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सरकारी महकमों में ‘आधी आबादी’ पर पुरुष भारी
संजीव दुबे/जम्मू
Updated Sat, 23 Mar 2013 08:56 PM IST
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जम्मू-कश्मीर सरकार में कार्यरत महिलाओं की तादाद के अनुपात को आधार बनाएं तो नारी अभी भी बेचारी नजर आती है। केवल तीन महकमों चिकित्सा, समाज कल्याण और स्कूल शिक्षा को छोड़ दें तो ज्यादातर महकमों में महिलाओं की हिस्सेदारी या तो नाममात्र की है, या फिर है ही नहीं।
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प्रशासनिक सेवाएं हों या फिर अन्य सरकारी महकमे, सभी में महिला सशक्तीकरण के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। विधान परिषद में दी गई जानकारी के मुताबिक सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में एक भी महिला कर्मी नहीं है। पुलिस के कई विंग महिला कर्मियों से विहीन हैं।
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सीएपीडी, सहकारिता, राजस्व, बिजली, परिहवन, पीडब्ल्यूडी आदि विभागों में भी महिला कर्मियों की संख्या पुरुष कर्मियों की तुलना में कहीं नहीं बैठतीं।
विधान परिषद में नेकां सदस्य डा. शहनाज गनेई की ओर से इस संबंध में पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर ने बताया कि जम्मू कश्मीर की सीनियर प्रशासनिक सेवाओं में 12.03 फीसदी महिला अधिकारी हैं।
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जूनियर स्केल के प्रशासनिक अधिकारियों में 11.87 फीसदी, जम्मू-कश्मीर पुलिस में तीन फीसदी और स्थानीय निकायों में 6.7 फीसदी महिला कर्मचारी ही हैं। सूचना प्रोद्योगिकी विभाग में कोई महिला कर्मी नहीं है।
राजस्व विभाग में दस फीसदी, पीडब्ल्यूडी में राजपत्रित पदों पर तीन फीसदी और गैर राजपत्रित पदों पर आठ फीसदी महिला कर्मी हैं। सहकारिता में छह, सीएपीडी विभाग में सात और एआरआई और ट्रेनिंग विभाग में चार फीसदी महिला कर्मी ही हैं।
रोजगार विभाग में 24.5 फीसदी महिला कर्मी है। पुलिस के यातायात विभाग में 0.26 फीसदी महिला कर्मी ही है। डीएसपी मिनिस्टेरियल में कोई महिला अधिकारी नहीं है। टेलिकाम गजटेड में भी कोई महिला अधिकारी नहीं है। कुल मिलाकर जम्मू जोन में 2.86 फीसदी और कश्मीर जोन में 1.91 फीसदी महिला कर्मी पुलिस में है।
केवल तीन विभागों में महिला कर्मियों की हालत कुछ अच्छी है। इनमें स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में 52.01 फीसदी महिला कर्मी है। समाज कल्याण विभाग में 48 और स्कूली शिक्षा विभाग में तीस फीसदी महिला कर्मी हैं।