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सत्र न्यायाधीश के जबरन रिटायरमेंट आदेश पर रोक
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 01 May 2016 12:44 PM IST
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जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनपाल बसंथा कुमार और न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश बृज मोहन गुप्ता को जबरन रिटायर्ड करने के सिंगल बेंच के आदेशों को खारिज कर दिया। खंडपीठ ने याची बृज मोहन को सामान्य रिटायरमेंट दिए जाने का फैसला दिया और रजिस्ट्री को एक सप्ताह के भीतर आदेश जारी करने के लिए कहा।
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याची ने खंडपीठ के समक्ष अपील की कि उसकी एक जनवरी 2014 में सरकारी आदेश के मुताबिक जबरन रिटायरमेंट कर दी गई। हाईकोर्ट को रिटायर्डमेंट मामले में 11 जूून 2013 को सूचना दी गई थी। आदेश गैर कानूनी है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। अपील में दलील दी गई कि याची की उम्र 60 साल है। उसे सभी लाभ व सुविधाओं के साथ रिटायर्ड करना चाहिए। याची 26 अक्तूबर 1983 को मुंसिफ बनिहाल के तौर पर नियुक्त हुआ।
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वह 1995 में सब जज पद के लिए पदोन्नत हुआ। याची 23 नवंबर 1995 को जिला सत्र न्यायाधीश के तौर पदोन्नत किए गए। दो साल के प्रोबेशन समय के बाद 2003 वह स्थायी तौर पर जिला न्यायाधीश के तौर पर काम करने लगे। उनके सर्विस रिकार्ड को देखने के बाद उन्हें लगातार प्रोमोशन मिलती रही।
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जब जब याची 58 साल के पूरे हुए तो उन्हें सामान्य तौर पर सेवानिवृत्त करना चाहिए था। जबकि सरकार ने उन्हें जबरन रिटायरमेंट के आदेश दिए। जो अवैध एवं गैर कानूनी हैं। खडपीठ ने पाया याची को 31 अगस्त 2013 को सेवानिवृत्त कर देना चाहिए था। जब याची की उम्र 58 साल हो गई तो उसका रिटायरमेंट को रद्द करना गैर कानूनी है। केवल अगली नियुक्ति के लिए याची की प्रमोशन या कार्य विस्तार करने के आदेशों को रद्द किया जा सकता है।