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Kathua News: औद्योगिक इकाई में 23 नाबालिगों से श्रम करवाने का मामला, पुलिस ने सीडब्ल्यूसी से मांगा रिकॉर्ड
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। गोविंदसर स्थित एक औद्योगिक इकाई में बच्चों से श्रम करवाने के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मामले में शिकायतकर्ता चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। वहीं, पुलिस और श्रम विभाग मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच में जुटे हैं। पुलिस अदालत में चालान पेश करने की प्रक्रिया के तहत औद्योगिक इकाई के संबंधित पदाधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी का पता लगाने में जुटी है।
गौरतलब है कि गत 29 सितंबर को जिला प्रशासन के आदेश पर विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम ने बीआर एग्रो फैक्टरी में छापा मारकर 18 लड़कियों और 10 लड़कों सहित कुल 28 बच्चों को रेस्क्यू किया था। इसके बाद बच्चों की मेडिकल जांच करवाई गई, जिसमें 28 में से 23 बच्चों को नाबालिग पाया गया। इस खुलासे के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया और संबंधित विभागों ने कार्रवाई शुरू की। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने जांच के बाद गत 6 अक्टूबर को औद्योगिक इकाई के खिलाफ किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 79 के तहत मामला दर्ज किया था। अब पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और बच्चों के संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच कर रही है। सीडब्ल्यूसी से रिकॉर्ड तलब किए जाने को इसी जांच प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। इसके साथ ही श्रम विभाग भी मामले की पड़ताल कर रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फैक्टरी में बच्चों से कथित तौर पर श्रम करवाने के मामले में किन पदाधिकारियों की क्या भूमिका रही। जांच के आधार पर आरोपियों की जिम्मेदारी निर्धारित करने और अदालत में चालान पेश करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। मामले में 23 बच्चों के नाबालिग पाए जाने के बाद अब जांच का केंद्र बच्चों से श्रम करवाने की परिस्थितियों, संबंधित दस्तावेजों और औद्योगिक इकाई के जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर है।
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कठुआ। गोविंदसर स्थित एक औद्योगिक इकाई में बच्चों से श्रम करवाने के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मामले में शिकायतकर्ता चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। वहीं, पुलिस और श्रम विभाग मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच में जुटे हैं। पुलिस अदालत में चालान पेश करने की प्रक्रिया के तहत औद्योगिक इकाई के संबंधित पदाधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी का पता लगाने में जुटी है।
गौरतलब है कि गत 29 सितंबर को जिला प्रशासन के आदेश पर विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम ने बीआर एग्रो फैक्टरी में छापा मारकर 18 लड़कियों और 10 लड़कों सहित कुल 28 बच्चों को रेस्क्यू किया था। इसके बाद बच्चों की मेडिकल जांच करवाई गई, जिसमें 28 में से 23 बच्चों को नाबालिग पाया गया। इस खुलासे के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया और संबंधित विभागों ने कार्रवाई शुरू की। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने जांच के बाद गत 6 अक्टूबर को औद्योगिक इकाई के खिलाफ किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 79 के तहत मामला दर्ज किया था। अब पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और बच्चों के संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच कर रही है। सीडब्ल्यूसी से रिकॉर्ड तलब किए जाने को इसी जांच प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। इसके साथ ही श्रम विभाग भी मामले की पड़ताल कर रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फैक्टरी में बच्चों से कथित तौर पर श्रम करवाने के मामले में किन पदाधिकारियों की क्या भूमिका रही। जांच के आधार पर आरोपियों की जिम्मेदारी निर्धारित करने और अदालत में चालान पेश करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। मामले में 23 बच्चों के नाबालिग पाए जाने के बाद अब जांच का केंद्र बच्चों से श्रम करवाने की परिस्थितियों, संबंधित दस्तावेजों और औद्योगिक इकाई के जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर है।
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