फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kathua News ›   3700 transformers load on 250 technicians

3700 ट्रांसफार्मरों का भार ढाई सौ तकनीशियनों पर

Wed, 08 Jun 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,कठुआ
ब्यूरो/अमर उजाला,कठुआ Updated Wed, 08 Jun 2016 01:03 AM IST
विज्ञापन
3700 transformers load on 250 technicians
बिजली - फोटो : अमर उजाला

राज्य सरकार भले ही अगले तीन वर्ष में चौबीस घंटे बिजली देने का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर नजर आ रही है। कठुआ जिले में दस वर्षों में बिजली का नेटवर्क लगभग पांच गुना बढ़ चुका है, लेकिन इसके नियंत्रण, देखरेख और संभाल के लिए जरूरी स्टाफ तक नहीं है।

विज्ञापन


विभागीय आंकड़ाें के अनुसार दशकों पहले जिले में मात्र 250 तकनीशियन नियुक्त किए गए थे। उस समय एक तकनीशियन के पास तीन से चार ट्रांसफार्मर का जिम्मा हुआ करता था। समय के साथ अब यह आंकड़ा व्यापक स्तर पर बढ़ चुका है।
विज्ञापन


वर्तमान में जिले में 3700 ट्रांसफार्मर हैं। इनके रखरखाव के लिए विभाग के पास सिर्फ 250 स्थायी तकनीशियन हैं। इनमें भी 100 के करीब मीटर रीडिंग या फिर लोगों को बिल बांटने का काम करते हैं। बड़ा सवाल है कि आखिर बिजली ढांचे को संभाल कौन रहा है। इसकी पड़ताल में जो सामने आया वह हैरान करने वाला है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विभाग ने वर्ष 1994 तक 305 डेलीवेजर और 174 कैजुअल लेबर को विभाग में जगह दी। इन्हें सरकार ने आज तक अपना कर्मचारी नहीं माना है। हैरत की बात है कि जिले के अधिकतर ट्रांसफार्मरों और सैकड़ों किलोमीटर लंबे एचटी और एलटी नेटवर्क को संभालने का जिम्मा भी इनके कंधों पर है। यहां तक कि विभाग ने आज तक इन्हें प्रशिक्षण देने की जहमत नहीं उठाई।

यही वजह है कि पिछले पांच दशक में लगभग तीस लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। चौंकाने वाला पहलू यह भी है कि इन लाइनमैनों को न तो सेफ्टी किट और न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई सहयोग मिलता है।

चार दशक में जिले में बिजली सेवा को नेटवर्क बेतहाशा बढ़ चुका है। बिजली विभाग का दावा है है कि जिले में एक भी गांव ऐसा नहीं है, जहां बिजली नहीं पहुंची है।

हालांकि, छह सौ से अधिक ऐसे गांव हैं जहां बिजली तो पहुंच गई है, लेकिन अधिकतर उपभोक्ताओं को मिल नहीं पाई है। इनमें से 462 गांव को दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना के तहत रोशन करने की तैयारी है।


हैरानी की बात यह है कि इस बार भी इस स्कीम में मैनपावर कंपोनेंट ही नहीं है। यानी इस बिजली सुधार की प्रक्रिया में लगने वाले कई सौ किलोमीटर के कंडक्टर, ट्रांसफार्मरों और खंभों की जिम्मेदारी फिर उसी स्टाफ पर रहेगी जो पहले से ओवरलोड है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed