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प्यासे ग्रामीणों ने खुद खोज ली ‘पाताल गंगा’

Wed, 08 Jun 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,कठुआ
ब्यूरो/अमर उजाला,कठुआ Updated Wed, 08 Jun 2016 01:15 AM IST
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buddhi villagers not thirsty now
हैंडपंप से पानी भरते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
 बरनोटी ब्लाक का बुद्धि गांव। पानी के लिए त्राहिमाम मचा था। प्यासे लोग पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे थे। एक बूंद पानी भी जहां उम्मीद दिखती वहां वह आस लेकर पहुंच जाते। पानी के लिए विभागीय अधिकारियों और यहां तक कि प्रशासन से भी गुहार लगाई। तब कही तीस मिनट से कम और सप्ताह में एक बार ही पीने का पानी गांव वालों को नसीब होता था।
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 प्यासा कंठ लेकर दर-दर भटकने वाले लोगों ने आखिर खुद ही समस्या हल करने की ठान ली। मंगलवार से गांव में पानी की समस्या का समाधान हो गया। इसके लिए स्थानीय युवा ही सामने आए। उन्होंने आपसी सहयोग ने पूरे गांव की प्यास को बुझाना दी। अब बुद्धि गांव ही नहीं, सौंथल और नगरोटा के लोगों को भी मनचाहा पानी मिल गया है।
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 दरअसल, गांव के चार युवाओं ने पानी की समस्या हल करने के लिए गांव के ही लोगों का सहयोग लिया। सभी ने खराब पड़े पुराने हैंडपंप की मरम्मत करने की ठान ली। इस योजना को परवान चढ़ने में ज्यादा समय नहीं लगा। कुछ ही दिनों के भीतर गांववासियों के सहयोग से लगभग पचास हजार रुपये खर्च कर हैंडपंप सही करा लिया गया। यही नहीं इसमें मोटर फिट करवा दी। अब गांव में पानी की कोई कमी नहीं रह गई है।
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लाइन लगती है, पर कोई निराश नहीं लौटता: खुशी के मारे ग्रामीणों ने इस वाटर प्वाइंट की तुलना पाताल गंगा से करना शुरू कर दी है। यहां पानी लेने के लिए लंबी कतार तो लगती है, लेकिन कोई भी निराश नहीं लौटता। गांव के लोगों ने ऐसी सोच और जज्बे के लिए अर्जुन कुमार, पंकजेश्वर, रामेश्वर, राकेश कुमार का आभार भी जताया।


पानी के लिए हो जाता था झगड़ा: वृद्ध मनिराम शर्मा ने कहा कि पानी को लेकर गांव में झगड़ों तक की नौबत आ चुकी थी। मंगलवार को पानी भरने के लिए पहुंची महिला चिंतपूर्णी ने कहा कि गांव में पर्याप्त मात्रा में पानी मिलना मानो सपना पूरा होने जैसा है। पानी को लेकर ग्रामीणों खासकर महिलाओं ने काफी कठिन समय भी देखा है जब उन्हें बरनोटी या दबवाल से पानी लाने को मजबूर होना पड़ता था। उन्होंने कहा कि अब स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है।
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