंतजार है। मंजूरी प्राप्त होने के बाद ई-नीलामी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और सफल बोलीदाता लाइब्रेरी का प्रबंधन संभालेगा।
सीडीपीओ ने कहा कि विभाग भी इस मामले को देख रहा है और प्रयास है कि लाइब्रेरी को जल्द से जल्द सक्रिय किया जाए। अब देखना होगा कि संबंधित प्रक्रिया कब पूरी होती है और हीरानगर के विद्यार्थियों को करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस सुविधा का लाभ कब मिल पाता है।