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Money Laundering : 200 करोड़ के घोटाले में भारत पेपर मिल के निदेशक अनिल अग्रवाल गिरफ्तार, ED की कार्रवाई
Thu, 08 Feb 2024 04:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 08 Feb 2024 04:30 AM IST
सार
200 करोड़ के ऋण घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भारत पेपर्स लिमिटेड के निदेशक कठुआ निवासी अनिल कुमार अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया।
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विस्तार
200 करोड़ के ऋण घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भारत पेपर्स लिमिटेड के निदेशक कठुआ निवासी अनिल कुमार अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया। अग्रवाल के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक सहित अन्य बैंकों से धोखाधड़ी करने का आरोप है।
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अधिकारियों ने बताया कि अग्रवाल ने अन्य निदेशकों के साथ मिलकर भारतीय स्टेट बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और करूर वैश्य बैंक के साथ धोखाधड़ी की है। ईडी ने विशेष लोक अभियोजक अश्वनी खजूरिया के माध्यम से बुधवार को जम्मू में विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निरोधक (सीबीआई मामले) बाला ज्योति की अदालत में एक आवेदन दायर कर आरोपी का सात दिन का रिमांड हासिल किया है।
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जानकारी के अनुसार, 12 फरवरी 2020 को एसबीआई की लुधियाना शाखा की शिकायत पर धोखाधड़ी का यह मामला खुला था। तब से कठुआ स्थित भारत पेपर्स लिमिटेड के निदेशक अनिल कुमार अग्रवाल सहित अन्य निदेशक मंडल सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जम्मू केस दर्ज कर जांच कर रही है। ईडी ने 31 मार्च, 2023 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत भी जांच की।
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इसके बाद एजेंसी ने भारत पेपर्स लिमिटेड के परिसरों और कई अन्य स्थानों पर तलाशी ली और दस्तावेज जब्त किए। अधिकारियों ने बताया कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट ने पुख्ता सुबूत दिए हैं कि अनिल अग्रवाल धोखाधड़ी की पूरी गतिविधि में शामिल रहे।
फर्जी संस्थाओं के माध्यम से निकाली ऋण की रकम, मशीनों की विक्री भी अवैध दिखाई
अधिकारियों के मुताबिक जांच में पता चला है कि कंपनी ने व्यक्तिगत उपयोग और गलत लाभ के लिए धन का दुरुपयोग किया। अधिकारियों ने बताया कि अन्य निदेशकों के बयानों से पता चला है कि भारत पेपर्स लिमिटेड के मुख्य निदेशकों में से एक अग्रवाल कंपनी का संचालन और वित्त देख रहे थे। जांच से पता चला कि बैंकों से लिया 200 करोड़ रुपये ऋण फर्जी संस्थाओं के माध्यम से निकालकर और फर्जी चालान बनाकर मशीनरी की अवैध बिक्री दिखाई।
जांच के दौरान अग्रवाल के बयान 1 फरवरी और 6 फरवरी को दर्ज किए गए लेकिन उन्होंने सभी सवालों का जवाब गोलमोल दिया और जांच में सहयोग नहीं किया। अधिकारियों ने कहा कि आरोपी सावधि ऋण और नकद क्रेडिट सीमा के रूप में बैंकों के संघ से प्राप्त धन को निकालने के लिए आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के माध्यम से अर्जित अपराध की आय से जुड़ी प्रक्रिया या गतिविधि में शामिल था, इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया।