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एंटी करप्शन ब्यूरो: जेएंडके बैंक के 1100 करोड़ रुपये के घोटाले में 31 लोगों पर चार्जशीट
Tue, 29 Jun 2021 10:19 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Tue, 29 Jun 2021 10:19 PM IST
सार
नियमों को ताक पर रख दिया गया फसल ऋण, एसीबी ने दो साल में जांच पूरी की।
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J&K BANK
- फोटो : File Photo
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विस्तार
एंटी करप्शन ब्यूरो ने 1100 करोड़ रुपये के घोटाले में 31 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। आरोपियों में आरईआई एग्रो लिमिटेड कंपनी के एमडी संदरव झुझुनवाला, जम्मू-कश्मीर की माहिम ब्रांच के प्रबंधक मोहम्मद युसुफ भट्ट और अन्य 29 लोग शामिल हैं। 2019 में एसीबी ने इसे लेकर केस दर्ज किया था। आरोप है कि कंपनी ने जेके बैंक से लोन लिया और वापस नहीं किया।
बैंक ने अवैध रूप से नियमों को ताक पर रखकर पहले 400 करोड़ रुपये का फसल ऋण (क्राप लोन), फिर 150 करोड़ रुपये का टर्म लोन और बिल भुगतान में छूट की सुविधा में 115 करोड़ रुपये मंजूर किए। जांच में पाया गया कि आरईआई एग्रो लिमिटेड एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है जिसका पंजीकृत कार्यालय एवरेस्ट हाउस 46-सी, चौरंगी रोड, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में है, लेकिन बाद में कंपनी ने अपना पंजीकृत कार्यालय जिला रेवाड़ी हरियाणा में स्थानांतरित कर दिया।
आरईआई एग्रो लिमिटेड देश में बासमती धान को खरीदकर इसका चावल तैयार करता था। इस उद्देश्य के लिए यह बैंकों से फसल ऋण प्राप्त करता था और इसे किसानों, जेएलजी समूहों (संयुक्त देयता समूह) के खातों में जमा और प्राप्त करता था। किसानों से धान, धान की उपज और कंपनी के स्वामित्व वाली मिल में धान को प्रसंस्करण करने के बाद, यह प्राप्त ऋण को चुकाने के लिए बाजार में चावल बेच रहा था।
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यह भी पढ़ें- श्री अमरनाथ यात्रा: कश्मीर के ऐतिहासिक मंदिरों से पहुंचेगी अमरनाथ छड़ी मुबारक, 22 अगस्त को होंगे बाबा बर्फानी के दर्शन
जेएंडके बैंक ने एक मॉडल तैयार किया था जहां जेएंडके बैंक के तहत किसानों को फसल ऋण प्रदान करना था और किसानों को आरईआई एग्रो लिमिटेड को धान उपलब्ध कराना था। बदले में कंपनी को उपज (धान) और प्राप्त अग्रिमों को किस्तों के रूप में बैंक में जमा किया जाना था। इसे लेकर जेएंडके बैंक, आरईआई एग्रो लिमिटेड और जेएलजी के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता किया गया। जांच में पाया गया कि कंपनी के एमडी की लोन को वापस करने की कोई मंशा नहीं थी।
शुरुआत में सिर्फ एक ही मकसद था कि बैंक से किसी तरह पैसा लेना है। लिहाजा जेएलजी के जरिये 400 करोड़ का क्राप लोन मंजूर किया गया। बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से लोन में ऐसे किसानों के नाम थे जो हकीकत में थे ही नहीं। मामले की पूरी जांच करने के बाद पाया गया कि उक्त कंपनी ने बैंक के साथ मिलकर बैंक को लगभग 1100 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। मामले में अभी आगे की जांच जारी है।
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बैंक ने अवैध रूप से नियमों को ताक पर रखकर पहले 400 करोड़ रुपये का फसल ऋण (क्राप लोन), फिर 150 करोड़ रुपये का टर्म लोन और बिल भुगतान में छूट की सुविधा में 115 करोड़ रुपये मंजूर किए। जांच में पाया गया कि आरईआई एग्रो लिमिटेड एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है जिसका पंजीकृत कार्यालय एवरेस्ट हाउस 46-सी, चौरंगी रोड, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में है, लेकिन बाद में कंपनी ने अपना पंजीकृत कार्यालय जिला रेवाड़ी हरियाणा में स्थानांतरित कर दिया।
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आरईआई एग्रो लिमिटेड देश में बासमती धान को खरीदकर इसका चावल तैयार करता था। इस उद्देश्य के लिए यह बैंकों से फसल ऋण प्राप्त करता था और इसे किसानों, जेएलजी समूहों (संयुक्त देयता समूह) के खातों में जमा और प्राप्त करता था। किसानों से धान, धान की उपज और कंपनी के स्वामित्व वाली मिल में धान को प्रसंस्करण करने के बाद, यह प्राप्त ऋण को चुकाने के लिए बाजार में चावल बेच रहा था।
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जेएंडके बैंक ने एक मॉडल तैयार किया था जहां जेएंडके बैंक के तहत किसानों को फसल ऋण प्रदान करना था और किसानों को आरईआई एग्रो लिमिटेड को धान उपलब्ध कराना था। बदले में कंपनी को उपज (धान) और प्राप्त अग्रिमों को किस्तों के रूप में बैंक में जमा किया जाना था। इसे लेकर जेएंडके बैंक, आरईआई एग्रो लिमिटेड और जेएलजी के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता किया गया। जांच में पाया गया कि कंपनी के एमडी की लोन को वापस करने की कोई मंशा नहीं थी।
शुरुआत में सिर्फ एक ही मकसद था कि बैंक से किसी तरह पैसा लेना है। लिहाजा जेएलजी के जरिये 400 करोड़ का क्राप लोन मंजूर किया गया। बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से लोन में ऐसे किसानों के नाम थे जो हकीकत में थे ही नहीं। मामले की पूरी जांच करने के बाद पाया गया कि उक्त कंपनी ने बैंक के साथ मिलकर बैंक को लगभग 1100 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। मामले में अभी आगे की जांच जारी है।