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चूड़ामणि संस्कृत संस्थान में 101 यज्ञोपवीत संस्कार के उपलब्ध में कार्यक्रम का आयोजन
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ोज्ञोपवीत संस्कार पूर्ण होने के उपरांत खुशी मनाते बटुक व पुरोहित। संवाद
- फोटो : KATHUA
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बसोहली। चूड़ामणि संस्कृत संस्थान में शुक्रवार को 101 यज्ञोपवीत संस्कार के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जम्मू, कठुआ, किश्तवाड़, बनी, डोडा, बिलावर सहित हिमाचल प्रदेश से आए बटुको ने यज्ञोपवीत संस्कार में भाग लिया।
हल्दी उबटन की अलौकिक प्रक्रिया के साथ वैदिक विधि से समस्त कार्यक्रम को उपस्थित आचार्य महेंद्र उपाध्याय और उनकी टीम के कुशल नेतृत्व में संचालित किया गया इस कार्यक्रम में डायरेक्टर स्पेशल सर्विस फोर्सेस शक्ति कुमार पाठक, इंडस्ट्रियल एस्टेट कठुआ दविंदर वर्मा, एडीसी बसोहली सहित नगर कमेटी अध्यक्ष भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वैदिक और मंत्रोच्चारण के साथ हवन किया गया। उपस्थित वक्ताओं ने यगोपवित संस्कार पर रोशनी डालते हुए इसकी विस्तार पूर्वक जानकारी उपस्थित को दी। चूड़ामणि संस्कृत संस्थान के प्राचार्य ने कहा कि मानव जीवन में स्वर्गीय विकास में संस्कारों का महत्वपूर्ण स्थान है हम उन संस्कारों को अपनाएं जिन की नींव पर हमारी संस्कृति खड़ी है। उनमें से यज्ञोपवीत भी एक संस्कार है इसके निर्माण में विशेष विधि अपनाई गई है। इस विषय को समझना चाहिए। सनातन धर्म और संस्कृति का आधार इसकी आध्यात्मिकता और जो पवित्र संस्कारों में मार्जित आचार व्यवहार और सदव्रत पर टिकी है।
वहीं समापन पर रामलीला मैदान बसोहली से रैली निकाली गई जो वापिस चूड़ामणि संस्कृत संस्थान पहुंचकर संपन्न हुई। वक्ताओं ने बताया कि हर वर्ष यज्ञोपवीत संस्कार होते हैं, लेकिन इस बार यह बड़े स्तर पर हुआ है। जो कि एक बहुत अच्छी और गर्व की बात है।
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हल्दी उबटन की अलौकिक प्रक्रिया के साथ वैदिक विधि से समस्त कार्यक्रम को उपस्थित आचार्य महेंद्र उपाध्याय और उनकी टीम के कुशल नेतृत्व में संचालित किया गया इस कार्यक्रम में डायरेक्टर स्पेशल सर्विस फोर्सेस शक्ति कुमार पाठक, इंडस्ट्रियल एस्टेट कठुआ दविंदर वर्मा, एडीसी बसोहली सहित नगर कमेटी अध्यक्ष भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वैदिक और मंत्रोच्चारण के साथ हवन किया गया। उपस्थित वक्ताओं ने यगोपवित संस्कार पर रोशनी डालते हुए इसकी विस्तार पूर्वक जानकारी उपस्थित को दी। चूड़ामणि संस्कृत संस्थान के प्राचार्य ने कहा कि मानव जीवन में स्वर्गीय विकास में संस्कारों का महत्वपूर्ण स्थान है हम उन संस्कारों को अपनाएं जिन की नींव पर हमारी संस्कृति खड़ी है। उनमें से यज्ञोपवीत भी एक संस्कार है इसके निर्माण में विशेष विधि अपनाई गई है। इस विषय को समझना चाहिए। सनातन धर्म और संस्कृति का आधार इसकी आध्यात्मिकता और जो पवित्र संस्कारों में मार्जित आचार व्यवहार और सदव्रत पर टिकी है।
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वहीं समापन पर रामलीला मैदान बसोहली से रैली निकाली गई जो वापिस चूड़ामणि संस्कृत संस्थान पहुंचकर संपन्न हुई। वक्ताओं ने बताया कि हर वर्ष यज्ञोपवीत संस्कार होते हैं, लेकिन इस बार यह बड़े स्तर पर हुआ है। जो कि एक बहुत अच्छी और गर्व की बात है।
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