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दो घंटे बैठे रहे अधिकारी, नहीं आए फरियादी
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हीरानगर। ब्लॉक दिवस कार्यक्रम में अब आम लोग रुचि कम दिखा रहे हैं। बुधवार को लोक निर्माण विभाग के अतिथि गृह में सभी विभागों के अधिकारी तो मौजूद रहे, लेकिन कोई भी फरियादी अपनी समस्या लेकर नहीं आया। दो घंटे बैठने के बाद सभी अधिकारी वापस चले गए।
बीते सप्ताह के कार्यक्रम में भी सिर्फ एक पूर्व सरपंच ही पहुंचे थे और क्षेत्र की समस्याओं के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी थी। इस कार्यक्रम की वजह से कार्यालयों में अधिकारी नहीं मिलते हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। कुछ लोगों ने इस कार्यक्रम को बंद करने की मांग की है। सरपंच सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम का आम लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है, इसलिए इसे बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा बुधवार को इस कार्यक्रम को लेकर सभी अधिकारियों को अपने कार्यालय छोड़कर बैठना पड़ा।
वहां भी कोई अपनी समस्या सुनाने नहीं आया। इधर, सरकारी कार्यालयों में आने वाले लोगों को अधिकारियों की अनुपस्थिति की वजह से परेशान होना पड़ता है। अधिकारी भी अब इस बात को समझने लगे हैं। वहीं सरपंच राकेश चौधरी ने कहा यह कार्यक्रम मात्र औपचारिकता बनकर रह गया है। बुधवार को सभी कार्यालयों के अधिकारी एक जगह पर इकट्ठा होकर लोगों का इंतजार करते रहे और चले गए। कोई भी उन्हें अपनी समस्या सुनाने नहीं आता है। इसलिए उपराज्यपाल से ही हमारी मांग है कि इस कार्यक्रम को बंद कर दिया जाए।
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बीते सप्ताह के कार्यक्रम में भी सिर्फ एक पूर्व सरपंच ही पहुंचे थे और क्षेत्र की समस्याओं के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी थी। इस कार्यक्रम की वजह से कार्यालयों में अधिकारी नहीं मिलते हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। कुछ लोगों ने इस कार्यक्रम को बंद करने की मांग की है। सरपंच सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम का आम लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है, इसलिए इसे बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा बुधवार को इस कार्यक्रम को लेकर सभी अधिकारियों को अपने कार्यालय छोड़कर बैठना पड़ा।
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वहां भी कोई अपनी समस्या सुनाने नहीं आया। इधर, सरकारी कार्यालयों में आने वाले लोगों को अधिकारियों की अनुपस्थिति की वजह से परेशान होना पड़ता है। अधिकारी भी अब इस बात को समझने लगे हैं। वहीं सरपंच राकेश चौधरी ने कहा यह कार्यक्रम मात्र औपचारिकता बनकर रह गया है। बुधवार को सभी कार्यालयों के अधिकारी एक जगह पर इकट्ठा होकर लोगों का इंतजार करते रहे और चले गए। कोई भी उन्हें अपनी समस्या सुनाने नहीं आता है। इसलिए उपराज्यपाल से ही हमारी मांग है कि इस कार्यक्रम को बंद कर दिया जाए।
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