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ऊंट के मुंह में जीरा है बाढ़ की राहत राशि
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Sat, 18 Oct 2014 06:22 PM IST
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एक तरफ बाढ़ प्रभावितों के लिए केंद्र सरकार ने एक हजार करोड़ दिए और राज्य सरकार भी मदद कर ही रही है। फिर भी जिला में बाढ़ प्रभावितों को बतौर राहत राशि मिला धन ऊंट के मुंह में जीरा समान ही है। नुकसान के मुकाबले स्टेट डिजास्टर रिलीफ फंड के तहत अभी तक जो पैसा जिला प्रशासन को आवंटन के लिए आया है वह अकेले लोक निर्माण विभाग के नुकसान की भी भरपाई नहीं कर पाता।
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ऐसे में जिला प्रशासन ने अभी इस पैसे को केवल जान-माल की हानि के लिए ही इस्तेमाल में लाया है। सड़क संपर्क या फिर इस प्रकार के अन्य नुकसान के लिए पैसा इस्तेमाल में नहीं लाया गया है।
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प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इस साल हुए नुकसान के कुल 5103 मामलों के लिए लगभग एक करोड़ 91 लाख रुपये आए हैं जिनमें सबसे अधिक पैसा कठुआ तहसील में इस्तेमाल में लाया गया। यहां कुल 1524 मामलों के लिए करीब 54 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।
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वहीं सबसे कम पैसा महानपुर तहसील में 98 मामलों के लिए करीब दो लाख रुपये के आया है। वहीं अगर नुकसान की बात करें तो अकेले लोक निर्माण विभाग के नुकसान का आंकड़ा की साढ़े चार करोड़ रुपये का है। कृषि विभाग का आंकड़ा भी एक करोड़ रुपये से ऊपर है। ऐसे में दो करोड़ रुपये से सरकार कैसे नुकसान की भरपाई करेगी।