{"_id":"618983ebeb26273d15141736","slug":"civic-animities-kathua-news-jmu247405341","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंतर्राज्यीय जलमार्ग को लेकर कवायद ठंडे बस्ते में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंतर्राज्यीय जलमार्ग को लेकर कवायद ठंडे बस्ते में
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कठुआ। बसोहली में अटल सेतु के जरिए सड़क मार्ग से जुड़े हिमाचल, पंजाब और जम्मू-कश्मीर को जलमार्ग से भी जोड़ने की कवायद ठंडे बस्ते में है। अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा रावी दरिया को राष्ट्रीय जलमार्ग 84 घोषित कर भारतीय राजपत्र में भी शामिल किया गया है। एनएचपीसी संचालित सेवा चरण दो जलविद्युत परियोजना से सटे गंडियार से शुरू होकर यह जलमार्ग रंजीत सागर बांध तक प्रस्तावित है।
लगभग 44 किलोमीटर के इस जलमार्ग में पर्यटन के साथ-साथ जलमार्गों की टैपिंग, अंतर्राज्यीय कनेक्टिविटी, मछली पालन की संभावनाओं, जलमार्ग से सटे और सड़क मार्ग से दूर इलाकों को सीधे तौर पर जोड़ने सहित माल ढुलाई और यात्रियों को विभिन्न इलाकों तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशी जा रही थीं।
खास बात यह है कि इस जलमार्ग से बनी सरथल, हिमाचल के चंबा जिले, डलहौजी और भद्रवाह को जाने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित किया जा सकेगा।
बसोहली से भद्रवाह की टूरिज्म सर्किट को विस्तार देने के लिए सरकार भी काफी रुचि दिखा रही है। रावी दरिया के जलमार्ग से कम समय में अंतर्राज्यीय परिवहन, रोजाना होने वाली फल-सब्जियों, डेयरी, मछलियों, सरकारी राशन, भवन निर्माण सामग्री की दूरदराज इलाकों तक ढुलाई, कार्गो में भी मदद मिलेगी।
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जलमार्ग के दायरे, रूपरेखा पर हो चुका है प्रारंभिक अभ्यास
अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की टीम के तीन वर्ष पूर्व प्रस्तावित रावी दरिया के दौरे से पूर्व ही जिला प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर जलमार्ग 84 के दायरे, रूपरेखा पर प्रारंभिक अभ्यास पूरा कर लिया गया था। बसोहली में स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को राजस्व विभाग के साथ समन्वय कर रंजीत सागर बांध स्थल से सेवा परियोजना की साइट तक क्षेत्र का सर्वेक्षण करवाया गया, जिसमें जलमार्ग के विकास के लिए परिवहन और मनोरंजक गतिविधियों के लिए क्षेत्र के संभावित हिस्सों की पहचान की गई थी। लेकिन इसके बाद यह कवायद आगे नहीं बढ़ पाई है।
चिनाब, झेलम और सिंधु नदी पर भी हैं जलमार्ग
रावी दरिया के साथ-साथ अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा जम्मू-कश्मीर में चिनाब, झेलम और सिंधु नदियों को भी राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है। चिनाब नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग 26 चिनाब सड़क पुल से शुरू होकर भरड़ा कलां पुल तक प्रस्तावित है, जबकि झेलम नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग 49 हाईवे के नजदीक पुल से शुरू होकर श्रीनगर की वुल्लर झील तक जाएगा। इसी तरह से लद्दाख में सिंधु नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग 46 उपशी गांव के नजदीक नेशनल हाईवे से शुरू होकर शेय गांव के नजदीक शेय चुचोल सड़क पर पुल के नजदीक तक होगा।
ढाई वर्ष से किसी भी विभाग की ओर से इस संबंध में कोई भी कवायद शुरू नहीं की गई है। जिस तरह से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है और सरकार कई परियोजनाओं पर काम कर रही है, यदि इस परियोजना के संबंध में सरकार की ओर से निर्देश मिलेंगे, तो इस पर भी काम संबंधित एजेंसी के साथ मिलकर करवाया जाएगा।
- तिलक राज थापा, एडीसी, बसोहली
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लगभग 44 किलोमीटर के इस जलमार्ग में पर्यटन के साथ-साथ जलमार्गों की टैपिंग, अंतर्राज्यीय कनेक्टिविटी, मछली पालन की संभावनाओं, जलमार्ग से सटे और सड़क मार्ग से दूर इलाकों को सीधे तौर पर जोड़ने सहित माल ढुलाई और यात्रियों को विभिन्न इलाकों तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशी जा रही थीं।
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खास बात यह है कि इस जलमार्ग से बनी सरथल, हिमाचल के चंबा जिले, डलहौजी और भद्रवाह को जाने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित किया जा सकेगा।
बसोहली से भद्रवाह की टूरिज्म सर्किट को विस्तार देने के लिए सरकार भी काफी रुचि दिखा रही है। रावी दरिया के जलमार्ग से कम समय में अंतर्राज्यीय परिवहन, रोजाना होने वाली फल-सब्जियों, डेयरी, मछलियों, सरकारी राशन, भवन निर्माण सामग्री की दूरदराज इलाकों तक ढुलाई, कार्गो में भी मदद मिलेगी।
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जलमार्ग के दायरे, रूपरेखा पर हो चुका है प्रारंभिक अभ्यास
अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की टीम के तीन वर्ष पूर्व प्रस्तावित रावी दरिया के दौरे से पूर्व ही जिला प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर जलमार्ग 84 के दायरे, रूपरेखा पर प्रारंभिक अभ्यास पूरा कर लिया गया था। बसोहली में स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को राजस्व विभाग के साथ समन्वय कर रंजीत सागर बांध स्थल से सेवा परियोजना की साइट तक क्षेत्र का सर्वेक्षण करवाया गया, जिसमें जलमार्ग के विकास के लिए परिवहन और मनोरंजक गतिविधियों के लिए क्षेत्र के संभावित हिस्सों की पहचान की गई थी। लेकिन इसके बाद यह कवायद आगे नहीं बढ़ पाई है।
चिनाब, झेलम और सिंधु नदी पर भी हैं जलमार्ग
रावी दरिया के साथ-साथ अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा जम्मू-कश्मीर में चिनाब, झेलम और सिंधु नदियों को भी राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है। चिनाब नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग 26 चिनाब सड़क पुल से शुरू होकर भरड़ा कलां पुल तक प्रस्तावित है, जबकि झेलम नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग 49 हाईवे के नजदीक पुल से शुरू होकर श्रीनगर की वुल्लर झील तक जाएगा। इसी तरह से लद्दाख में सिंधु नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग 46 उपशी गांव के नजदीक नेशनल हाईवे से शुरू होकर शेय गांव के नजदीक शेय चुचोल सड़क पर पुल के नजदीक तक होगा।
ढाई वर्ष से किसी भी विभाग की ओर से इस संबंध में कोई भी कवायद शुरू नहीं की गई है। जिस तरह से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है और सरकार कई परियोजनाओं पर काम कर रही है, यदि इस परियोजना के संबंध में सरकार की ओर से निर्देश मिलेंगे, तो इस पर भी काम संबंधित एजेंसी के साथ मिलकर करवाया जाएगा।
- तिलक राज थापा, एडीसी, बसोहली