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एक्सप्रेस-वे में आ रही भूमि का मुआवजा बढ़ाए सरकार
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कठुआ। निर्माणाधीन दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे से प्रभावित हो रहे हाईवे के किनारे बसे लोगों ने सरकार से मुआवजा बढ़ाने की मांग की है। वीरवार को दियालाचक के लोगों ने एक्सप्रेस-वे में आ रही उनकी जमीनों का मुआवजा दिलाने के लिए डीसी राहुल पांडे से मुलाकात की।
दीपक जसरोटिया ने कहा कि एक्सप्रेस-वे के निर्माण के कारण कस्बे में 60 के करीब दुकानें और आवासीय ढांचे आ रहे हैं, जिनका सरकार द्वारा कृषि योग्य भूमि मानकर मुआवजा दिया जा रहा है, इनकी कीमत करोड़ों में है। लोगों ने कहा कि 30 से 25 वर्ष पुराने ढांचों के बारे में राजस्व विभाग का तर्क है कि उक्त भूखंड राजस्व रिकॉर्ड में कृषि योग्य भूमि के तौर पर दर्ज है। लिहाजा इसका मुआवजा भी इसी तरह से तय हो रहा है, जबकि तीन दशक पहले हुए निर्माण के बाद भूमि के प्रारूप में बदलाव करना भी राजस्व विभाग की ही जिम्मेदारी थी। विभाग की इस लापरवाही के कारण कस्बे में रहने वाले और यहां रोजगार करने वाले लोगों के सामने बड़ा संकट आ गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कस्बे की जिस दुकान की कीमत 50 लाख रुपये है, उसके बदले में चार से पांच लाख रुपये दिए जा रहे हैं। लोगों ने कर्ज लेकर दुकानें बनाईं हैं। अगर ये एक्सप्रेस-वे में आ गईं तो कर्ज की अदायगी कैसे कर पाएंगे। प्रभावितों ने पुनर्वास के लिए हाईवे से सटी कोई अन्य भूमि देने की भी मांग की।
डीसी ने समस्या सुनने के बाद कहा कि निर्माण में आने वाली भूमि का मुआवजा हाईवे अथॉरिटी द्वारा वितरित किया जा रहा है। इसमें राजस्व विभाग कुछ नहीं कर सकता, लेकिन लोगों की मांग व समस्या को देखते हुए वह एक बार हाईवे अथॉरिटी से बात करेंगे। मौके पर नरेश वर्मा, नारायण दत्त, जिलक राज, राम कृष्ण, मुल्ख राज, कुलदीप कुमार, तीर्थ राम, गणेश दत्त आदि उपस्थित रहे।
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दीपक जसरोटिया ने कहा कि एक्सप्रेस-वे के निर्माण के कारण कस्बे में 60 के करीब दुकानें और आवासीय ढांचे आ रहे हैं, जिनका सरकार द्वारा कृषि योग्य भूमि मानकर मुआवजा दिया जा रहा है, इनकी कीमत करोड़ों में है। लोगों ने कहा कि 30 से 25 वर्ष पुराने ढांचों के बारे में राजस्व विभाग का तर्क है कि उक्त भूखंड राजस्व रिकॉर्ड में कृषि योग्य भूमि के तौर पर दर्ज है। लिहाजा इसका मुआवजा भी इसी तरह से तय हो रहा है, जबकि तीन दशक पहले हुए निर्माण के बाद भूमि के प्रारूप में बदलाव करना भी राजस्व विभाग की ही जिम्मेदारी थी। विभाग की इस लापरवाही के कारण कस्बे में रहने वाले और यहां रोजगार करने वाले लोगों के सामने बड़ा संकट आ गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कस्बे की जिस दुकान की कीमत 50 लाख रुपये है, उसके बदले में चार से पांच लाख रुपये दिए जा रहे हैं। लोगों ने कर्ज लेकर दुकानें बनाईं हैं। अगर ये एक्सप्रेस-वे में आ गईं तो कर्ज की अदायगी कैसे कर पाएंगे। प्रभावितों ने पुनर्वास के लिए हाईवे से सटी कोई अन्य भूमि देने की भी मांग की।
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डीसी ने समस्या सुनने के बाद कहा कि निर्माण में आने वाली भूमि का मुआवजा हाईवे अथॉरिटी द्वारा वितरित किया जा रहा है। इसमें राजस्व विभाग कुछ नहीं कर सकता, लेकिन लोगों की मांग व समस्या को देखते हुए वह एक बार हाईवे अथॉरिटी से बात करेंगे। मौके पर नरेश वर्मा, नारायण दत्त, जिलक राज, राम कृष्ण, मुल्ख राज, कुलदीप कुमार, तीर्थ राम, गणेश दत्त आदि उपस्थित रहे।
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