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Kathua News: किसानों को स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट की खेती करने की दी सलाह
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कठुआ। किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए एक दिवसीय वैकल्पिक कृषि प्रणाली कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण और सरकार की कृषि योजनाओं की जानकारी दी गई। इसका आयोजन मुख्य कृषि अधिकारी कार्यालय में होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एचएडीपी) के प्रोजेक्ट-16 के तहत किया गया।
कार्यशाला में उपायुक्त राजेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कृषि एवं संबंधित विभागों की ओर से लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण किया और किसानों को पारंपरिक खेती के साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। डीसी ने कहा कि किसान अपनी जमीन और स्थानीय जलवायु के अनुसार स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसी अधिक मूल्य वाली फसलों की खेती पर भी विचार करें। उन्होंने कृषि एवं संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए, ताकि पात्र किसानों को इनका लाभ मिल सके। डीसी ने मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल करने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यशालाओं की सफलता तभी है, जब इनका लाभ खेतों तक पहुंचे और किसानों की आय में वास्तविक सुधार हो। इस दौरान डीसी ने मिट्टी की जांच के बाद पांच किसानों चमन लाल शर्मा, देविंद्र सिंह जसरोटिया, महेंद्र नाथ शर्मा, रीता देवी और अंजना देवी को मृदा स्वास्थ्य हेल्थ कार्ड भी वितरित किए। मुख्य कृषि अधिकारी जितेंद्र कुमार खजूरिया ने प्रोजेक्ट-16 की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों के कल्याण के लिए सात क्लस्टर काम कर रहे हैं। इसके अलावा 92 वर्मी कंपोस्ट इकाइयां और दो व्यावसायिक वर्मी कंपोस्ट प्लांट स्थापित किए गए हैं। किसानों को वैज्ञानिक खेती के तरीके सिखाने के लिए फार्म फील्ड स्कूल भी संचालित किए जा रहे हैं। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. विशाल महाजन ने भी आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
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कार्यशाला में उपायुक्त राजेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कृषि एवं संबंधित विभागों की ओर से लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण किया और किसानों को पारंपरिक खेती के साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। डीसी ने कहा कि किसान अपनी जमीन और स्थानीय जलवायु के अनुसार स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसी अधिक मूल्य वाली फसलों की खेती पर भी विचार करें। उन्होंने कृषि एवं संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए, ताकि पात्र किसानों को इनका लाभ मिल सके। डीसी ने मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल करने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यशालाओं की सफलता तभी है, जब इनका लाभ खेतों तक पहुंचे और किसानों की आय में वास्तविक सुधार हो। इस दौरान डीसी ने मिट्टी की जांच के बाद पांच किसानों चमन लाल शर्मा, देविंद्र सिंह जसरोटिया, महेंद्र नाथ शर्मा, रीता देवी और अंजना देवी को मृदा स्वास्थ्य हेल्थ कार्ड भी वितरित किए। मुख्य कृषि अधिकारी जितेंद्र कुमार खजूरिया ने प्रोजेक्ट-16 की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों के कल्याण के लिए सात क्लस्टर काम कर रहे हैं। इसके अलावा 92 वर्मी कंपोस्ट इकाइयां और दो व्यावसायिक वर्मी कंपोस्ट प्लांट स्थापित किए गए हैं। किसानों को वैज्ञानिक खेती के तरीके सिखाने के लिए फार्म फील्ड स्कूल भी संचालित किए जा रहे हैं। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. विशाल महाजन ने भी आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
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