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Kathua News: मुलाजिम कम, निजीकरण की राह तलाश रहा बिजली विभाग

Tue, 06 May 2025 01:25 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Tue, 06 May 2025 01:25 AM IST
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Electricity department is looking for a way to privatize
सबस्टेशनों के संचालन, चौबीस घंटे गश्त और आपातकालीन मरम्मत की जिम्मेदारी जल्द होगी निजी हाथों में
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ट्रायल के तौर पर कठुआ और हीरानगर सब डिवीजन में 40 निजी लाइनमैन और हेल्परों की ली जाएंगी सेवाएं
3500 से ज्यादा ट्रांसफार्मरों के लिए 100 कर्मचारियों की जरूरत



कठुआ। बिजली विभाग में कर्मचारियों की कमी के चलते अब निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। विभाग जल्द ही सबस्टेशनों के संचालन, चौबीस घंटे गश्त और आपातकालीन मरम्मत की जिम्मेदारी निजी हाथों में सौंपने जा रहा है।
जिले में ट्रायल के तौर पर हीरानगर और कठुआ सब डिवीजन से इसकी शुरुआत की जा रही है। आउटसोर्सिंग के जरिए जिले में पहली बार 40 लाइनमैन और हेल्पर बिजली विभाग की सेवाओं का हिस्सा बनेंगे। दरअसल, बिजली विभाग वर्तमान में हीरानगर और कठुआ सब डिवीजन में लगभग 1400 सर्किट किलोमीटर हाई टेंशन लाइन और 3500 सर्किट किलोमीटर लो टेंशन लाइनों का संचालन कर रहा है। आए दिन इन लाइनों में फाॅल्ट आने के बाद कर्मचारियों के अभाव में बिजली बहाली में कई घंटे और दिन भी लग जाते हैं। विभाग के पास इन दो सब डिवीजन में ही 3500 ट्रांसफार्मर हैं।
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विभाग के पास उपलब्ध श्रम शक्ति की बात की जाए तो ज्यादातर डेलीवेज लाइनमैन का काम कर रहे हैं। लंबे समय से इस काम को अंजाम देने के चलते उनके पास इसका अनुभव है। धीरे-धीरे इनमें से कई बिना नियमित हुए ही सेवानिवृत्त हो गए ताे वहीं नियमित कर्मचारियों की कमी भी विभाग को खल रही है। ऐसे में विभाग ने अब आउटसोर्सिंग के नए फार्मूले पर काम शुरू किया है।
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1983 के बाद नहीं बढ़े पद, 2000 गुना बढ़ गया बिजली ढांचा
- हर महीने सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारी

दरअसल प्रदेश में भले ही बिजली विभाग में अनुछेद 370 के बाद बड़ा फेरदबल करते हुए इसे कॉर्पोरेशन में बदल दिया गया हो, लेकिन पिछले 40 साल से विभाग में नए पद सृजित नहीं हो पाए हैं। न ही इसके लिए पिछले छह साल में कोई कवायद हुई। सूत्रों के अनुसार विभाग 1983 के मंजूर हुए पदों के हिसाब से ही चल रहा है। 2016 के बाद से निम्न पदों पर कोई स्थायी या अस्थायी नियुक्ति भी नहीं हुई है। उधर, विभाग का बिजली ढांचा दो हजार गुना तक बढ़ गया है। इस अवधि में दर्जनों योजनाएं, पंच वर्षीय योजनाओं से गांव, मोहल्ले और शहर की गलियां तक रोशन हुईं, लेकिन इन योजनाओं में मैनपॉवर, कार्यशक्ति को लेकर कोई भी प्रावधान नहीं था। संवाद

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हीरानगर और कठुआ सब डिवीजन में लगभग 100 लाइनमैन की जरूरत है। यहां ट्रायल के तौर पर आउटसोर्सिंग के जरिए 40 के लगभग लाइनमैन और हेल्पर रखे जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे गर्मी के सीजन में लोगों की दिक्कतों को कम किया जा सकेगा। रिस्पांस समय कम होगा और बिजली ढांचे में नुकसान को जल्द से जल्द ठीक किया जा सकेगा।




- सुरेंद्र कुमार, कार्यकारी अभियंता, बिजली विभाग कठुआ
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