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Kathua News: महिला से अभद्र व्यवहार मामले में आरोपी दंपती बरी
Sat, 24 Jan 2026 01:51 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 24 Jan 2026 01:51 AM IST
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कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने घर में घुस कर मारपीट, जान से मारने की धमकी देने और महिला से अभद्र व्यवहार मामले में आरोपी दंपती को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार, अदालत ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास और आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत न मिलने के कारण उन्हें बरी किया है।
कोर्ट में दायर चालान के अनुसार, मामला 4 नवंबर 2015 का शहर के कालीबड़ी इलाके का है। जिसमें शिकायतकर्ता महिला शशि बाला ने पुलिस को बताया कि घटना के दिन शाम लगभग 6 बजे आरोपी विजय कुमार और उसकी पत्नी उसके घर में घुस कर उसके साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी दी थी। इस दौरान आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ अभद्र व्यवहार भी किया। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ आरपीसी की धारा 452, 354, 323, 504 और 506 के तहत, जबकि उसकी पत्नी के खिलाफ 452, 323, 504 और 506 मामला दर्ज कर चालान को 14 दिसंबर 2015 को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप 4 मार्च 2016 को तय किए गए। जिसमें दंपती ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाए जाने की अपील की। इसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को मामले में गवाह पेश करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट गवाही के दौरान शिकायतकर्ता ने बताया कि घटना घर के भीतर नहीं बल्कि गली में हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि विजय कुमार ने केवल गाली-गलौज और धमकी दी थी। उन्होंने स्वीकार किया कि शिकायत में लिखी गई बातें पूरी तरह सही नहीं हैं। वहीं, शिकायतकर्ता के पति ने घटना का दिन गलत बताया। शिकायतकर्ता के पति ने बताया कि जब वह घर लौटे तो पत्नी के कपड़े फटे हुए थे लेकिन शिकायतकर्ता ने अदालत में इस तथ्य का उल्लेख नहीं किया और पुलिस ने भी ऐसे कपड़े जब्त नहीं किए थे। इसके बाद अदालत ने गवाहों की गवाही और रिकार्ड में तथ्यों का अवलोकन कर पाया कि अभियोजन पक्ष संदेह के परे आरोपियों के अपराध को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। इसके बाद अदालत ने उनके जमानती व व्यक्तिगत बांड को खारिज कर आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।
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कोर्ट में दायर चालान के अनुसार, मामला 4 नवंबर 2015 का शहर के कालीबड़ी इलाके का है। जिसमें शिकायतकर्ता महिला शशि बाला ने पुलिस को बताया कि घटना के दिन शाम लगभग 6 बजे आरोपी विजय कुमार और उसकी पत्नी उसके घर में घुस कर उसके साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी दी थी। इस दौरान आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ अभद्र व्यवहार भी किया। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ आरपीसी की धारा 452, 354, 323, 504 और 506 के तहत, जबकि उसकी पत्नी के खिलाफ 452, 323, 504 और 506 मामला दर्ज कर चालान को 14 दिसंबर 2015 को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप 4 मार्च 2016 को तय किए गए। जिसमें दंपती ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाए जाने की अपील की। इसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को मामले में गवाह पेश करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट गवाही के दौरान शिकायतकर्ता ने बताया कि घटना घर के भीतर नहीं बल्कि गली में हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि विजय कुमार ने केवल गाली-गलौज और धमकी दी थी। उन्होंने स्वीकार किया कि शिकायत में लिखी गई बातें पूरी तरह सही नहीं हैं। वहीं, शिकायतकर्ता के पति ने घटना का दिन गलत बताया। शिकायतकर्ता के पति ने बताया कि जब वह घर लौटे तो पत्नी के कपड़े फटे हुए थे लेकिन शिकायतकर्ता ने अदालत में इस तथ्य का उल्लेख नहीं किया और पुलिस ने भी ऐसे कपड़े जब्त नहीं किए थे। इसके बाद अदालत ने गवाहों की गवाही और रिकार्ड में तथ्यों का अवलोकन कर पाया कि अभियोजन पक्ष संदेह के परे आरोपियों के अपराध को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। इसके बाद अदालत ने उनके जमानती व व्यक्तिगत बांड को खारिज कर आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।
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